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SIR पर विपक्ष के सवालों से गरमाया यूपी, मंत्रियों ने कहा- आरोपों के साथ सबूत भी दें

उत्तर प्रदेश में SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। प्रदेश सरकार के मंत्री असीम अरुण, संजय निषाद और ओम प्रकाश राजभर ने विपक्ष के आरोपों पर पलटवार किया। असीम अरुण ने कहा कि चुनाव आयोग में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग मत होना सामान्य लोकतांत्रिक प्रक्रिया है और अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए। संजय निषाद ने बिना साक्ष्य संवैधानिक संस्था पर आरोप लगाने से बचने की बात कही। वहीं ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव के कार्यकाल पर निशाना साधा। खेल मंत्री गिरीश यादव ने खेल सुविधाओं, सरकारी नौकरियों और खेल नीति को लेकर सरकार की उपलब्धियां गिनाईं।

लखनऊ : उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री असीम अरुण ने SIR को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों के जवाब में कहा कि चुनाव आयोग की प्रक्रिया को गलत तरीके से प्रस्तुत कर भ्रम की स्थिति पैदा करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि आयोग में अलग-अलग मत होने से जुड़ी एक खबर को आधार बनाकर विवाद खड़ा किया गया, जबकि मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों ने संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में स्थिति स्पष्ट कर दी है। इसके बावजूद विपक्षी दल जबरदस्ती झूठ परोस रहे हैं।

सभी निर्णय सर्वसम्मति से हुए

असीम अरुण ने कहा कि किसी भी सरकारी प्रक्रिया में फाइल पर अलग-अलग तरह के मत और पक्ष-विपक्ष में विचार आना सामान्य बात है। वह स्वयं मंत्री हैं और इससे पहले पुलिस अधिकारी रह चुके हैं, इसलिए प्रशासनिक प्रक्रिया से परिचित हैं। उनके मुताबिक विचार-विमर्श के बाद अंतिम निर्णय लिया जाता है। इसी तरह चुनाव आयोग के भीतर भी अलग-अलग विषयों पर विचार-विमर्श होना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों ने स्पष्ट किया है कि उनके बीच अलग-अलग मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ, लेकिन अंत में लिए गए सभी निर्णय सर्वसम्मति से हुए। ऐसे में अब विवाद की कोई स्थिति नहीं है। असीम अरुण ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव के पास योगी सरकार के कामकाज के खिलाफ ठोस मुद्दे नहीं हैं, इसलिए एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया को मुद्दा बनाने की कोशिश की जा रही है।

आलोचना तथ्यों और तर्क पर आधारित होनी चाहिए

विपक्ष द्वारा संवैधानिक संस्थाओं की आलोचना को लेकर मंत्री असीम अरुण ने कहा कि आलोचना तथ्यों और तर्क पर आधारित होनी चाहिए। खोखली आलोचना से न केवल नागरिकों का समय बर्बाद होता है, बल्कि यह संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश भी है। मंत्री ने कहा कि यदि किसी को चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर आपत्ति है तो विशेषज्ञों की मदद से उसका तथ्यात्मक परीक्षण कर आलोचना की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव आगामी 2027 चुनाव भी हारने वाले है इसीलिए अनाप-शनाप आरोप लगातार लगा रहे हैं।

विपक्ष के नेता भी आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल तो आरोप कैसे लगाया : संजय निषाद

SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) को लेकर सपा, कांग्रेस, राजद समेत विपक्षी दलों की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर निषाद पार्टी के राष्ट्रिय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने करारा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग भारत देश की संवैधानिक संस्था है और बिना किसी साक्ष्य के उसके खिलाफ आरोप लगाकर जनता के बीच भ्रम पैदा करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि चुनाव जीतने पर यही लोग आयोग की पीठ थपथपाते हैं, लेकिन जनता जब इन्हें नकार देती है और हार का ठीकरा उसी संवैधानिक संस्था पर फोड़ देते हैं।

अखिलेश यादव के 2022 के चुनाव परिणाम और चुनाव प्रक्रिया पर उनके सवालों से जुड़े प्रश्न पर निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद ने कहा कि चुनाव हारने के बाद भी यदि कोई संवैधानिक प्रक्रिया पर सवाल उठाता है तो उसे अपने आरोपों के प्रमाण देने चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी पर आरोप लगाना आसान है, लेकिन उसे साबित करना भी जरूरी होता है। उनके मुताबिक बिना प्रमाण के संवैधानिक संस्था पर आरोप लगाने और भ्रम फैलाने के लिए संबंधित लोगों को देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए।

संजय निषाद ने कहा कि SIR कोई नई प्रक्रिया नहीं है और देश में यह दर्जनों बार हो चुकी है। उन्होंने दावा किया कि पहले चुनाव आयोग की नियुक्ति और चुनाव संबंधी प्रक्रियाओं को लेकर अलग-अलग व्यवस्थाएं रही हैं, जबकि वर्तमान व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुरूप चल रही है।

मंत्री ने कहा कि इस व्यवस्था में विपक्ष के नेता की भी भूमिका है। ऐसे में यदि विपक्ष के नेता चुनाव आयोग की नियुक्ति की प्रक्रिया में शामिल रहे हैं तो अब उसी व्यवस्था पर सवाल उठाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि SIR को लेकर विपक्षी दलों को जनता के बीच भ्रम फैलाने के बजाय प्रक्रिया के संवैधानिक पक्ष को समझना चाहिए। संजय निषाद के मुताबिक न्यायालय संबंधित प्रक्रिया का परीक्षण कर चुका है और हाईकोर्ट ने भी इसे संवैधानिक प्रक्रिया माना है। ऐसे में न्यायिक परीक्षण के बाद भी बिना ठोस साक्ष्य आरोप लगाना उचित नहीं है।

संजय निषाद ने कहा कि जीत और हार के आधार पर संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अलग-अलग रवैया नहीं होना चाहिए। उन्होंने विपक्षी दलों से SIR को लेकर लगाए जा रहे आरोपों के प्रमाण सार्वजनिक करने और जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा करने से बचने की अपील की। साथ ही उन्होंने बिना साक्ष्य आरोप लगाने वालों से देश की जनता से माफी मांगने की बात कही।

“सपा राज में पूरे प्रदेश की तिजोरी लूटकर सिर्फ सैफई को चमकाया, जनता को दिए सिर्फ डर और दंगे”: ओम प्रकाश राजभर

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ‘सैफई मॉडल’ के विकास के उदाहरण पर उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि जब अखिलेश की सरकार थी तब 24 घंटे बिजली केवल सैफई में मिलती थी। सैफई महोत्सव होता था और सैफई महोत्सव में मुंबई से हीरो-हीरोइन आकर डांस करते थे। आसपास के गांवों में दुष्टता का आतंक हो जाता था और लोग भय ग्रस्त होकर घरों में कैद रहते थे।

अखिलेश राज में सिर्फ सैफई का हुआ विकास

राजभर ने कहा कि अखिलेश ने केवल सैफई का ही विकास किया। उन्होंने ज्यादा से ज्यादा पैसे ले जा कर वहां लगा दिया। सैफई में मेडिकल कॉलेज बनवाने से लेकर वहां की सड़कें तक चौड़ी करवा दी। दूसरी जगहों की उपेक्षा हुई।

SIR पर अखिलेश के आरोप गलत

राजभर ने कहा कि अखिलेश SIR पर जो आरोप लगा रहे हैं, वो सरासर गलत हैं। मैं जिस विधान सभा से विधायक हूं वहां 16 हजार वोटर मृतक थे, उनको निकाला गया। इसके अलावा 23 हजार स्थानांतरित मतदाता थे, जिन्हें चुनाव आयोग ने एक जगह करने के लिए स्वीकृत किया। SIR कोई नया नहीं है. यह 1952 से लेकर 2003 के बीच में कई बार हुआ है।

अखिलेश की सरकार में गुंडागर्दी चरम पर थी

राजभर ने कहा कि अखिलेश के राज में गुंडागर्दी, लूट, हत्या, बलात्कार और छिनैती चरम पर थे। मुजफ्फरनगर जब दंगों में जल रहा था तो यह मुख्यमंत्री होते हुए डांस देख रहे थे। सरकारी नौकरियां पैसे पर देते थे। राजभर ने कहा अखिलेश को कोई वोट नहीं देगा। अखिलेश वोट पाने के लिए आरोप लगा रहे हैं। उन्हें तो अपनी गलतियों के लिए जनता से माफी मांगनी चाहिए।

अखिलेश के आरोप निराधार, साढ़े नौ साल में खेल कोटे से 1000 से अधिक नौकरियां: खेल मंत्री गिरीश यादव

उत्तर प्रदेश में खेल एवं युवा कल्याण मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गिरीश चंद्र यादव ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के आरोपों पर पलटवार किया है। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया था कि उनके शासनकाल में खेल बेहतर व्यवस्था में थे और मौजूदा सरकार में खेल पिछड़ गए हैं और खिलाड़ियों को प्रोत्साहन नहीं मिल रहा। इस पर गिरीश यादव ने कहा कि अखिलेश यादव का आरोप बिल्कुल निराधार है। उन्हें जानकारी होनी चाहिए कि पिछली सरकार में ओलंपिक, पैरालंपिक, एशियाई खेल, कॉमनवेल्थ गेम्स और विश्व चैंपियनशिप के लिए जो पुरस्कार राशि दी जाती थी, मौजूदा सरकार ने उसे दो गुना से ढाई गुना बढ़ा दिया। सीनियर और जूनियर खिलाड़ियों के साथ कोचों को भी सम्मानित किया जाता है और उन्हें भी पुरस्कार राशि दी जाती है।

पदक पर सरकारी नौकरी की गारंटी पहली बार

मंत्री ने कहा कि पहली बार उत्तर प्रदेश सरकार ने गारंटी दी है कि एशियाई खेल, कॉमनवेल्थ, विश्व चैंपियनशिप जैसे चार वर्ष के अंतराल वाले आयोजनों के साथ ओलंपिक और पैरालंपिक में पदक जीतकर आने वाले खिलाड़ी को सरकारी नौकरी दी जाएगी। अब तक लगभग 16-17 लोगों को नौकरी दी जा चुकी है और 5-6 और लोगों को नौकरी दी जा रही है।

उन्होंने अखिलेश यादव से सवाल किया कि उनके शासन में पदक जीतकर आए खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी दी गई हो तो उसकी सूची जारी करें। खेल कोटे के तहत उनकी पांच वर्ष की सरकार में कितनी नौकरियां दी गईं, यह भी बताएं।

खेल कोटे से 1000 से अधिक नौकरियां, सात को सीधे डीएसपी

गिरीश यादव ने कहा कि साढ़े नौ वर्षों में सरकार ने खेल कोटे के अंतर्गत एक हजार से अधिक सरकारी नौकरियां दी हैं। खेल कोटे से सात खिलाड़ियों को लोक सेवा आयोग की परीक्षा से बाहर निकालकर सीधी भर्ती से डिप्टी एसपी बनाया गया। इनमें ललित उपाध्याय, अर्जुन देशवाल, अखिल श्योराण, दीप्ति शर्मा और पारुल चौधरी शामिल हैं। इन्हें पदक जीतकर आने के कारण सीधा डीएसपी बनाया गया।

इसी क्रम में जिला युवा कल्याण अधिकारी, माल कर अधिकारी, यात्रीकर अधिकारी और जिला पंचायत राज अधिकारी के पदों पर भी नियुक्तियां की गई हैं। मंत्री ने अखिलेश यादव से पूछा कि उनकी पांच वर्ष की सरकार में किसी ऐसे खिलाड़ी को डीएसपी बनाया गया या नहीं।

इकाना पीपीपी पर, हम कई अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम बना रहे हैं

इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर मंत्री ने कहा कि अखिलेश यादव इकाना स्टेडियम की बात करते हैं, जो पीपीपी मॉडल पर बना। मौजूदा सरकार ने वाराणसी के सिगरा में अत्याधुनिक स्टेडियम बनाकर समर्पित कर दिया है। वाराणसी में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम बनकर तैयार हो गया है। गोरखपुर स्टेडियम का शिलान्यास मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कर दिया है, लागत 400 करोड़ रुपये है। कानपुर स्टेडियम को सुविधाएं बढ़ाने के लिए इस बजट में 350 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

हर कमिश्नरी में स्पोर्ट्स कॉलेज, ब्लॉक पर मिनी स्टेडियम

हर कमिश्नरी स्तर पर स्पोर्ट्स कॉलेज बनाए जा रहे हैं। 18 कमिश्नरियों में से आगरा, बरेली, झांसी और अयोध्या में जमीन मिल गई है। इसी वित्तीय वर्ष में चार कमिश्नरी स्तर के स्पोर्ट्स कॉलेज बनाने की योजना लाई गई है। मंत्री ने कहा कि अखिलेश यादव पहले यह सोचें कि उन्होंने कितने बनाए, उन्होंने क्या किया।

विकास खंड स्तर पर ग्रामीण खेल मिनी स्टेडियम के प्रस्ताव आ रहे हैं और सरकार वहां पैसा दे रही है। जिला स्तर की सुविधाएं सुदृढ़ की जा रही हैं। जहां एस्ट्रोटर्फ चाहिए वहां एस्ट्रोटर्फ, सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक चाहिए तो ट्रैक, तरणताल चाहिए तो तरणताल और बास्केटबॉल कोर्ट चाहिए तो कोर्ट दिए जा रहे हैं। तहसील स्तर पर भी काम शुरू किया गया है।

संभल में पहली बार जिला स्टेडियम, हापुड़-शामली-चंदौली में भी निर्माण

मंत्री ने कहा कि चार ऐसे स्थान अखिलेश यादव के घर के पास हैं। संभल में जिला स्तर का स्टेडियम नहीं था। सरकार 18 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से वहां स्टेडियम बना रही है। हापुड़, शामली और चंदौली में भी स्टेडियम बनाए जा रहे हैं।

खेल नीति-2023 और एकलव्य क्रीड़ा कोष

गिरीश यादव ने बताया कि पहली बार नई खेल नीति-2023 बनाई गई। एकलव्य क्रीड़ा कोष के माध्यम से कमजोर और असहाय खिलाड़ियों को बेहतर कोचिंग तथा पौष्टिक आहार के लिए धन दिया जा रहा है। 400 से अधिक खिलाड़ियों को व्यक्तिगत रूप से कोचिंग और पौष्टिक आहार के लिए सरकार ने धन उपलब्ध कराया है।

पंचायत से संसद तक प्रतिभा तलाश

प्रतिभा खोज के लिए संसद खेलकूद प्रतियोगिता, विधायक खेलकूद प्रतियोगिता के साथ जिला, विकासखंड और ग्राम पंचायत स्तर पर आयोजन कर खिलाड़ियों को तलाशा जा रहा है। मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री जब खिलाड़ियों की बात करते हैं तो खिलाड़ियों का चेहरा खिल उठता है। खिलाड़ी खुद कहते हैं कि इंफ्रास्ट्रक्चर मिल रहा है, खेलने के अधिक अवसर मिल रहे हैं, इसलिए खेल की दिशा में लोग आगे बढ़ रहे हैं।

चार बार सत्ता में रही पार्टी लेखा-जोखा पेश करे

मंत्री ने कहा कि अखिलेश यादव की पार्टी चार बार सत्ता में रही। वे लेखा-जोखा प्रस्तुत करें कि खिलाड़ियों के लिए क्या किया। केवल एक इकाना स्टेडियम बना, वह भी पीपीपी मॉडल पर। मौजूदा सरकार ग्रामीण स्तर से लेकर विकासखंड, जिला और तहसील तक स्टेडियम बना रही है और सुविधाओं का ध्यान रख रही है।

उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव तथ्यहीन और निरर्थक बातें करते हैं तथा युवाओं को गुमराह करने की कोशिश करते हैं। उनके पास ठोस सबूत नहीं होते। युवा और खिलाड़ी उनके बहकावे में नहीं आने वाले। साढ़े नौ वर्षों में खेल के क्षेत्र में ऐतिहासिक काम हुआ है। इसकी किसी भी प्रकार से तुलना नहीं की जा सकती। उत्तर प्रदेश का युवा, खिलाड़ी और खेल जगत से जुड़े लोग जानते हैं कि सरकार कैसे काम कर रही है।

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