State

ऑस्ट्रेलियाई ईसाई मिशनरी हत्याकांड: सजा माफी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का ओडिशा को नोटिस

नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने ऑस्ट्रेलियाइई ईसाई मिशनरी ग्राहम स्टुअर्ट स्टेन्स और उनके दो नाबालिग बेटों की साल 1999 में हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे बजरंग दल के कार्यकर्ता रहे रवींद्र कुमार पाल उर्फ दारा सिंह की सजा माफी याचिका पर मंगलवार को ओडिशा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया।न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय और न्यायमूर्ति एस वी एन भट्टी की पीठ ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन की दलीलें सुनने के बाद ओडिशा सरकार को नोटिस जारी करते हुए कहा कि वह इस मामले में छह सप्ताह में अगली सुनवाई करेगी।

दारा सिंह ने 24 साल जेल की सजा काटने को आधार बताते हुए अपनी सजा माफी की गुहार लगाई है। उन्होंने तर्क दिया कि उन्हें अपने अपराधों का पश्चाताप है, क्योंकि उस समय वे ‘मुगलों और अंग्रेजों द्वारा भारत पर किए गए बर्बर कृत्यों से व्यथित थे।’उत्तर प्रदेश के निवासी दारा सिंह को कुष्ठ रोग पीड़ितों के लिए काम करने वाले 58 वर्षीय ऑस्ट्रेलियाई ईसाई मिशनरी स्टेन्स और उनके दो बेटों – फिलिप (10 वर्ष) और टिमोथी (6 वर्ष) को जिंदा जला कर हत्या करने का दोषी ठहराया गया था। यह घटना 21 और 22 जनवरी 1999 की रात मनोहरपुर-बारीपदा के एक जंगल में हुई थी। स्टेन्स अपनी जीप में सो रहे थे, तभी उन पर हमला किया गया था।

मूल रूप से उत्तर प्रदेश के औरैया जिले के रहने वाले ​​दारा सिंह ने अपनी याचिका में तर्क दिया है कि राज्य (ओडिशा) के संबंधित अधिकारियों ने उनकी सजा में छूट और समय से पहले रिहाई के लिए भेजे गए कई आवेदनों पर गौर करने में विफल रहे, जिससे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्राप्त उनके अधिकार को खतरा पैदा हो गया।क्योंझर जिला जेल में बंद याचिकाकर्ता ने दलील दी कि उसकी उम्र 60 साल से अधिक है। वह 19 अप्रैल 2022 की सजा छूट नीति में निर्धारित योग्य अवधि यानी 14 साल की सजा पहले ही काट चुका है।याचिकाकर्ता ने यह भी दलील दी कि उसे कभी पैरोल पर रिहा नहीं किया गया। उसकी मां का निधन हुआ, तब भी वह उसका अंतिम संस्कार नहीं कर सका। (वार्ता)

पीलीभीत में बाढ़ में फंसे 7 लोगों को किया गया एयरलिफ्ट, मवेशियों को भी बचाया गया

Related Articles

Back to top button