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विन्ध्य कारीडोर से होगा विन्ध्याचल क्षेत्र का चतुर्मुखी विकास- डॉ नीलकंठ तिवारी

विन्ध्य क्षेत्र के तालाबों व कुण्ड के बहुरेेंगें दिन पर्यटन मंत्री ने भ्रमण कर किया निरीक्षण

टूरिस्ट फैसिलिटी सेन्टर (टी0एफ0सी) बनाने के लिये मांगा प्रस्ताव

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मिर्जापुर , जनवरी । उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं धर्मार्थ कार्य राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ नीलकंठ तिवारी एवं उर्जा राज्य मंत्री रमाशंकर सिंह पटेल शुक्रवार को विन्ध्य कारीडोर के विकास लेकर विधायक रत्नाकर मिश्र, मा0 सदस्य विधान परिषद आशीष सिंह, जिलाधिकारी सुशील कुमार पटेल, नगर मजिस्ट्रेट सुशील लाल श्रीवास्तव के साथ अष्टभुजा निरीक्षण गृह में बैठक कर प्रगति के बारे में समीक्षा की। इस अवसर पर विन्ध्य क्षेत्र के तालाबों व कुण्डों के सौन्दर्यीकरण के बारे में पर्यटन मंत्री निर्देशित किया गया कि विन्ध्य क्षेत्र में तालाबों व कुण्डों के विकास के लिय प्रस्ताव जिलाधिकारी बनवाकर दें। ताकि उसके सौन्दर्यीकरण के लिये भी धनराशि शासन से मुहैया कराया जा सके। इस अवसर पर जिलाधिकारी सुशील कुमार पटेल ने मंत्री को बताया कि प्रथम चरण में परिक्रमा पथ, पुरानी बीआईपी मार्ग, न्यू वीआईपी मार्ग मंदिर से पक्का घाट मार्ग, एवं थाना विन्ध्याचल मार्ग का चौड़ीकरण का कार्य लिया जायेगा। तदुपरान्त मीरजापुर नगर से विन्ध्याचल आने वाले सडकों का चौड़ीकरण /सुन्दरीकरण व अन्य कार्य कराया जायेगा। जिलाधिकारी ने बताया कि परिक्रमा पथ में लगभग 92 मकान/दुकान, न्यू वी0आई0पी0 मार्ग पर लगभग 37, पुरानी वीआईपी मार्ग पर लगभग 97, मंदिर से पक्काघाट मार्ग गंगाा नदी तक लगभग 50 मकान/दुकान न प्रभावित होगें, जिन्हें नियमानुसार उचित मुवावजा दिया जायेगा। उन्होंने बताया कि स्थानीय लोगों व प्रभावित लोगों से समन्वय स्थापित कर वार्ता की गयी हैं आगे भी लोगों के सहमति से ही कार्य कराया जायेगा। पर्यटन मंत्री ने जिलाधिकारी से कहा कि 15 दिन के अन्दर प्रस्ताव बनाकर उपलब्ध करायें ताकि धनराशि का आवंटन किया जा सके। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ धार्मिक/पर्यटन स्थलों के विकास के लिय हर सम्भव प्रयास किया जा रहा हैं, जिसमें विन्ध्याचल भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के तर्ज पर ही विन्ध्याचल का विकास किया जायेगा। इससे पर्यटकों की संख्या बढेगी और क्षेत्र के लोगों का विभिन्न तरीके से विकास होगा। उन्होंने कहा कि देश के करोड़ों श्रद्धालुओं के के आस्था का केन्द्र का केन्द्र हैं विन्ध्यधाम। मंत्री ने कहा कि मंदिर को आस-पास खाली जमीन को देखे कर पस्ताव दें ताकि उसे क्रम कर काम्पलेक्स बनाकर उसमें लोगों को दुकान आवंटित किया जा सके। उन्होंने कहा कि कहा कि दूर-दराज से आने वाले यात्रियों के रूकने के लिये टूरिस्ट फैसिलिटी सेन्टर (टी0एफ0सी0) के लिये भी जमीन की तलाश करें। ताकि कम से कम तीन मंजिला यात्री निवास, जिसमें लगभग तीन हजार यात्री एक साथ रूक सके, के रूप के अनुसार बनाकर उसमें सभी सुविधायें मुहैया कराकर यात्रियों के रूकने की व्यव्स्था की जा सके। मंत्री ने पार्किग के लिये उपयुक्त जमीन तलाशने का निर्देश दिया। उन्होंने यह भी कहा कि विन्ध्य क्षेत्र में ऐतिहासिक व सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण व विकास के लिये जितने भी पुराने तालाब व कुण्ड व छोट-छोटे ऐतिहासिक जिसका पौराणिक महत्व हो उसकी भी सूची बनाकर तैंयार कर प्रस्तावित बनवाकर तत्काल भेजे, ताकि उसके लिये धनावंटन कर सोन्द्रर्यीकरण किया जा सके। बैठक के बाद मंत्री अष्टभुजा पहाड़ी पर स्थित गेरूआ तालाब, मोतिया तालाब, भैरो कुण्ड, सीताकुण्ड,रोपवे, रैन बसेरा, कजरहवा तालाब अष्टभुजा मोड, कालीखोह, अष्टभुजा मंदिर, आदि का भ्रमण कर निरीक्षण भी किया। उन्होंने कहा कि जिस तालाब व कुण्ड, मंदिर के सौन्दर्यीकरण के लिये सूची बनायी जाये उसके बारे में पौराणिक महत्व भी लिखा जायें। उन्होंने कहा कि नवरात्र व सामान्य दिनों में काफी संख्याा में श्रद्धालु आते हेैं, धार्मिक स्थलों के विकास के क्रम से बाहर रखाने के कारण तीर्थ स्थल प्रभावित हुयें हैं उन्होंने अयोंध्या, चित्रकूट, प्रयागराज, मथुरा सहित अनेक तीर्थ स्थलों के विकास के लिये वर्तमान सरकार द्वारा समेकित विकास के लिये योजना बनायी हैं। विन्ध्यधाम में भी पर्यटन स्थलों का विकास, पार्किग, गेस्टहाउस आदि बनाकर विकास किया जायेगा। उन्होंने कहा कि मंदिर जिस व्यवस्था से चल रहे हैं, उसी के अनुसार चलाया जायेगा। किसी भी प्रकार से प्रकाशकीय हस्तक्षेत्र नहीं किया जायेगा। विन्ध्य परिपथ बनाने का उद्देश्य हैं कि पर्यटकों व श्रद्धालुओं को अधिक से अधिक सुविधा मुहैया कराना। इसके बाद मंत्री द्वारा जान्हवी होटल का भी निरीक्षण किया। वहां चल रहे होटल के सुन्दरीकरण व मरम्मत के कार्य में तेजी लाने का निर्देश दिया गया। इस अवसर पर पर्यटक सूचना अधिकारी नवीन कुमार के अलावा सभी सम्बंधित अधिकारी उपस्थित रहें।

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