Breaking News

नवरात्र में जब योगी ने तोड़ी थी पीठ की परंपरा

लोक कल्याण के लिए गोरक्षपीठ ने कभी परंपरा की परवाह नहीं की

लखनऊ । देश की प्रमुख धार्मिक पीठों में शुमार गोरक्षपीठ (गोरखपुर) के पीठाधीश्वरों के लिए खुद के मोक्ष की बजाय लोक कल्याण एवं सामाजिक समरसता सर्वोपरि रही है। अपनी इन प्राथमिकताओं के लिए जरूरत पड़ी तो वर्षों की परंपराओं को भी तोड़ दिया।योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री के साथ गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर भी हैं। आठ साल पहले शारदीय नवरात्र में उन्होंने भी एक ट्रेन हादसे के बाद जनता के हित मे पीठ की परंपरा तोड़ दी थी। यह सिलसिला पीठ के संस्थापक गुरु गोरक्षनाथ के समय से ही जारी है।

लोक कल्याण के लिए देश-दुनिया के लिए उपयोगी योग का वर्तमान स्वरूप नाथपंथ के संस्थापक गुरुश्री गोरक्षनाथ की ही देन है। लोक कल्याण के लिए ही योगी आदित्यनाथ के पूज्य गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ ने भी अपने समय में व्यापक जनहित में स्थापित परंपराओं को बार-बार तोड़कर साबित किया कि पीठ के लिए लोकमंगल ही सर्वोपरि है। गोरक्ष पीठ की लंबे संबे समय से कवरेज करते आए वरिष्ठ पत्रकार गिरीश पाण्डेय कहते हैं कि दक्षिण भारत में मीनाक्षीपुरम की धर्मांतरण की घटना के बाद विरोध के बावजूद काशी में डोमराजा के घर उन्होंने संतों के साथ भोजन किया था। अयोध्या में जब उनकी मौजूदगी में प्रतीकात्मक रूप से भूमि पूजन हुआ तो उनकी पहल पर ही परंपरा को तोड़ने में पहली शिला रखने का अवसर कामेश्वर चौपाल को मिला।

वह कहते हैं कि एक दलित से ऐसा करवाकर उन्होंने पूरे समाज को एक बड़ा संदेश दिया। उनकी ही पहल पर पटना के एक मंदिर में दलित पुजारी की नियुक्ति के मूल में भी यही संदेश था। बतौर सांसद और पीठ के उत्तराधिकारी के रूप में योगी भी करीब एक दशक पहले गोरखपुर के बांसगांव तहसील स्थित नगवां गाँव में एक दलित द्वारा बनवाए गए मंदिर की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए थे। उसी क्रम को जारी रखते हुए उन्होंने पिछली मकर संक्रांति (खिचड़ी) के दौरान गोरखपुर में दलित समाज के अमृतलाल भारती के घर जाकर भोजन किया। इसके पहले 2 019 के आम चुनावों में अयोध्या में दलित महाबीर और अमरोहा में प्रियंका (प्रधान) के घर भोजन कर इस सिलसिले को जारी रखा।

यही नहीं एक बार तो योगी ने पीठ के उत्तराधिकारी के रूप में नवरात्र की वर्षों से स्थापित परंपरा को भी तोड़ दिया। उल्लेखनीय है कि गोरक्षपीठ, के लिए साल के दोनों (चैत्र एवं शारदीय) नवरात्र बेहद खास होते हैं। पहले दिन से ही वहां अनुष्ठान शुरू हो जाता है। सारी व्यवस्था मठ के पहली मंजिल पर ही होती है। परंपरा रही है कि पहले दिन कलश स्थापना के बाद नवरात्रि तक पीठ के पीठाधीश्वर और उनके उत्तराधिकारी मठ से नीचे नहीं उतरते। पूजा के बाद रूटीन के काम और खास मुलाकातें ऊपर ही होती रही हैं। सितंबर 2014 में वर्षों से स्थापित यह परंपरा भी टूट गई थी।

तब भी नवरात्रि का समय था। गोरखपुर कैंट स्टेशन के पास नन्दानगर रेलवे क्रासिंग पर लखनऊ-बरौनी और मंडुआडीह-लखनऊ एक्सप्रेस की टक्कर हुई थी। रात हो रही थी। गुलाबी ठंड भी पड़ने लगी थी। हादसे की जगह से रेलवे और बस स्टेशन करीब 5-6 किमी की दूरी पर हैं। दो ट्रेनों के हजारों यात्री। रात का समय साधन उतने थे नहीं। यात्रियों को मय सामान और परिवार के साथ स्टेशन तक पहुँचना मुश्किल था। खास कर जिनके साथ छोटे बच्चे और महिलाएं थी। चर्चा होने लगी कि छोटे महाराज (पूर्वांचल में लोग प्रेम से उस समय लोग योगी जी को इसी नाम से पुकारते थे) आ जाते तो इस समस्या का हल निकल आता। हादसे की सूचना थी ही। लोगों के जरिए समस्या से भी वाकिफ हुए। फिर क्या था? वर्षो की परंपरा टूटी। वह दुर्घटना स्थल पर आए। साथ मे उनके खुद के संसाधन और समर्थक भी। उनके आने पर प्रशासन भी सक्रिय हुआ। देर रात तक सबको सुरक्षित स्टेशन पहुंचा दिया गया।

मुख्यमंत्री बनने के बाद बार नोएडा जाकर भी दिया संदेश

मुख्यमंत्री बनने के बाद प्रदेश के मुखिया के रूप में भी वह स्थापित मिथ को तोड़ने के लिए नोएडा गये। मान्यता थी कि बतौर मुख्यमंत्री जो भी नोएडा गया वह फिर से उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री नहीं बना। योगी न केवल पांच साल तक मुख्यमंत्री रहे बल्कि छह महीने पहले सत्ता में लगातार दूसरी बार शानदार तरीके से वापसी का भी रिकॉर्ड भी रच दिया।

जिस अयोध्या का नेता नाम नहीं लेते थे वहां भी बार-बार गये

यही नहीं जिस अयोध्या के नाम से लोगों को करंट लगता था वहां बार-बार जाकर उन्होंने साबित किया कि पहले की तरह वह अयोध्या के हैं और अयोध्या उनकी। अब तो उनके ही कार्यकाल में उनके गुरु के सपनों के अनुसार अयोध्या में जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर का निर्माण हो रहा है बल्कि विभिन्न परियोजनाओं के जरिएअयोध्या का कायाकल्प हो रहा है। आने वाले कुछ वर्षों में अयोध्या का शुमार धार्मिक लिहाज से दुनियां के सबसे खूबसूरत पर्यटन स्थलों में होगा।

 

BABA GANINATH BHAKT MANDAL  BABA GANINATH BHAKT MANDAL

Related Articles

Back to top button