मोदी कैबिनेट का बड़ा रेल तोहफा: 10 राज्यों में 11 मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारतीय रेलवे के विस्तार और क्षमता वृद्धि को लेकर बड़ा फैसला किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 20,804 करोड़ रुपये की 11 मल्टीट्रैकिंग रेल परियोजनाओं को मंजूरी दी। इनसे करीब 1,196 किलोमीटर रेल नेटवर्क बढ़ेगा। परियोजनाएं 10 राज्यों के 31 जिलों को कवर करेंगी और लगभग 1.08 करोड़ लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। रेलवे की सालाना माल ढुलाई क्षमता में करीब 74 मिलियन टन की अतिरिक्त वृद्धि होगी।
नई दिल्ली : केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश में रेल कनेक्टिविटी और माल ढुलाई क्षमता को बढ़ाने की दिशा में बड़ा फैसला लेते हुए कुल 20,804 करोड़ रुपये की लागत वाली 11 मल्टीट्रैकिंग रेल परियोजनाओं को मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने रेल मंत्रालय के इन प्रस्तावों को स्वीकृति दी। परियोजनाओं के पूरा होने से भारतीय रेल के मौजूदा नेटवर्क में करीब 1,196 किलोमीटर की वृद्धि होगी।
इन परियोजनाओं को 2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजनाएं पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना समेत नौ राज्यों के 31 जिलों को कवर करेंगी। इससे करीब 6,911 गांवों, जिनकी कुल आबादी लगभग 1.08 करोड़ है, को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है।
पूर्वी और मध्य भारत में 656 किमी रेल नेटवर्क का विस्तार
पहले चरण में पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के 14 जिलों को कवर करने वाली तीन मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनकी अनुमानित लागत 10,783 करोड़ रुपये है और इनके तहत करीब 656 किलोमीटर रेल नेटवर्क का विस्तार होगा।
इन परियोजनाओं में खड़गपुर-बागदेही चौथी लाइन, कटनी-पेंड्रा रोड चौथी लाइन तथा बिलासपुर (उसलापुर)-पेंड्रा रोड तीसरी लाइन शामिल हैं। इनसे करीब 4,790 गांवों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी और लगभग 56 लाख आबादी को लाभ मिलेगा। परियोजनाओं से कोयला, सीमेंट, लोहा-इस्पात समेत प्रमुख औद्योगिक वस्तुओं की ढुलाई के लिए रेल क्षमता बढ़ेगी।
दक्षिण भारत में 540 किमी नई क्षमता
दूसरे बड़े फैसले में तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना के 17 जिलों में फैली पांच मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनकी कुल अनुमानित लागत 10,021 करोड़ रुपये है और परियोजनाओं से रेलवे नेटवर्क में करीब 540 किलोमीटर की वृद्धि होगी।
स्वीकृत परियोजनाओं में अरक्कोनम-रेनिगुंटा तीसरी और चौथी लाइन (77 किमी), व्हाइटफील्ड-बांगरपेट तीसरी और चौथी लाइन (47 किमी), होसुर-ओमालूर दोहरीकरण (147 किमी), सलेम-करूर-डिंडीगुल दोहरीकरण (159 किमी) तथा सिकंदराबाद (घाटकेसर)-काजीपेट 110 किमी मल्टीट्रैकिंग शामिल है।इन परियोजनाओं से करीब 2,121 गांवों और लगभग 52 लाख लोगों को बेहतर रेल संपर्क मिलेगा।
हर साल 74 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता
दोनों परियोजना समूहों से रेलवे की माल ढुलाई क्षमता में बड़ा इजाफा होगा। पूर्वी और मध्य भारत की परियोजनाओं से करीब 27 मिलियन टन प्रति वर्ष, जबकि दक्षिण भारत की परियोजनाओं से करीब 47 मिलियन टन प्रति वर्ष अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता उपलब्ध होगी। यानी कुल मिलाकर करीब 74 मिलियन टन प्रति वर्ष अतिरिक्त क्षमता विकसित होगी।
इन रेल मार्गों से कोयला, सीमेंट, लोहा-इस्पात, कंटेनर, ऑटोमोबाइल, अनाज, पेट्रोलियम उत्पाद और उर्वरक समेत विभिन्न वस्तुओं की तेज और अधिक कुशल ढुलाई संभव होगी। इससे सड़क परिवहन पर दबाव कम होने के साथ देश की लॉजिस्टिक्स लागत घटाने में भी मदद मिलेगी।
पर्यटन स्थलों की कनेक्टिविटी भी होगी बेहतर
परियोजनाओं से कई प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक रेल संपर्क मजबूत होगा। इनमें तिरुपति, जगन्नाथ मंदिर क्षेत्र, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, अमरकंटक, अचानकमार टाइगर रिजर्व, तारातारिणी मंदिर, रतनपुर महामाया मंदिर, होगेनक्कल फॉल्स, कोडाइकनाल हिल्स, सत्यमंगलम वन्यजीव अभयारण्य, यादगिरिगुट्टा मंदिर और भोंगीर किला समेत कई प्रमुख स्थल शामिल हैं।
गति शक्ति मास्टर प्लान के तहत परियोजनाएं
रेल मंत्रालय के अनुसार, इन परियोजनाओं को प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप तैयार किया गया है। इनका उद्देश्य विभिन्न परिवहन माध्यमों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स दक्षता को बढ़ाना है।
मल्टीट्रैकिंग से व्यस्त रेल मार्गों पर ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुगम होगी, परिचालन संबंधी बाधाएं और भीड़भाड़ कम होगी तथा यात्री और मालगाड़ियों की सेवा विश्वसनीयता में सुधार आएगा।
पर्यावरण को भी मिलेगा लाभ
रेलवे के अनुसार, इन क्षमता वृद्धि परियोजनाओं से सड़क परिवहन की तुलना में अधिक ऊर्जा-कुशल और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन को बढ़ावा मिलेगा। पूर्वी एवं मध्य भारत की परियोजनाओं से करीब 12 करोड़ लीटर तेल आयात में कमी और लगभग 62 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी का अनुमान है। यह करीब 2.48 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है।
वहीं दक्षिण भारत की परियोजनाओं से करीब 8 करोड़ लीटर तेल आयात और लगभग 42 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम होने का अनुमान है, जो करीब 2 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है।
कुल मिलाकर, इन 11 परियोजनाओं से रेल नेटवर्क का विस्तार, माल ढुलाई क्षमता में वृद्धि, औद्योगिक परिवहन की गति, पर्यटन कनेक्टिविटी और पर्यावरण संरक्षण- इन सभी क्षेत्रों को एक साथ मजबूती मिलने की उम्मीद है।
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