ब्रिक्स में व्यापार बाधाएं हटाने पर मोदी का जोर, पुतिन ने पश्चिमी देशों पर साधा निशाना
नई दिल्ली में ब्रिक्स बिजनेस फोरम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार की बड़ी बाधाओं को हटाने और स्टार्टअप सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने हर वर्ष 100 ब्रिक्स स्टार्टअप को दूसरे बाजारों में विस्तार और कारोबार जगत के बीच 1,000 नई साझेदारियां विकसित करने का लक्ष्य सुझाया। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पश्चिमी देशों पर व्यापार में अनुचित तरीके अपनाने और प्रतिबंध लगाने का आरोप लगाया। वहीं मोदी और पुतिन की द्विपक्षीय बैठक में भारत-रूस व्यापार, ऊर्जा, रक्षा, तकनीक और बुनियादी ढांचे समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।
नयी दिल्ली : वैश्विक व्यापार की राह में बढ़ रही बाधाओं का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को ब्रिक्स देशों से समूह के बीच व्यापार की राह में बड़ी बाधाओं को हटाने और आपस में स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को भी प्रोत्साहित करने की अपील की है।उन्होंने ब्रिक्स के उद्योग-व्यवसाय जगत से समूह के बीच ऐसी 10 शीर्ष बाधाओं को हटाने के बारे में रिपोर्ट तैयार करने और हर वर्ष 100 ब्रिक्स स्टार्टअप को दूसरे बाजारों में विस्तार करने में मदद करने का आह्वान किया। श्री मोदी भारत की अध्यक्षता में राजधानी में कल से शुरू हो रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले यहां भारत मंडपम में आयोजित ब्रिक्स बिजनस फोरम को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा, “आज जब ब्रिक्स अपने तीसरे दशक में प्रवेश कर रहा है, ब्रिक्स बिजनस कौंसिल से मेरा आग्रह रहेगा, क्या आप ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार की शीर्ष 10 बाधाओं को हटाने के लिए रिपोर्ट बना सकते हैं?”श्री मोदी ने इसी तरह प्रश्न किया, ” क्या हम हर वर्ष सौ ब्रिक्स स्टार्टअप इकाइयों को दूसरे ब्रिक्स बाजारों में स्केल (विस्तार) करने के लिए मदद कर सकते हैं? क्या हम अपने कारोबार जगत के बीच हज़ार नई साझेदारियां विकसित कर सकते है? इन तीनों मापदंडों पर हमें हर वर्ष अपनी प्रगति की समीक्षा करनी है।” रूस के राष्ट्रपति ब्लादीमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान भी सम्मेलन में उपस्थित थे।
उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देश मिल कर काम करेंगे तो दुनिया भर के लिए समस्याओं और जरूरतों का समाधान प्रस्तुत करने की क्षमता रखते हैं। इससे पहले श्री मोदी और श्री पुतिन ने भारत- रूस व्यापार प्रदर्शनी इनोप्रोम का भी दौरा किया। श्री मोदी ने ब्रिक्स बिजनस फोरम को संबोधित करते हुए वैश्विक व्यापार के विस्तार के लिए समुद्री नौवहन मार्गों की आज़ादी और नाविकों की सुरक्षा को जरूरी बताया और कहा कि भारत इन बातों का दृढ समर्थक है।उन्होंने कहा कि दुनिया में जब व्यापार की राहों में बाधाएं बढ़ रही हैं, भारत व्यापार समझौतों के माध्यम से आर्थिक सम्पर्क सेतुओं का निर्माण कर रहा है। प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स देशों की क्षमता और ताकत का सम्मिलित रूप से इस्तेमाल कर वैश्विक समस्याओं का समाधान निकालने का आह्वान किया।
दुनिया में व्यापार के विस्तार के लिए समुद्री मार्गों को खुला और सुरक्षित रखने के महत्व पर बल देते हुए श्री मोदी ने कहा , ” दुनिया में व्यापार आगे तभी बढ़ सकता है जब समुद्री मार्ग सुरक्षित हों, आपूर्ति की राहें खुली हों और नाविक सुरक्षित हों। इसीलिए भारत नौवहन की स्वतंत्रता और नाविकों की सुरक्षा का दृढ़ समर्थक है।” उन्होंने ये बातें ऐसे समय कही हैं जबकि पश्चिम एशिया में होर्मूज जल-डमरू मध्य में जहाजों का आना जाना अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते रुक सा गया है।इसके अलावा अमेरिका तथा कुछ अन्य देश दूसरे देशों के खिलाफ व्यापार में ऊंचे शुल्क ओर अन्य प्रतिबंधात्मक उपाय करने में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया में आज जब व्यापार की राह में बाधाएं बढ़ रहीं हैं, भारत (विभिन्न बाजारों के साथ) आर्थिक संम्पर्क सेतु का निर्माण कर रहा है।” उन्होंने कहा कि 2014 के बाद भारत ने करीब 40 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते किये हैं ।
उन्होंने कहा, ‘ ब्रिक्स समूह में भी हमारी सोच यही है, बाधाओं को कम करना, और कारोबार के लिए अवसर बढ़ाना।” उन्होंने कहा कि भारत की अध्यक्षता में समूह ने कृषि , स्वास्थ्य , कौशल विकास और स्मार्ट-ग्रिड जैसे क्षेत्रों में, सहयोग के नए नेटवर्क का गठन किया है। स्टार्ट-अप और लघु तथा मझोले उद्यमों को, मार्केट और कर्ज सुविधाओं से जोड़ने के लिए, हमने ब्रिक्स इन्क्युबेटर नेटवर्क, ब्रिक्स एमएसएमई पोर्टल, और ब्रिक्स स्टर्टअप नवाचार कोष जैसी पहलें की हैं।उन्होंने कहा कि ये पहले समूह के देशों के बीच निवेश एवं कौशल के आदान प्रदान को बढ़ाने में सहायक हो सकती हैं। श्री मोदी ने वैश्विक चुनौतियों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की गति और मजबूती का हवाला देते हुए कहा कि ‘वैश्विक चिंताओं के बीच भी भारत आज आर्थिक वृद्धि और मजबूती का भरोसा दे रहा है।
” उन्होंने वैश्विक निवेशक समुदाय से भारत में भारत में नवाचार और आविष्कार करने के लिए आने और यहां से दुनिया के बाजारों के लिए बड़े पैमाने के उत्पादन के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स की चर्चाओं के मुख्य विषय “बिल्डिंग फॉर रेज़िलियेन्स, इनोवेशन, को-ऑपरेशन एण्ड सस्टेनिबिलिटी” (दृढता, नवाचार, सहयोग और निरंतरता का निर्माण) का उल्लेख करते हुए कहा कि पछले बारह वर्षों में, भारत ने इस मंत्र को अपनी अर्थव्यवस्था और व्यापार नीति का आधार बनाया है।दृढता की बात करें, तो भारत ने ईंधन से लेकर आपूर्ति श्रृंला तक को अधिक विविधीकृत और भरोसेमंद बनाया है। इसी दृढता का परिणाम है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी, भारत आज वृद्धि और निरंतरता का भरोसा दे रहा है।
उन्होंने बुनियादी ढांचे के विकास से लेकर सेमीकन्डक्टर, क्वांटम, क्रिटिकल मिनरल्स जैसे क्षेत्रों में भारत की प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में भारत, वैश्विक निवेशकों के लिए नए अवसरों का केंद्र बन रहा है। उन्होंने कहा कि भारत में एक स्टार्टअप क्रांति हो रही है, देश शेष विश्व के लिए भी समाधान निकालने का केंद्र बन रहा है। इसी संदर्भ में उन्होंने यूपीआई का विशेष रूप से उल्लेख किया। श्री मोदी ने कहा, ” हमें गर्व है कि भारत के इस विश्वस्तरीय पारिस्थितिकी तंत्र (यूपीआई) को कई देश अपना रहे हैं। ब्रिक्स देशों के नवाचार भी, इस अनुभव के आधार पर, अपने देशों के लिए नए सोल्युशंस तैयार कर सकते हैं।” ब्रिक्स देश वैश्विक नवाचार और समाधान के लिए महत्वपूर्ण सेंटर्स भी बन रहे है। उन्होंने समूह का आह्वान किया, ‘ ब्रिक्स आगे बढ़े, और दुनिया को भी आगे बढ़ाये।
ब्रिक्स बिजनेस फोरम में बोले पुतिन: व्यापार में अनुचित तरीके अपना रहे हैं पश्चिमी देश
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को ब्रिक्स के बिजनेस फोरम में पश्चिमी देशों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे प्रतिस्पर्धा में आगे रहने के लिए व्यापार में खुलेआम अनुचित तरीके अपना रहे हैं। शनिवार को होने वाले 18 वें ब्रिक्स सम्मेलन से पहले आयोजित बिजनेस फोरम को संबोधित करते हुए श्री पुतिन ने कहा कि इस समय दुनिया में ढांचागत बदलाव देखने को मिल रहे हैं। इक्कीसवीं सदी में विकास के नये इंजन सामने आए हैं।यह अर्थव्यवस्था की प्रकृति है कि बदलाव को नहीं रोका जा सकता। पिछले पांच साल में वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में ब्रिक्स देशों का योगदान 40 प्रतिशत रहा है जबकि जी 7 देशों का 29 प्रतिशत।
वैश्विक वृद्धि में ब्रिक्स देशों का योगदान 50 प्रतिशत से अधिक है जबकि जी 7 देशों का 18 प्रतिशत। इसका कारण यह है कि दुनिया की 50 प्रतिशत आबादी इन्हीं देशों में है। उन्होंने कहा, “उन्हें ग्रेट 7 कहा जाता है, पता नहीं क्यों उन्हें ग्रेट कहा जाता है।”रूसी राष्ट्रपति ने कहा, “हमारे पश्चिमी प्रतिस्पर्धी अपनी पुरानी स्थिति हासिल करने के लिए आगे निकलने के प्रयास में सबकुछ कर रहे हैं। जैसा कि ईरान ने कहा, वे कभी-कभी अनुचित तरीके भी अपनाते हैं। कभी-कभी सरकारी स्तर पर भी ये अनुचित तरीके देखने को मिलते हैं।” उन्होंने कहा कि इसके तहत पाइपलाइनों को ध्वस्त किया जा रहा है, अंतरराष्ट्रीय परिवहन और कॉरिडोर बंद किये जा रहे हैं, वाणिज्यिक जहाज जब्त किए जा रहे हैं और अवैध प्रतिबंध लगाये जा रहे हैं।
भारत और कुछ अन्य देशों पर रूस से तेल खरीदने के लिए लगाए गए प्रतिबंधों के परिप्रेक्ष्य में श्री पुतिन ने कहा कि जो उनके (पश्चिमी देशों के) हितों की बजाय अपने हितों को आगे रखते हैं उन पर परोक्ष प्रतिबंध लगाये जाते हैं। उन्होंने बताया कि रूस पर 30 हजार से अधिक प्रतिबंध लगाए गए हैं जो दुनिया में अन्य सभी देशों पर लगाए गए कुल प्रतिबंधों का दो गुना है।श्री पुतिन ने कहा कि इन चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच रूस ने ब्रिक्स और दूसरे देशों में नये साझेदार बनाए हैं। उन्होंने कहा, “पिछले चार साल में हमारे विदेश व्यापार में भौगोलिक और रणनीतिक बदलाव आया है।” उन्होंने कहा कि इन पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बावजूद रूस तेजी से प्रगति कर रहा है। पिछले तीन साल में रूस की जीडीपी वृद्धि दर वैश्विक औसत से अधिक रही है। हमने महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखे हैं और हासिल किए हैं। वहीं, दूसरी तरफ पश्चिमी देश बजट घाटे, सार्वजनिक ऋण और औद्योगिक गिरावट के ऊंचे स्तर का सामना कर रहे हैं।
पुतिन से मिले मोदी, आर्थिक, रक्षा, ऊर्जा और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में सहयोग पर हुई चर्चा
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ शुक्रवार को यहां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता की जिसमें दोनों नेताओं ने व्यापारिक संबंधों को मजबूत करते हुए 2030 के लिए आर्थिक सहयोग कार्यक्रम लागू करने, बुनियादी ढांचे, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, रक्षा, संस्कृति और अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढाने पर विस्तार से चर्चा की। रूस-यूक्रेन युद्ध पर एक बार फिर भारत का रूख दोहराते हुए श्री मोदी ने कहा कि विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति से ही संभव है और भारत शांति प्रयासों में मदद के लिए तैयार है।उन्होंने भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए पुतिन का रूस यात्रा का निमंत्रण भी स्वीकार किया।
शिखर सम्मेलन के आयोजन स्थल भारत मंडपम में हुई वार्ता के बाद श्री मोदी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि उन्होंने द्विपक्षीय मुद्दों के अलावा भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान दुनिया के कल्याण से संबंधित गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयासों पर बातचीत की। उन्होंने कहा कि बैठक में दोनों ने व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करने जिसमें 2030 के लिए आर्थिक सहयोग कार्यक्रम को लागू करना भी शामिल है पर भी चर्चा की। उल्लेखनीय है कि इस कार्यक्रम में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 100 अरब डालर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।
श्री मोदी ने कहा, ” दिल्ली में राष्ट्रपति पुतिन से मिलकर खुशी हुई। बिश्केक में हमारी मुलाकात के दो हफ्ते से भी कम समय बाद आज फिर उनसे मुलाकात हुई। आज की मुलाकात के दौरान हमने जिन मुद्दों पर बात की उनमें व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करना जिसमें 2030 के लिए आर्थिक सहयोग कार्यक्रम को लागू करना , बुनियादी ढांचे, ऊर्जा, तकनीक, रक्षा, संस्कृति और अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढाने पर और भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान दुनिया के कल्याण को आगे बढ़ाने के लिए किये जा रहे प्रयासों पर बातचीत शामिल है।”प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया कि दोनों नेताओं ने राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, कौशल और लोगों के बीच परस्पर संपर्क सहित विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की प्रगति की समीक्षा की।
उन्होंने रूस की अंतरराष्ट्रीय औद्योगिक प्रदर्शनी “इनोप्रोम इंडिया” का स्वागत किया, जो 9 से 11 सितंबर तक पहली बार भारत में हो रही है। दोनों नेताओं ने व्यापार और औद्योगिक संबंधों को और बढ़ाने में इसके महत्व का उल्लेख किया और इसमें शामिल प्रतिभागियों से बातचीत की। दोनों नेताओं ने बहुपक्षीय स्तर पर भारत-रूस संबंधों, खासकर 2026 में भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स में सहयोग को लेकर विचारों का आदान-प्रदान किया।उन्होंने आपसी हित के प्रमुख क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी अपने विचार साझा किए। इनमें पश्चिम एशिया और काला सागर क्षेत्र के संघर्ष शामिल हैं, जिनका समुद्री व्यापार और भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर असर पड़ा है। प्रधानमंत्री ने एक बार फिर कहा कि विवादों को हल करने के लिए बातचीत और कूटनीति ही आगे बढ़ने का रास्ता है और भारत शांति के प्रयासों में मदद के लिए तैयार है।
उन्होंने दोनों देशों के बीच विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के प्रयास जारी रखने पर सहमति जतायी। यह साझेदारी लगातार महत्वपूर्ण प्रगति कर रही है और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच भी मजबूत बनी हुई है।श्री पुतिन ने प्रधानमंत्री को 24वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए रूस आने का निमंत्रण दिया जिसे प्रधानमंत्री ने स्वीकार किया। शिखर सम्मेलन की तारीख दोनों देशों की आपसी सुविधा के अनुसार राजनयिक माध्यमों से तय की जायेगी।(वार्ता)
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