
पीपीगंज :प्रेमी जोड़े ने कहा कि अलग नहीं रह सकते, थाने में हीं हो गई शादी
शिकायत लेकर पहुंचे दोनों परिवार; अलग नहीं हुए तो पुलिस ने कराई शादी
गोरखपुर : एक प्रेमी जोड़े ने पीपीगंज थाने में शादी की। दोनों का बीते दो साल से अफेयर चल रहा था। लेकिन परिवार के लोग राजी नहीं थे। मामला जब अधिक बिगड़ गया तो सोमवार को दोनों पक्ष थाने पहुंचा। पूरे दिन थाने पर चली पंचायत के बाद आखिरकार दोनों की जिद के आगे परिवार वालों को ही झुकना पड़ा। प्रेमी-प्रेमिका ने थाने में स्थित शिव मंदिर पर भगवान को साक्षी मानकर शादी कर ली। इस दौरान दोनों ने एक-दूसरे को जायमाल भी पहनाया और अंत में घर वाले भी दोनों को आशीर्वाद दिए। इस अनोखी शादी की साक्षी पीपीगंज पुलिस भी बनी। पुलिस वाले भी शादी में शामिल हुए और प्रेमी जोड़े को आशीर्वाद दिया। दोनों ने एक-दूसरे को जायमाल भी पहनाया और अंत में घर वाले भी दोनों को आशीर्वाद दिए।
पीपीगंज इलाके के राजाबारी जलवल के रहने वाले सुदर्शन प्रसाद की बेटी कविता का उसी इलाके के अंबेडकरनगर के रहने वाले राधेश्याम प्रसाद के बेटे सूरज से अफेयर चल रहा था। दोनों की आपस में दूर की रिश्तेदारी भी है। जिसकी वजह से दोनों के परिवार का घर से आना-जाना था। करीब एक साल पहले इसकी जानकारी लड़की के घर वालों को हो गई तो उन्होंने इसका विरोध किया। लेकिन कविता मानने को तैयार नहीं थी। वह परिवार से शादी की जिद पर अड़ी थी। अंत में तंग आकर पिता ने बेटी को मुंबई स्थित अपने एक रिश्तेदार के घर भेज दिया। ताकि दोनों में दूरी बन जाए। लेकिन वह कुछ ही दिनों में मुंबई से भी भाग आई और फिर शादी की जिद पर अड़ी रही।
दोनों के परिवार वालों का कहना था कि आपस में रिश्तेदारी होने की वजह से यह शादी नहीं हो सकती। लेकिन सूरज और कविता इसके खिलाफ थे। दोनों शादी की जिद पर अड़े थे। सोमवार को जब दोनों परिवारों के बीच मामला अधिक बिगड़ गया तो दोनों पक्ष अपनी-अपनी शिकायत लेकर थाने पहुंचा। पूरे दिन थाने पर पंचायत होती रही। लेकिन सूरज और कविता एक-दूसरे से अगल होने को राजी नहीं थे।दोनों का कहना था कि वे बालिग हैं और किसी भी हाल में दोनों अलग नहीं होंगे। इसके बाद पीपीगंज पुलिस ने दोनों परिवारों को समझाकर शादी के लिए तैयार कर लिया। देर शाम दोनों ने थाना परिसर में स्थित शिव मंदिर में शादी रचाई और फिर सूरज अपनी पत्नी कविता को लेकर घर गया। पुलिस और दोनों के परिवार के लोगों ने दोनों को आशीर्वाद भी दिया।



