Breaking News

शनिवार से नवरात्र आरम्भ, मन्दिरों में उमड़ेगा आस्था का सैलाब

भगवती माँ दुर्गा में समाहित हैं अलौकिक शक्तियां- आलोक अग्रहरि

दुद्धी-सोनभद्र– शनिवार से बासंतिक नवरात्रि आरंभ हो रहा है। इस दिवस से ही माँ भगवती के नौ स्वरूपों का पूजन नौ दिनों तक मन्दिरों में चलता है। आस्था के इस महापर्व के बाबत जानकारी देते हुए श्रीरामलीला कमेटी के महामंत्री व शिक्षक आलोक अग्रहरि ने कहा कि माँ भगवती दुर्गा ही प्रकृति की मूल हैं और उन्ही में समस्त शक्तियां समाहित हैं।

माँ का दर्शन तो हर समय लाभकारी है परंतु नवरात्र का विशेष महत्व है। यह नवरात्र माँ दुर्गा देवी को समर्पित होने के साथ साथ नारी शक्ति की महत्ता को भी मान्यता प्रदान करती है। आदि शक्ति माँ दुर्गा में समस्त नारीत्व का केन्द्र होने के कारण उनमें ममता, मातृत्व, दया,कोमलता, कृपालुता व सहनशीलता का गुण विद्यमान है। वही सर्वेश्वरी हैं इसलिए माता दैवीय गुणों की जहां पोषक हैं, वहीं आसुरी शक्तियों की संहारक भी हैं। कहतें हैं कि जब जब देवताओं पर संकट आया तब तब भगवती दुर्गा ने ही उनकी सहायता की। देवी दुर्गा ही देवताओं के शक्ति की केंद्र हैं। देवताओं सहित सभी में शक्ति,ऊर्जा के प्रवाह की मूल हैं। ममतामयी माँ से जिसने भी करुण पुकार की भगवती ने उसके सभी दुखड़े दूर कर दिये।

नवरात्र के प्रथम दिन माँ शैलपुत्री के दर्शन पूजन का विधान हैं। इस बाबत सभी मंदिरों पर खास कर देवी मंदिरों में तैयारी पूरी कर ली गयी हैं। भगवती पार्वती ही पर्वतों के राजा हिमाचल (हिमालय) की पुत्री के रूप प्राकट्य ली थी। शैलराज की पुत्री होने के कारण ही उन्हें शैलपुत्री कहा गया है। माँ शैलपुत्री ने कठोर तप करके भगवान शिव को प्रसन्न कर उनकी अर्धांगनी बनी। दुर्गा ही सृष्टि की समस्त शक्ति व ऊर्जा की मूल तत्व हैं। इनके बिना कुछ भी सम्भव नही। माँ दुर्गा ही पार्वती के रूप में विभिन्न स्वरूपों को धरण कर सभी के संकट दूर करती हैं।

वैसे तो माँ दुर्गा के सहस्त्र स्वरुप हैं लेकिन नवरात्रि में जिन नौ रूपों के पूजन अर्चन का विधान है,जिसमें उसका खास महत्व बताया गया है। नवरात्र का प्रथम दिवस माँ शैलपुत्री, द्वितीया ब्रह्मचारिणी,तृतीया चन्द्रघण्टा, चतुर्थी कूष्मांडा, पंचम स्कंदमाता, षष्ठी कात्यायिनी,सप्तम कालरात्रि,अष्टम महागौरी व नवम सिद्धिदात्री माँ के स्वरूप का दर्शन पूजन होगा। इन दिनों किसी भी देवी मंदिरों में तिथियोग अनुसार माँ के रूप का पूजन होता है। कहा जाता है कि नवरात्र में माँ के नवो द्वार खुले रहते हैं।इन दिनों शादी-विवाह से लेकर कोई भी शुभ कार्य बिना किसी रुकावट के साथ किये जा सकते हैं। दुद्धी के प्रमुख मन्दिरों में माँ काली मंदिर शक्तिपीठ, संकट मोचन प्रथम तल दुर्गा मंदिर,थाना कोतवाली दुर्गा मंदिर, पंचदेव मन्दिर,दुर्गा मंदिर शक्तिपीठ रामनगर पर दर्शन पूजन के लिए भक्तों का तांता लगा रहता है।

Related Articles

Back to top button