
नवदुर्गा में अष्टम स्थान है शिवप्रिया माँ महागौरी का
दुद्धी-सोनभद्र– शनिवार को नवरात्रि की अष्टमी तिथि में पूरे विधि विधान के साथ माँ महागौरी पूजन अर्चन की गई। नगर के मां काली मंदिर, प्राचीन हनुमान जी मंदिर सहित सभी धार्मिक स्थलों पर मां महागौरी की पूजा अर्चना लोकमंगल की कामना के साथ संपन्न हुई। श्रद्धालुओं ने बड़ी ही श्रद्धा भाव से मां महागौरी की पूजा अर्चना की। इस दौरान पंडालों में स्थापित भगवान श्रीराम व मां की मूर्तियों की एक झलक देखने के लिए श्रद्धालु लालायित रहे उन्होंने मां के समक्ष मत्था टेक कर अपने अभिजीत मनोकामना पूर्ति के लिए प्रार्थना किया।
नवरात्रि के आठवें दिन दुर्गाष्टमी को माता महागौरी की पूजन का विधान है। माता के उदभव की बड़ी ही मनोरम कथा है। राजा हिमवान के घर बेटी के रूप में जन्मी छोटी कन्या पार्वती ने बालपन से ही भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कई वर्षों तक कठोर तप किया था। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए देवी ने कठोर तपस्या की थी जिससे इनका शरीर काला पड़ गया। देवी की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने इन्हें स्वीकार किया और इनके शरीर को गंगा-जल से धोते गए जिससे देवी पुनः विद्युत के समान अत्यंत कांतिमान गौर वर्ण की हो गई जिसकी वजह से इनका नाम गौरी पड़। माता महागौरी अंत्यंत सौम्य है।
मां दुर्गा की आठवीं शक्ति का नाम महागौरी है। मां गौरी का ये रूप बेहद सरस, सुलभ और मोहक है। महागौरी की चार भुजाएं हैं। इनका वाहन वृषभ है। इनके ऊपर के दाहिने हाथ में अभय मुद्रा और नीचे वाले दाहिने हाथ में त्रिशूल है। ऊपरवाले बाएं हाथ में डमरू और नीचे के बाएं हाथ में वर-मुद्रा हैं। इनकी मुद्रा अत्यंत शांत है, इनकी उपासना से भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।ऐसी मान्यता है कि शिवप्रिया माँ गौरी जिस भक्त की उपासना पर प्रसन्न होती हैं उन्हें भगवान शिव का भी आशीर्वाद प्रदान होता है। दुद्धी स्थित माँ काली जी मन्दिर शक्ति पीठ पर माँ महागौरी का पूजन अर्चन बड़ी ही श्रद्धा भाव से किया गया। शनिवार को अष्टमी होने के कारण मन्दिर में भारी भीड़ उमड़ी रही



