
दुद्धी, सोनभद्र– नगर के शिवा जी प्राचीन तालाब पर चल रहे नौ दिवसीय श्रीराम कथा के तीसरे दिन की कथा में अड़भंगी बाबा भोलेनाथ की बारात का प्रसंग सुन श्रोतागण भाव-विभोर हो उठे। प्रयागराज से पधारे कथावाचक पंडित अक्षयानंद जी महाराज ने त्रिकालदर्शी भगवान शिव के बारात का सुंदर व्याख्यान किया। भूत-पिशाच व विषैले जीव जंतुओं से भरी बारात का वर्णन करते हुए महाराज ने कहा कि दूल्हा भगवान शिव की वेशभूषा देख सारे देवता हतप्रभ रह गये।

भूत-पिशाच सरीखे खतरनाक बारातियों को देख लोग घरों में दुबक गये। मां पार्वती के पिता महाराज हिमावन भी शिव जी की हुलिया देख दंग रह गये और अपनी बेटी का विवाह उनसे करने में आनाकानी करने लगे। जब उन्हें सप्त ऋषियों ने बताया कि शिव प्रिय माता सती ने ही आपकी पुत्री पार्वती के रूप में जन्म लिया है। आप तो पिता के रूप में माध्यम मात्र हैं, माता और भगवान शिव का यह विवाह विधि का विधान है।
यह सुन राजा हिमावन के आंखों से अश्रुधार फूट पड़े और उन्होंने हंसी खुसी भगवान शिव का विवाह अपनी पुत्री माता पार्वती संग किया। शिव विवाह का प्रसंग सम्पन्न होते ही सम्पूर्ण पंडाल हर हर महादेव के उदघोष से गूंज उठा।अंत मे आरती वंदन व प्रसाद वितरण के साथ कथा विश्राम किया गया।संगीतमयी कथा मंडली में महंथ पंडित कालिका उपाध्यक्ष, व्यास पंडित जयनंदन महाराज व अरविन्दाचार्य महाराज के संगीतमयी धुन ने श्रोताओं को भक्तिरस में झूमने को मजबूर कर दिया।



