
अल्पसंख्यक अधिकार दिवस के अवसर मदरसों में आयोजित की गई गोष्ठियां
दुद्धी, सोनभद्र– अल्पसंख्यकों के शैक्षिक आर्थिक और सामाजिक उत्थान हेतु अल्पसंख्यक अधिकार दिवस के अवसर पर जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के दिशा निर्देशन में शनिवार को दारुल उलूम कादरिया नूरिया अरबी महाविद्यालय व मदरसा जामिया रिज्विया में गोष्ठी का आयोजन किया गया।
कादरिया नूरिया संस्थान के प्राचार्य मुफ्ती महमूद आलम बरकाती ने गोष्ठी में उपस्थितजनों को संबोधित करते हुए प्राचार्य ने कहा कि देश में 18 दिसंबर को ‘माइनॉरिटी राइट्स डेट’ यानी अल्पसंख्यक अधिकार दिवस मनाया जाता है। भारत के संविधान के मुताबिक देश के हर नागरिक को समान अधिकार मिलने चाहिए। उप संस्थापक हाफिज मसऊद रज़ा ने बताया कि साल 1978 में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक प्रस्ताव जारी किया। इसमें अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के लिए एक आयोग बनाने की बात कही गई। मदरसा जामिया रिज्विया के प्रधानाचार्य मौलाना सलीमुद्दीन ने उपस्थित छात्र-छात्राओं को बताया कि इस दिवस को मनाने का प्रमुख उद्देश्य है लोगों को शिक्षित करना और भारत में सभी अल्पसंख्यकों के हर अधिकार पर ध्यान केंद्रित करना है।
मौलाना मंसूर ने कहा कि यह दिवस प्रति वर्ष 18 दिसंबर 1992 से सयुंक्त राष्ट्र संघ द्वारा अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों की रक्षा, राष्ट्र निर्माण में योगदान के रूप में चिह्न्ति कर अल्पसंख्यकों के क्षेत्र विशेष में ही उनकी भाषा, जाति, धर्म, संस्कृति, परंपरा आदि की सुरक्षा को सुनिश्चित करने हेतु मनाया जाता है। इस अवसर पर कादरिया नूरिया बघाडू में महमूद आलम मिसबाही, मौलाना नजीरुल कादरी, मोहम्मद जफरुद्दीन, मोहम्मद मंसूर आलम, हाफिज सईद अनवर मास्टर कौनेन अली, हाफिज तौहीद, मोहम्मद कलामुद्दीन, मौलाना अमीनुल कादरी, मोहम्मद सलाहुद्दीन मुराद अहमद, बहाउद्दीन तथा जामिया रिज्विया दीघुल में मौलाना रियाज, मौलाना जियाउल मोबिन, मौलवी बदरे आलम, मास्टर हाफिजुद्दीन सहित अभिभावक व अन्य लोग मौजूद रहे।



