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दुनिया ने देखा यूपी का दम: 6,500 करोड़ के एमओयू, 5.99 लाख लोगों की मौजूदगी

उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (UPITS) 2026 का चौथा संस्करण ग्रेटर नोएडा में रिकॉर्ड कारोबारी उपलब्धियों के साथ संपन्न हुआ। पांच दिवसीय आयोजन में करीब ₹6,500 करोड़ मूल्य के 4,400 एमओयू पर हस्ताक्षर हुए, जबकि ₹15,500 करोड़ के संभावित कारोबार का अनुमान सामने आया। FIEO के आंकड़ों के अनुसार 41,500 B2B बैठकें हुईं और 5,98,693 विजिटर्स एवं बिजनेस बायर्स पहुंचे। छह पार्टनर देशों की भागीदारी से उत्तर प्रदेश के उद्योग, एमएसएमई और निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ने का अवसर मिला। One District One Cuisine के जरिए 75 जिलों की पाक विरासत को वैश्विक मंच मिला। सिंगारी इंडस्ट्रीज ने 15 देशों के साथ ₹201 करोड़ से अधिक के एमओयू किए, जबकि अमरोहा के शहद और मिलेट्स कुकीज को विदेशी खरीदारों से ऑर्डर मिले।

ग्रेटर नोएडा : उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस)-2026 का चौथा संस्करण मंगलवार को ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में कारोबार, निवेश, निर्यात, कौशल, तकनीक, संस्कृति और पर्यटन से जुड़े विभिन्न आयामों के साथ संपन्न हुआ। 25 से 29 सितंबर तक चले इस पांच दिवसीय आयोजन में उत्तर प्रदेश के एमएसएमई, निर्यातकों, कारीगरों, उद्यमियों, किसानों, कौशल प्रशिक्षुओं और स्थानीय उत्पाद निर्माताओं को देश-विदेश के खरीदारों और कारोबारी प्रतिनिधियों के सामने अपने उत्पाद और सेवाएं प्रस्तुत करने का अवसर मिला।

आयोजन के दौरान लगभग ₹6,500 करोड़ मूल्य के 4,400 एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए, जबकि कारोबारी पूछताछ के आधार पर लगभग ₹15,500 करोड़ के संभावित कारोबार का अनुमान सामने आया। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशंस (एफआईईओ) के आंकड़ों के अनुसार पांच दिनों में 41,500 बी2बी बैठकें हुईं और कुल 5,98,693 विजिटर्स एवं बिजनेस बायर्स पहुंचे। इनमें 1,74,990 घरेलू बिजनेस बायर्स और 4,23,703 सामान्य विजिटर्स शामिल रहे।

बी2बी बैठकों और कारोबारी गतिविधियों में बढ़ोतरी

यूपीआईटीएस-2026 में वर्ष 2025 के 31,650 बी2बी बैठकों के मुकाबले इस बार 41,500 बैठकें दर्ज की गईं। यह लगभग 31.12 प्रतिशत की वृद्धि है। रिवर्स बायर-सेलर मीट यानी आरबीएसएम क्षेत्र में विदेशी खरीदारों के साथ बैठकें 6,050 से बढ़कर 13,500 हो गईं, जबकि मुख्य प्रदर्शनी क्षेत्र में लगभग 28,000 कारोबारी संवाद हुए।

हस्ताक्षरित एमओयू की संख्या भी 3,900 से बढ़कर 4,400 हो गई। एमओयू का अनुमानित मूल्य ₹2,680 करोड़ से बढ़कर लगभग ₹6,500 करोड़ बताया गया। कारोबारी पूछताछ के आधार पर संभावित कारोबार भी ₹12,500 करोड़ से बढ़कर ₹15,500 करोड़ तक पहुंचा।

आयोजन में इस बार अंतरराष्ट्रीय भागीदारी का दायरा भी विस्तृत रहा। रूस, ऑस्ट्रिया, जापान, सिंगापुर, बेलारूस और वियतनाम छह पार्टनर देशों के रूप में शामिल हुए। विदेशी प्रतिनिधिमंडलों ने मैन्युफैक्चरिंग, आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल और एग्री-फूड प्रोसेसिंग सहित कई क्षेत्रों में रुचि दिखाई।

75 जिलों की पाक विरासत से लेकर स्थानीय उत्पादों तक को मंच

यूपीआईटीएस में ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन कुज़ीन’ यानी ओडीओसी के माध्यम से प्रदेश के सभी 75 जिलों की पाक परंपराओं और स्थानीय स्वाद को एक मंच पर प्रस्तुत किया गया। पांचों दिनों ओडीओसी हॉल में आगंतुकों और खरीदारों की आवाजाही बनी रही। क्षेत्रीय व्यंजन, पारंपरिक रेसिपी, लाइव डेमॉस्ट्रेशन और प्रसिद्ध शेफ की मास्टर क्लासेज आकर्षण का केंद्र रहीं।

सेलिब्रिटी शेफ हरपाल सिंह सोखी सहित अन्य शेफ की प्रस्तुतियों ने खाद्य संस्कृति को कारोबारी संभावनाओं से जोड़ने का प्रयास किया। ओडीओसी के माध्यम से यह भी सामने आया कि स्थानीय पाक विरासत फूड प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, हॉस्पिटैलिटी, पर्यटन, ब्रांडिंग और रिटेल जैसे क्षेत्रों में रोजगार एवं उद्यमिता के अवसरों का आधार बन सकती है।

ट्रेड शो में प्रदेश के 75 जिलों के पारंपरिक शिल्प, हथकरघा, पीतल उत्पाद, कालीन, चमड़ा उद्योग और विशिष्ट कृषि उत्पादों को भी प्रदर्शित किया गया। एमएसएमई, स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को देश-विदेश के खरीदारों के साथ सीधे संवाद का अवसर मिला। लगभग 20 नॉलेज सेशंस में उद्योग, नीति, बाजार और कारोबारी संभावनाओं पर चर्चा हुई।

कारोबार के साथ संस्कृति और युवाओं की भागीदारी

यूपीआईटीएस-2026 केवल व्यापारिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहा। शाम के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में लोक संगीत, कथक, मथुरा के लोकनृत्य, ढेठिया, राई और थारू जनजातीय नृत्य, पखावज एवं सितार वादन, सुगम संगीत, आल्हा गायन, भजन और सूफी संगीत सहित विभिन्न प्रस्तुतियां हुईं।

समापन दिवस पर ओम प्रकाश दुबे के भजन, गोरखपुर के राकेश उपाध्याय के लोकगीत तथा गाजियाबाद की मिताली सैनी की कथक प्रस्तुति हुई। इसके बाद श्रीराम सांखला द्वारा कोरियोग्राफ किए गए ‘कलर्स ऑफ इंडिया’ कार्यक्रम के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का समापन हुआ।

युवाओं ने क्विज, मॉडल यूनाइटेड नेशंस, माइम, कला एवं संस्कृति गतिविधियों, साइबर सुरक्षा, सड़क सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रमों और बैटल ऑफ बैंड्स में भाग लिया। दिल्ली-एनसीआर के स्कूलों की भागीदारी के कारण छात्रों को उद्योग, नवाचार, रचनात्मकता और कारोबारी परिवेश को समझने का अवसर मिला।

यूपी पुलिस के स्टॉल को लगातार तीसरी बार बेस्ट डिस्प्ले अवार्ड

ट्रेड शो के हॉल नंबर-4 में लगाए गए उत्तर प्रदेश पुलिस के स्टॉल को लगातार तीसरे वर्ष ‘बेस्ट डिस्प्ले अवार्ड’ मिला। पुरस्कार सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा ने प्रदान किया। इसे पुलिस अधीक्षक साइबर क्राइम, मुख्यालय उत्तर प्रदेश राजेश कुमार यादव तथा प्रभारी मीडिया सेल, यूपी 112 करुणा शंकर सिंह ने ग्रहण किया।

स्टॉल पर साइबर अपराध से बचाव, यूपी 112 की सेवाओं, आधुनिक पुलिसिंग, जनसुरक्षा में तकनीक के इस्तेमाल और पुलिस की सेवाओं की जानकारी प्रदर्शित की गई। 2024 और 2025 में भी यूपी पुलिस के स्टॉल को बेस्ट डिस्प्ले अवार्ड मिल चुका है। स्टॉल पर युवाओं और बच्चों ने पुलिस तकनीक एवं सेवाओं को करीब से जाना।

सिंगारी इंडस्ट्रीज के 15 देशों के साथ ₹201 करोड़ से अधिक के एमओयू

नोएडा स्थित सिंगारी इंडस्ट्रीज ने पहली बार यूपीआईटीएस में भाग लेते हुए पांच दिनों में 15 देशों के प्रतिनिधियों के साथ ₹201 करोड़ से अधिक मूल्य के एमओयू किए। कंपनी ने 50 से अधिक बी2बी बैठकें कीं। हॉल नंबर-14 के स्टॉल 01/61 पर एयर कूलर और वॉशिंग मशीन प्रदर्शित की गईं। कंपनी का विनिर्माण संयंत्र नोएडा के सेक्टर-80 में है।

मुख्य कार्यकारी अधिकारी देवेंद्र सिंह के अनुसार नाइजीरिया, इथियोपिया, बोत्सवाना, श्रीलंका, दुबई, केन्या, तंजानिया, ओमान, ब्रिटेन, भूटान, कैमरून और युगांडा सहित विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के साथ उत्पादों की गुणवत्ता, डिजाइन, कीमत, उत्पादन क्षमता और आपूर्ति व्यवस्था पर बातचीत हुई।

प्रबंध निदेशक डॉ. योगेंद्र सिंह ने कहा कि नोएडा में निर्मित उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के सामने सीधे प्रस्तुत करने से कंपनी को बाजार की आवश्यकताओं को समझने और उसी के अनुरूप उत्पाद तथा आपूर्ति रणनीति विकसित करने का अवसर मिला। कंपनी के निदेशक गजेंद्र सिंह और निदेशक-वित्त नीरज गर्ग भी मौजूद रहे।

अमरोहा के शहद और मिलेट्स कुकीज को विदेशी बाजार से मिले ऑर्डर

अमरोहा के प्रखंड बायो एनर्जी किसान प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड यानी ‘किसान वेदा’ के प्राकृतिक शहद और मिलेट्स कुकीज ने भी ट्रेड शो में खरीदारों का ध्यान आकर्षित किया। ओमान, जापान और नीदरलैंड के प्रतिनिधियों ने शहद के आयात के लिए एमओयू किए। नीदरलैंड के खरीदारों ने टन के हिसाब से बल्क सप्लाई की मांग रखी और शुरुआती तौर पर 1,000 से 1,500 बोतलों के पहले बैच पर सहमति बनी।

इटली के खरीदारों ने ज्वार और रागी से बनी कुकीज के लिए अनुबंध किया। इसके लिए ₹1,600 से ₹2,000 प्रति किलो तक की दर पर समझौते की जानकारी दी गई। एफपीओ के उत्पाद एपीडा और पीजीएस द्वारा प्रमाणित बताए गए हैं।

स्थानीय स्तर पर भी बागपत के एफपीओ और ‘डॉक्टर मोरिंगा’ सहित करीब 10 से 15 घरेलू कंपनियों ने उत्पादों की आपूर्ति को लेकर बातचीत की। नोएडा और दिल्ली-एनसीआर से आए उपभोक्ताओं ने भी खरीदारी की।

कमल ककड़ी का अचार, करौंदे, आंवला और लहसुन के अचार, मोरिंगा पाउडर, नीम शहद, मिलेट्स नमकीन, मल्टीग्रेन आटा और लेमनग्रास से बनी चाय, तेल, हैंड सैनिटाइजर तथा फिनाइल जैसे उत्पाद भी प्रदर्शित किए गए।

एफपीओ की संस्थापक हितेश चौधरी के अनुसार उनके उत्पादों के पीछे करीब 3,000 किसानों और 1,000 ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी है। 120 हेक्टेयर में ताइवान पिंक अमरूद की खेती के साथ गन्ने, अमरूद, मोरिंगा, गेहूं और मिलेट्स की मल्टी क्रॉपिंग कराई जा रही है। एफपीओ किसानों से बाजार भाव से अधिक दर पर कुछ उत्पाद खरीदने का मॉडल भी अपनाता है।

हितेश चौधरी ने वर्ष 2020 में महिला स्वयं सहायता समूह के माध्यम से काम शुरू किया और 17 अप्रैल 2021 को एफपीओ स्थापित किया। शुरुआती दौर में तैयार उत्पादों को बाजार न मिलने पर पशुओं को खिलाने की स्थिति भी आई, लेकिन अब एफपीओ का वार्षिक टर्नओवर करीब ₹50 लाख बताया गया है और इस वित्तीय वर्ष में ₹1 करोड़ का लक्ष्य रखा गया है।

कृषि विभाग, नमामि गंगे और परंपरागत कृषि विकास योजना के माध्यम से प्रशिक्षण एवं सहयोग मिलने के बाद अब मोरिंगा लड्डू, मोरिंगा बर्फी तथा हल्दी के विशेष अचार जैसे उत्पाद तैयार करने की योजना है। हितेश चौधरी ने ट्रेड शो को एफपीओ के लिए महत्वपूर्ण मोड़ बताते हुए सरकारी सहयोग को इसका आधार बताया।

सूचना विभाग के पवेलियन में करियर और संस्कृति से जुड़े युवा

सूचना एवं जनसंपर्क विभाग का पवेलियन युवाओं के लिए पुस्तकों, प्रतियोगी परीक्षाओं की सामग्री और उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को समझने का केंद्र बना। भारतीय इतिहास, संस्कृति, राजनीतिक विज्ञान, उभरते भारत, उभरते उत्तर प्रदेश और प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित पुस्तकों में युवाओं ने रुचि दिखाई।

‘उत्तर प्रदेश वार्षिकी’, ‘बनारस तेरे रंग हजार’, ‘योगी का राम राज्य’, ‘लोक आराधना की अभिव्यक्ति’, ‘तीर्थनामा अयोध्या’, ‘न्यू यूपी फॉर ए न्यू इंडिया’ और ‘विकसित यूपी विकसित भारत’ जैसी पुस्तकों ने युवाओं का ध्यान आकर्षित किया। सिकंदराबाद की पीसीएस अभ्यर्थी निधि यादव विशेष रूप से उत्तर प्रदेश वार्षिकी देखने के लिए पवेलियन पहुंचीं।

राम मंदिर अयोध्या, वाराणसी के नमो घाट, वृंदावन के प्रेम मंदिर और सारनाथ को पृष्ठभूमि में रखकर बनाए गए सेल्फी जोन भी युवाओं के आकर्षण का केंद्र रहे। इलेक्ट्रॉनिक ग्लोब के साथ भी युवाओं और बच्चों ने सेल्फी ली। कई युवाओं को अपनी बारी के लिए लगभग आधे घंटे तक इंतजार करना पड़ा।

पर्यटन पवेलियन में साढ़े पांच लाख आगंतुक, 10 हजार यात्रा गाइड की मांग

यूपीआईटीएस-2026 में उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग का पवेलियन भी प्रमुख आकर्षण रहा। करीब साढ़े पांच लाख आगंतुकों ने पवेलियन का भ्रमण किया। लगभग 10 हजार मुद्रित यात्रा मार्गदर्शिकाओं और यात्रा कार्यक्रमों की मांग रही। निवेश एवं सहयोग से जुड़े 100 से अधिक प्रस्तावों में रुचि दिखाई गई और करीब 20 टूर ऑपरेटरों के साथ चर्चा हुई।

अयोध्या, प्रयागराज और वाराणसी के साथ नीब करौरी बाबा यात्रा मार्ग, कन्नौज की इत्र विरासत, वन्यजीव एवं ईको-टूरिज्म को भी प्रदर्शित किया गया। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार आयोजन में मिले रिस्पॉन्स से पर्यटकों की रुचि प्रमुख गंतव्यों के साथ नए पर्यटन अनुभवों और अन्य जिलों को जानने में भी दिखाई दी।

पवेलियन में क्यूआर कोड आधारित डिजिटल सामग्री को करीब 500 लोगों ने एक्सेस किया। हॉस्पिटैलिटी, गंतव्य विकास, पर्यटक सुविधाओं और अनुभव आधारित पर्यटन से जुड़े निवेश अवसरों पर भी चर्चा हुई। प्राप्त पूछताछ एवं प्रस्तावों को आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित टीमों को भेजे जाने की जानकारी दी गई।

अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने पवेलियन को आगंतुक सहभागिता केंद्र और पर्यटन व्यापार मंच दोनों के रूप में प्रस्तुत किया। आभासी वास्तविकता के माध्यम से ब्रज लीला का अनुभव, इंटरैक्टिव गेम, क्विज, सिनेमाई फोटो बूथ और थीम आधारित सेल्फी जोन ने बच्चों, युवाओं, परिवारों और वरिष्ठ नागरिकों को आकर्षित किया।

लाइव जरदोजी, कन्नौज के इत्र, मार्बल डस्ट उत्पाद, मथुरा का मयूर नृत्य और लखनऊ की कथक प्रस्तुतियां भी पवेलियन का हिस्सा रहीं। बैकलिट डिस्प्ले, डिजिटल इंस्टॉलेशन और थीम आधारित सज्जा के माध्यम से धार्मिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, ग्रामीण और प्रकृति आधारित पर्यटन को एक साथ प्रस्तुत किया गया। उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम के प्रबंध निदेशक आशीष कुमार ने भी पवेलियन का भ्रमण किया।

इंडिया एक्सपो मार्ट बना व्यापारिक इन्फ्रास्ट्रक्चर का प्रमुख केंद्र

यूपीआईटीएस के आयोजन के साथ इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट की भूमिका भी प्रमुखता से सामने आई। वर्ष 2003 में इसकी आधारशिला रखी गई और 2006 में परिसर का उद्घाटन हुआ। शुरुआत में भारतीय निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तक पहुंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विकसित यह परिसर समय के साथ स्थायी शो-रूम, प्रदर्शनी हॉल, बिजनेस मीटिंग स्पेस, हॉस्पिटैलिटी और अन्य सुविधाओं वाला ट्रेड प्लेटफॉर्म बन गया।

31 जुलाई 2026 तक यहां 1,800 शो-रूम और 774 निर्यातकों की मौजूदगी बताई गई। मार्ट सोर्सिंग डेज जैसे आयोजनों के माध्यम से खरीदारों और विक्रेताओं के बीच संपर्क को सालभर जारी रखने की व्यवस्था भी विकसित की गई है।

31 मार्च 2024 तक 14 प्रदर्शनी हॉल संचालित थे, जो 31 मार्च 2026 तक बढ़कर 16 हो गए। ऑपरेशनल हॉल क्षेत्रफल 64,888 वर्गमीटर से बढ़कर 76,484 वर्गमीटर हो गया। यहां हस्तशिल्प, होम डेकोर, रिन्यूएबल एनर्जी, बैटरी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरिंग, फूड, हॉस्पिटैलिटी, पैकेजिंग और औद्योगिक तकनीक सहित विभिन्न क्षेत्रों के आयोजन होते हैं।

बड़े आयोजनों से होटल, परिवहन, कैटरिंग, स्टॉल निर्माण, सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स और तकनीकी सेवाओं जैसे स्थानीय क्षेत्रों में भी गतिविधियां बढ़ती हैं। 31 जुलाई 2026 तक मार्ट में 391 कर्मचारियों की संख्या दर्ज की गई। एक्सपो डिजिटल इंडे और एक्सपोबाजार जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से भौतिक प्रदर्शनियों से आगे ऑनलाइन व्यापार और सप्लाई चेन से जुड़ने का प्रयास भी किया जा रहा है।

जेवर एयरपोर्ट, एक्सप्रेसवे नेटवर्क, दिल्ली-एनसीआर की निकटता और औद्योगिक इन्फ्रास्ट्रक्चर के कारण ग्रेटर नोएडा को वैश्विक व्यापारिक गतिविधियों के लिए विकसित होते केंद्र के रूप में प्रस्तुत किया गया। हॉल संख्या 4 और 6 के नवीनीकरण तथा हॉल संख्या 18 के विकास सहित भविष्य की विस्तार योजनाओं की जानकारी भी दी गई।

‘यूपी डिड इट’ के संदेश के साथ सामने आई कारोबारी यात्रा

समापन कार्यक्रम में प्रमुख सचिव, एमएसएमई एवं निर्यात प्रोत्साहन शशि भूषण लाल सुशील ने यूपीआईटीएस की शुरुआत वर्ष 2023 से लेकर 2026 तक की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि आयोजन ने आर्थिक प्रगति, तकनीकी विकास, सांस्कृतिक विरासत, निवेश, बुनियादी ढांचे और औद्योगिक विकास के विभिन्न पहलुओं को एक मंच पर सामने रखा।

उन्होंने कहा कि कारीगरों को केवल बिक्री का अवसर नहीं मिला, बल्कि खरीदारों से ग्राहक प्रतिक्रिया और बाजार की जानकारी भी मिली। उनके अनुसार इससे डिजाइन, उत्पाद विकास और निर्यात की संभावनाओं को समझने में मदद मिल सकती है। तकनीकी सत्रों में युवाओं और उद्यमियों को स्वरोजगार, मशीनों के उपयोग, कारोबार संचालन तथा नए बाजारों में निर्यात से जुड़ी जानकारी दी गई।

उन्होंने ओडीओसी के माध्यम से सामने आई पारंपरिक पाक विरासत का उल्लेख किया और एआई के व्यावहारिक इस्तेमाल की जानकारी भी दी। उनके अनुसार सीएम युवा योजना के तहत मुजफ्फरनगर और बदायूं के तीन युवा उद्यमियों को एआई आधारित बिक्री सेवा से जोड़कर इसका परीक्षण शुरू किया गया है, जिससे बिक्री और कारोबार पर इसके प्रभाव को समझने का प्रयास किया जाएगा।

कमिश्नर उद्योग के. विजयेंद्र पांडियन ने कहा कि यूपीआईटीएस के चार संस्करणों ने प्रदेश की औद्योगिक, कारोबारी और निर्यात क्षमता को प्रस्तुत करने के साथ उद्यमियों और कारीगरों को नए बाजारों से जोड़ने का काम किया। उनके अनुसार ग्राहकों की पसंद, बाजार की मांग तथा डिजाइन और पैकेजिंग से जुड़ी जानकारी भी प्रतिभागियों को मिली।

आईईएमएल के चेयरमैन राकेश कुमार ने आयोजन की तैयारियों में मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठकों और विभिन्न जनप्रतिनिधियों एवं मंत्रियों के सहयोग का उल्लेख किया। उन्होंने वस्त्र एवं हस्तशिल्प क्षेत्र, ओडीओपी और ‘फार्म टू फाइबर, फाइबर टू फैक्ट्री, फैक्ट्री टू फैशन और फैशन टू फॉरेन’ की मूल्य श्रृंखला का भी उल्लेख किया।

एक बीएचके फ्लैट से 80 हजार वर्गफुट की डिफेंस फैक्ट्री तक पहुंची तन्मय तिवारी की यात्रा

यूपीआईटीएस में उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से जुड़ी युवा उद्यमिता की कहानी भी सामने आई। डेटम एडवांस्ड कंपोजिट्स के सह-संस्थापक एवं उप प्रबंध निदेशक तन्मय तिवारी ने यूपीडा के विशेष सत्र में अपनी कारोबारी यात्रा साझा की।

ब्रिटेन में करीब पांच वर्ष तक एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद तन्मय वर्ष 2021 में भारत लौटे और उन्होंने एक बीएचके फ्लैट से कंपनी की शुरुआत की। शुरुआत में कंपनी कृषि ड्रोन, ऑटोमोबाइल और सुपरबाइक्स के लिए कार्बन फाइबर तथा ग्लास फाइबर के कंपोजिट पुर्जे बनाती थी।

आईआईटी कानपुर में कंपोजिट नमूनों की टेस्टिंग के बाद कंपनी के उत्पादों की रक्षा क्षेत्र में उपयोग की क्षमता सामने आई। इसके बाद कंपनी ने रक्षा क्षेत्र के लिए उत्पादन शुरू किया। एक छोटे शेड से शुरू हुई कंपनी अब कानपुर में करीब 20 हजार वर्गफुट की फैक्ट्री में संचालित हो रही है और लगभग 40 लोगों की टीम कार्यरत है। कंपनी एएस 9100 प्रमाणित बताई गई है और इसका प्रमाणन ब्यूरो वेरिटास द्वारा किया गया है।

अब कंपनी लखनऊ नोड में उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के तहत 70 से 80 हजार वर्गफुट क्षेत्र में नई इंजीनियरिंग एवं विनिर्माण इकाई स्थापित करने की योजना पर काम कर रही है। इससे करीब 200 लोगों को प्रत्यक्ष और लगभग 1,500 लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की उम्मीद बताई गई है।

तन्मय तिवारी के अनुसार नई इकाई में पूंजी निवेश पर 25 प्रतिशत तक पूंजीगत सब्सिडी, आयातित उपकरणों पर परिवहन संबंधी सब्सिडी तथा पेटेंट और ट्रेडमार्क के लिए प्रतिपूर्ति जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।

गन्ने की चार नई उन्नत किस्मों का प्रदर्शन

चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग के स्टॉल पर उत्तर प्रदेश गन्ना अनुसंधान परिषद द्वारा विकसित चार उन्नत गन्ना किस्मों-को.शा. 19231, को.शा. 18231, को.शा. 13235 और को.शा. 17231—का प्रदर्शन किया गया।

इन किस्मों की उपज क्षमता लगभग 90 से 100 टन प्रति हेक्टेयर बताई गई। इनमें लाल सड़न यानी रेड रॉट के प्रति रोगरोधी या प्रतिरोधी प्रवृत्ति, बेहतर अंकुरण और शुरुआती बढ़वार तथा मिल में पेराई योग्य गन्नों की अधिक संख्या जैसी विशेषताएं बताई गई हैं। अच्छी पेड़ी क्षमता के कारण अगली फसल की लागत कम करने और उत्पादन बनाए रखने में भी मदद मिलने की संभावना जताई गई।

वन विभाग के स्टॉल पर युवाओं ने जाना यूपी की वन संपदा

ट्रेड शो के पांचों दिन वन विभाग का आउटलेट युवाओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा। यहां हाथी, हिरण और सांपों की विभिन्न प्रजातियों के साथ सागौन, शीशम, बबूल, खैर और अर्जुन जैसे पेड़ों के बारे में जानकारी दी गई।

मेरठ की छात्रा सुनैना ने बताया कि उसे पहली बार प्रदेश की वन संपदा और सोनभद्र, ललितपुर, लखीमपुर तथा बहराइच में संचालित 22 वन धन केंद्रों के बारे में जानकारी मिली। नोएडा की ओजस्वी ने कहा कि दूसरे आउटलेट जहां कारोबार और उत्पादों की जानकारी दे रहे थे, वहीं वन विभाग का आउटलेट प्रकृति से जोड़ने वाला अनुभव रहा।

मेरठ के छात्र रवि कुमार ने आसपास दिखाई देने वाले बबूल, सागौन, खैर और अर्जुन जैसे पेड़ों के महत्व तथा संरक्षण की जानकारी मिलने की बात कही।

प्रदर्शन में मेरठ, लखनऊ और प्रयागराज क्षेत्र की वन संपदा को अलग-अलग तरीके से प्रस्तुत किया गया। युवाओं को जंगलों में आग लगने के कारण, मानवीय लापरवाही से होने वाले नुकसान, वन महोत्सव और पौधरोपण की जानकारी भी दी गई। गंगा एक्सप्रेसवे के दोनों ओर पौधरोपण एवं हरित पट्टी विकसित करने की योजना से भी अवगत कराया गया।

व्यापार मेले ने सामने रखी उत्तर प्रदेश की बहुआयामी तस्वीर

यूपीआईटीएस-2026 की पूरी गतिविधियों को देखें तो पांच दिवसीय आयोजन में व्यापार और निवेश के साथ कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, कौशल विकास, पर्यटन, संस्कृति, वन एवं पर्यावरण, रक्षा विनिर्माण, तकनीक और स्थानीय उद्यमिता के विभिन्न पक्ष एक साथ दिखाई दिए।

एक ओर ₹6,500 करोड़ के एमओयू, ₹15,500 करोड़ के संभावित कारोबार और 41,500 बी2बी बैठकों जैसे आंकड़े कारोबारी गतिविधियों का चित्र प्रस्तुत करते हैं, तो दूसरी ओर अमरोहा के एफपीओ, सिंगारी इंडस्ट्रीज, तन्मय तिवारी की डिफेंस कंपनी, गन्ने की नई किस्मों, पर्यटन पवेलियन, सूचना विभाग और वन विभाग के स्टॉल जैसी कहानियां इस आयोजन के अलग-अलग सामाजिक और आर्थिक पक्ष सामने लाती हैं।

स्थानीय स्तर के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तक पहुंचाने, युवाओं को रोजगार एवं उद्यमिता से जोड़ने, किसानों को नए उत्पादों और तकनीकों से परिचित कराने, पर्यटन स्थलों को नए अनुभवों के रूप में प्रस्तुत करने तथा उत्तर प्रदेश की कला, संस्कृति और पाक परंपराओं को व्यापारिक संभावनाओं से जोड़ने की कोशिशें भी आयोजन का हिस्सा रहीं।

इस तरह यूपीआईटीएस-2026 का समापन केवल एक व्यापार मेले के समाप्त होने के रूप में नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों—उद्योग, एमएसएमई, कृषि, कौशल, पर्यटन, हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण, रक्षा विनिर्माण, संस्कृति और पर्यावरण—को एक साझा मंच पर प्रस्तुत करने वाली पांच दिवसीय गतिविधियों के समापन के रूप में हुआ।

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