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गैंगस्टर की बुलेट खरीदने में फंसे पीआरओ ,लाइन हाजिर ,जांच शुरू

कानपुर । पुलिस आयुक्त विजय सिंह मीना ने बुधवार को अपने जनसम्पर्क अधिकारी (पीआरओ) उपनिरीक्षक अजय मिश्रा को हटा दिया है। आरोप है कि बेटे के नाम पर गैंगस्टर की बुलेट खरीदकर उपनिरीक्षक चला रहा था। उसके अपराधियों के साथ भी अच्छे सम्पर्क हैं। मामला संज्ञान में आने के बाद यह कार्रवाई हुई और प्रकरण की जांच सयुंक्त पुलिस आयुक्त आनंद प्रकाश तिवारी को सौंपी है।

जानकारी अनुसार, छात्रा को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में चार अप्रैल 2018 में उपनिरीक्षक जेल भेजा जा चुका है। उस वक्त अजय बतौर विश्वविद्यालय चौकी इंचार्ज के रूप में तैनात थे। जेल में रहने के दौरान उसके संबंध कई अपराधियों और माफियाओं से हो गए थे। उसी दौरान उनकी दोस्ती चकेरी निवासी ड्रग्स तस्कर व गैंगस्टर बलराम राजपूत से हुई। रिहा होने के बाद अजय मिश्रा का गैंगस्टर अपराधी के घर आना जाना हो गया। दोस्ती इतना बढ़ गई कि गैंगस्टर अपराधी को जब पैसों की आवश्यकता हुई तो उसकी मदद करने के नाम पर उसकी बुलेट खरीदा और 90 हजार रुपये दिए।

सूत्रों की माने तो, सत्ता में ऊंची पहुंच होने की वजह से बहाल के बाद अजय मिश्रा कानपुर पुलिस कमिश्नर का पीआरओ बन गया। कुर्सी ऐसी मिली कि उसे किसी प्रकार का भय ही नहीं रहा। मीडिया में भी उसने अच्छी पकड़ बना ली है। वह गैंगस्टर अपराधी की बुलेट से चल रहा था। कानूनी शिकंजे से बचने के लिए उपनिरीक्षक ने जो बुलेट अपराधी से खरीदी थी वो भी उसके बेटे उत्कर्ष के नाम पर है। जो पहले अपराधी बलराम की पत्नी सोनी राजपूत के नाम पर थी।

सोनी के खिलाफ भी एनडीपीस समेत दो मुकदमें दर्ज हैं। उसके गैंगस्टर पति बलराम पर 16 आपराधिक मुकदमें दर्ज है, जिसमें मादक पदार्थ की तस्करी, हत्या के प्रयास, आर्म्स एक्ट, लूट, अपहरण, डकैती सहित आदि के मुकदमें शामिल हैं।(हि.स.)

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