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1 जनवरी को देश-विदेश में बसे मध्यदेशीय वैश्य समाज से दर्शन-पूजन और सेवा-संकल्प की अपील

नव वर्ष की पहली सुबह… आस्था की पहली किरण… और कुल गुरु बाबा गणिनाथ जी के चरणों में नमन- यही वह पावन क्षण है, जब समाज अपने अतीत की परंपरा, वर्तमान की जिम्मेदारी और भविष्य के संकल्प को एक सूत्र में पिरोता है। इसी भावभूमि पर बाबा गणिनाथ भक्त मण्डल के राष्ट्रीय संरक्षक राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता ने मध्यदेशीय वैश्य समाज के देश–विदेश में बसे समस्त स्वजातीय बंधुओं से भावपूर्ण की अपील की है। राष्ट्रीय संरक्षक ने अपने संदेश में कहा कि नव वर्ष का प्रथम दिन, 1 जनवरी 2026, केवल कैलेंडर की तारीख नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संकल्प और सेवा-मार्ग पर अग्रसर होने का दिव्य अवसर है। इस दिन प्रातःकाल अपने–अपने क्षेत्र में स्थित बाबा गणिनाथ जी के मंदिर में पहुँचकर दर्शन–पूजन करें, बाबा का आशीर्वाद प्राप्त करें और उसी पावन ऊर्जा के साथ वर्ष के समस्त कार्यों का शुभारंभ करें।

  • नव वर्ष की पहली सुबह बाबा गणिनाथ जी के चरणों में-आस्था, एकता और सेवा का राष्ट्रीय आह्वान

नव वर्ष की पहली सुबह समाज के लिए दिशा तय करती है। यही वह क्षण होता है, जब एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरा समाज यह निर्णय करता है कि आने वाला वर्ष केवल समय का परिवर्तन होगा या संस्कार, सेवा और संगठन का नया अध्याय। इसी भाव के साथ 1 जनवरी 2026 को नव वर्ष के प्रथम प्रातःकाल कुल गुरु बाबा गणिनाथ जी के चरणों में दर्शन–पूजन करने का राष्ट्रीय आह्वान किया गया है।

बाबा गणिनाथ भक्त मण्डल के राष्ट्रीय संरक्षक राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता ने देश-विदेश में बसे समस्त मध्यदेशीय वैश्य समाज से स्पष्ट और भावपूर्ण अपील करते हुए कहा है कि नव वर्ष की शुरुआत किसी औपचारिक उत्सव से नहीं, बल्कि आस्था और संकल्प के साथ बाबा के दरबार में शीश नवाकर की जाए। उन्होंने समाज से आग्रह किया है कि 1 जनवरी 2026 को प्रातःकाल अपने–अपने क्षेत्र में स्थित बाबा गणिनाथ मंदिर पहुँचकर दर्शन-पूजन करें और उसी पावन आशीर्वाद के साथ पूरे वर्ष के कार्यों, दायित्वों और सेवा-प्रयासों का शुभारंभ करें।

यह आह्वान केवल धार्मिक भावना नहीं, बल्कि समाज को एकजुट करने वाला राष्ट्रीय संदेश है- जहाँ हर परिवार, हर संगठन और हर क्षेत्र एक साथ खड़ा होकर यह संकल्प ले कि वर्ष की पहली सांस आस्था से और पहला कदम सेवा की दिशा में उठे। यही वह क्षण है, जब समाज अपने भविष्य का मार्ग स्वयं निर्धारित करता है।

उन्होंने विशेष रूप से काशी के श्रद्धालुओं का स्मरण करते हुए कहा कि बाबा की कृपा से काशी के स्वजातीय बंधुओं का वर्ष अत्यंत शुभ, सफल और संतुलित रूप से व्यतीत हुआ। सेवा-कार्य हों, सामाजिक पहलें हों या पारिवारिक दायित्व-हर स्तर पर बाबा का आशीर्वाद अनुभव हुआ। यह अनुभव केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामूहिक है-जो समाज की एकजुटता और आस्था की शक्ति को प्रमाणित करता है।

आस्था से आरंभ- सिद्धि की ओर प्रस्थान

राष्ट्रीय संरक्षक ने कहा कि समाज का इतिहास साक्षी है-जब आरंभ बाबा के चरणों से होता है, तो हर प्रयास सिद्धि की ओर बढ़ता है। बाबा की कृपा से ही जीवन की दिशाएँ प्रकाशित होती हैं; उनके आशीर्वाद से ही सेवा, संस्कार और समाज-कार्य सफल होते हैं। यही कारण है कि भक्त मण्डल वर्षों से यह परंपरा निभाता आया है कि नव वर्ष का प्रथम प्रणाम बाबा के चरणों में हो-ताकि पूरे वर्ष का पथ आलोकित रहे।

वर्ष 2025 की स्मृति-सफलता का जीवंत प्रमाण

अपने संदेश में उन्होंने स्मरण कराया कि वर्ष 2025 में भी बाबा गणिनाथ जी के दर्शन कर सेवा-कार्य की जो शुरुआत हुई, वह पूरे वर्ष बाबा की कृपा से अत्यंत सफल रही। शिक्षा-सहयोग, सामाजिक समरसता, संगठनात्मक विस्तार और सेवा-भाव-हर क्षेत्र में सकारात्मक परिणाम सामने आए। यह केवल संयोग नहीं, बल्कि श्रद्धा और संकल्प का फल है। यही वह प्रेरणा है, जो 1 जनवरी 2026 को पूरे देश में एक साथ बाबा के दरबार तक पहुँचने का आह्वान करती है।

राष्ट्रीय स्तर पर एकजुटता का संदेश

राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता ने कहा कि यह अपील किसी एक नगर, एक राज्य या एक संस्था तक सीमित नहीं है। यह राष्ट्रीय स्तर पर समाज को जोड़ने का आह्वान है-जहाँ हर क्षेत्र, हर नगर और हर गांव में बसे स्वजातीय बंधु अपने स्थानीय बाबा गणिनाथ मंदिर में जाकर दर्शन करें, सामूहिक प्रार्थना करें और समाज-सेवा के नए संकल्प लें। यही एकजुटता समाज को सुदृढ़ बनाती है और आने वाली पीढ़ियों को संस्कारों की विरासत सौंपती है।

परिवार-समाज–संस्कार: नव वर्ष का त्रिवेणी संगम

उन्होंने विशेष रूप से आग्रह किया कि इस अवसर पर परिवार सहित, समाज सहित बाबा के दरबार में शीश नवाया जाए। बच्चों को साथ लेकर जाएँ, ताकि वे आस्था, अनुशासन और सेवा के संस्कारों को आत्मसात करें। जब परिवार, समाज और संगठन एक साथ चलते हैं-तभी विकास स्थायी होता है।

काशी से राष्ट्र तक-आस्था की निरंतर धारा

राष्ट्रीय संरक्षक ने काशी की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि यह भूमि सदा से आध्यात्मिक चेतना का केंद्र रही है। बाबा गणिनाथ जी की कृपा से काशी के स्वजातीय बंधुओं ने वर्ष भर सेवा, समर्पण और संयम के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया। यही प्रेरणा अब राष्ट्रव्यापी बने-यही संकल्प 1 जनवरी 2026 को साकार होना चाहिए।

आह्वान

राष्ट्रीय संरक्षक ने समस्त मध्यदेशीय वैश्य समाज से अपील की- 1 जनवरी 2026 को प्रातःकाल अपने क्षेत्र के बाबा गणिनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन करें। बाबा के आशीर्वाद से वर्ष के कार्यों की शुरुआत करें। सेवा, एकता और संस्कार को अपने जीवन का आधार बनाएं। समाज के कमजोर वर्गों के लिए सहयोग और सहकार का संकल्प लें। यह केवल एक धार्मिक निवेदन नहीं, बल्कि समाज के भविष्य का मार्गदर्शन है-जहाँ आस्था, संगठन और सेवा एक साथ चलते हैं।

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