क्या 2029 से बदलेगी राजनीति की तस्वीर? महिला आरक्षण पर PM मोदी का बड़ा प्लान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण विधेयक (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को लेकर सभी राजनीतिक दलों से सर्वसम्मति बनाने की अपील की है। संसद के विशेष सत्र से पहले लिखे पत्र में उन्होंने इसे लोकतंत्र को सशक्त बनाने का ऐतिहासिक अवसर बताया। सरकार 2029 के चुनाव से 33% आरक्षण लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है, जबकि विपक्ष ने प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं और व्यापक चर्चा की मांग की है। यह मुद्दा अब राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है।
नयी दिल्ली : महिला आरक्षण विधेयक के समय को लेकर नाराज चल रहे विपक्ष के साथ आम सहमति बनाने की सरकार की कवायदों के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा और राज्यसभा में सभी राजनीतिक दलों के नेताओं को पत्र लिखकर विधेयक को सर्वसम्मति से पारित करने की अपील की है।श्री मोदी ने लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने से संबंधित इस विधेयक को पारित कराने के लिए गुरुवार से एक बार फिर शुरू होने वाली संसद की बैठक से पहले शनिवार को लिखे पत्र में इस विधेयक पर होने वाली चर्चा को ऐतिहासिक बताते हुए इसे लोकतंत्र को और सशक्त बनाने का अवसर करार दिया है और कहा है कि वह इस बारे में सबकी सामूहिक प्रतिबद्धता की भावना से यह पत्र लिख रहे हैं ।
उन्होंने कहा ,” 16 अप्रैल से संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम से संबंधित एक ऐतिहासिक चर्चा होने जा रही है। यह विशेष सत्र हमारे लोकतंत्र को और सशक्त बनाने का एक अवसर है। यह एक ऐसा क्षण भी है जब हम सब मिलकर आगे बढ़ने और सभी को साथ लेकर चलने की अपनी सामूहिक प्रतिबद्धता को दोहरा सकते हैं। मैं इसी भावना और उद्देश्य के साथ आपको यह पत्र लिख रहा हूँ।”प्रधानमंत्री ने सांसदों से इस विधेयक को एक स्वर से पारित करने के लिए दलगत राजनीति से उपर उठकर एकजुटता दिखाने का आह्वान किया है।
उन्होंने कहा ,” मैं यह पत्र इसलिए लिख रहा हूँ ताकि हम सभी एक स्वर में इस संशोधन को पारित करने के लिए एकजुट हों। यह अच्छा होगा कि अधिक से अधिक सांसद इस विषय पर संसद में अपने विचार व्यक्त करें। यह क्षण किसी एक दल या व्यक्ति से ऊपर है। यह महिलाओं और हमारी आने वाली पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारी दिखाने का समय है। चूँकि सभी राजनीतिक दल लंबे समय से राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की इच्छा व्यक्त करते रहे हैं, इसलिए अब उस आकांक्षा को वास्तविकता में बदलने का यह सही समय है। यह देश की नारी शक्ति और 140 करोड़ भारतीयों के लिए एक महान उपलब्धि होगी। मुझे पूरा विश्वास है कि हम सभी एक साथ आकर संसद में इस ऐतिहासिक कार्य को पूरा करेंगे।
“उन्होंने समाज की प्रगति के लिए महिलाओं की प्रगति और उन्हें निर्णय लेने में भागीदार बनाने पर बल देते हुए कहा है ,” कोई भी समाज तभी प्रगति करता है जब महिलाओं को प्रगति करने, निर्णय लेने और सबसे महत्वपूर्ण, नेतृत्व करने का अवसर मिलता है। भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के अपने दृष्टिकोण को साकार करने के लिए यह आवश्यक है कि महिलाएँ इस यात्रा में अधिक और सक्रिय भूमिका निभाएँ। आज हम सभी सार्वजनिक जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी देख रहे हैं। अंतरिक्ष से लेकर खेल तक, सशस्त्र बलों से लेकर स्टार्ट-अप तक, भारत की बेटियाँ हर क्षेत्र में अपना प्रभाव छोड़ रही हैं। अपने परिश्रम और संकल्प के बल पर वे अपनी क्षमताओं को सिद्ध कर रही हैं।”उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण का विषय दशकों से चर्चा में रहा है और अब इसे पूरा करने का समय आ गया है।
उन्होंने कहा ,” संसद और राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण का विषय दशकों से चर्चा में रहा है। वर्ष 2023 में विभिन्न दलों के सांसद नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में संसद में एकजुट हुए। वह एक यादगार क्षण था जिसने हमारी एकता को दर्शाया। पूरी दुनिया ने देखा कि देश की महिलाओं के प्रति एक प्रतिबद्धता को पूरा करने के लिए किस प्रकार एक महत्वपूर्ण निर्णय सामूहिक रूप से लिया गया। महिलाएँ हमारी जनसंख्या का लगभग आधा हिस्सा हैं और यह राजनीतिक क्षेत्र में उनकी भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक मजबूत कदम था। मैं उस दिन को भारत की संसदीय यात्रा का एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक मील का पत्थर मानता हूँ।
“श्री मोदी ने कहा कि कई सांसदों ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा में योगदान दिया। उन विचार-विमर्शों के दौरान इसके कार्यान्वयन के समय पर भी चर्चा हुई। इस बात पर व्यापक सहमति थी कि इस ऐतिहासिक कानून के प्रावधानों को यथाशीघ्र लागू किया जाना चाहिए। कई दलों के नेताओं की यही राय थी। हाल के समय में हमने इस विषय पर विशेषज्ञों के साथ परामर्श किया है। हमने संवैधानिक मामलों के जानकार व्यक्तियों से सुझाव और मार्गदर्शन प्राप्त किया है। हमने राजनीतिक दलों के साथ भी संवाद किया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि विस्तृत विचार-विमर्श के बाद हम इस निष्कर्ष पर पहुँचे हैं कि अब समय आ गया है कि पूरे देश में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को उसकी वास्तविक भावना के अनुरूप लागू किया जाए। यह आवश्यक है कि 2029 के लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव महिला आरक्षण के साथ आयोजित किए जाएँ। इससे भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं में नई ऊर्जा का संचार होगा और जनता का विश्वास मजबूत होगा। यह शासन में अधिक भागीदारी और प्रतिनिधित्व भी सुनिश्चित करेगा।विपक्ष ने आरोप लगाया है कि सरकार ने इस विधेयक के मामले में उसे विश्वास में नहीं लिया और इसके लिए पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव समाप्त होने का इंतजार भी नहीं किया।
विपक्ष का कहना है कि सरकार विधानसभा चुनावों के बाद एक बैठक बुलाकर पहले सर्वसम्मति बनानी चाहिए थी।सरकार ने परंपरा से हटकर इस बार बजट सत्र के दूसरे चरण के दो अप्रैल को संपन्न होने के बाद संसद की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित नहीं की थी। सरकार की ओर से कहा गया है कि 16, 17 और 18 अप्रैल को होने वाली विशेष बैठकों में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा के बाद इसमें संशोधन किया जायेगा जिससे कि लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया जा सके। (वार्ता)



