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राम विवाह प्रसंग से गूंजा कथा पांडाल, श्रद्धा और जयकारों में डूबा भलुअनी

भलुअनी, देवरिया में दुर्गा मंदिर परिसर में चल रही संगीतमय श्रीराम कथा के छठवें दिन राम विवाह प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। जय श्रीराम के जयकारों से पांडाल गूंज उठा। महिलाओं के भक्ति नृत्य और मंगल गीतों ने कथा स्थल को आध्यात्मिक आनंद से भर दिया।

  • संगीतमय श्रीराम कथा में राम-सीता विवाह सुन श्रद्धालु हुए भावविभोर, महिलाओं के नृत्य से माहौल हुआ भक्तिमय

भलुअनी, देवरिया। दुर्गा मंदिर परिसर में आयोजित नौ दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के छठवें दिन श्रद्धा, भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथावाचक संतदास जी महाराज ने जैसे ही भगवान श्रीराम और माता सीता के पावन विवाह प्रसंग का मधुर एवं भावपूर्ण वर्णन प्रारंभ किया, पूरा कथा पांडाल भक्तिरस में डूब गया। राम विवाह का अलौकिक दृश्य सुनते ही श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और “जय श्रीराम” तथा “सीता-राम की जय” के गगनभेदी जयकारों से वातावरण गूंज उठा।

कथा के दौरान जैसे-जैसे राम विवाह का प्रसंग आगे बढ़ा, महिलाओं, बच्चों और पुरुष श्रद्धालुओं की आंखें श्रद्धा और आनंद से भर उठीं। मंगल गीतों की धुन पर महिलाओं ने भक्ति नृत्य किया, वहीं श्रद्धालु झूमते-गाते प्रभु श्रीराम के विवाहोत्सव में स्वयं को सहभागी अनुभव करने लगे। पूरा पांडाल मानो मिथिला नगरी का रूप धारण कर चुका था, जहां हर ओर उल्लास, भक्ति और आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति हो रही थी।

राम विवाह प्रसंग सुन श्रद्धालु हुए भावविभोर, जयकारों से गूंजा पांडाल
राम विवाह प्रसंग सुन श्रद्धालु हुए भावविभोर, जयकारों से गूंजा पांडाल

कथावाचक संतदास जी महाराज ने श्रद्धालुओं को राम विवाह की पृष्ठभूमि बताते हुए कहा कि राजा जनक ने अपनी पुत्री माता सीता के स्वयंवर हेतु यह शर्त रखी थी कि जो भी भगवान शिव के पावन धनुष पिनाक को उठाकर उस पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा, वही सीता का वर बनेगा। अनेक बलशाली राजाओं के असफल प्रयासों के बाद जब भगवान श्रीराम ने सहजता से शिव धनुष को उठाया और प्रत्यंचा चढ़ाते ही वह टूट गया, तो समस्त सभा आश्चर्य और आनंद से भर उठी। इसी दिव्य क्षण के साथ माता सीता प्रभु श्रीराम की अर्धांगिनी बनीं।

संतदास जी महाराज ने भव्य बारात का भावपूर्ण वर्णन करते हुए बताया कि धनुष भंग के पश्चात अयोध्या से प्रभु श्रीराम की दिव्य बारात मिथिला पहुँची। चारों भाइयों—राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न-तथा अयोध्या के राजपरिवार का मिथिला में राजसी एवं हर्षोल्लास के साथ स्वागत किया गया। शुभ विवाह मुहूर्त, विवाह पंचमी के पावन अवसर पर श्रीराम-सीता का विवाह संपन्न हुआ, जिसमें मंगल गीतों, उत्सव और आनंद की छटा छा गई।

कथा के दौरान परशुराम प्रसंग का उल्लेख करते हुए कथावाचक ने बताया कि शिव धनुष टूटने पर क्रोधित हुए परशुराम को प्रभु श्रीराम ने अपने विनम्र आचरण और दिव्य स्वरूप से शांत किया। इस प्रसंग के माध्यम से संतदास जी महाराज ने यह संदेश दिया कि शक्ति के साथ-साथ विनय और मर्यादा ही सच्चे धर्म का आधार हैं।

कार्यक्रम में प्रमुख रूप से आचार्य प्रवीण पाण्डेय, ब्लॉक प्रमुख छट्ठू यादव, पूर्व उप ज्येष्ठ ब्लॉक प्रमुख विनोद सिंह गुड्डू, हिंदूवादी नेता प्रमोद मिश्र, पूर्व प्रधान दिनेश सिंह, व्यास वर्मा, आयोजक रामप्रवेश मद्धेशिया, दिनेश गुप्त, शौर्य कुमार सिंह, संतोष मद्धेशिया वैश्य, मनोज कुमार मद्धेशिया, लक्ष्मण वर्मा, विनोद मद्धेशिया, रामज्ञान गोड, रंजीत मद्धेशिया, सोनू सिंह, विजय वर्मा, कपूरचंद मद्धेशिया, बलराम वर्मा, सुशील सिंह, सुनील चौरसिया, गोलू सिंह सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।

राम विवाह के इस दिव्य प्रसंग ने श्रद्धालुओं के मन में भक्ति, मर्यादा और आदर्श जीवन मूल्यों की अमिट छाप छोड़ी। पूरा वातावरण भक्ति भाव से ओतप्रोत रहा और श्रद्धालु प्रभु श्रीराम के आदर्शों को जीवन में अपनाने का संकल्प लेकर कथा पांडाल से लौटे।

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