
भारतीय इतिहास को तोड़-मरोड़ कर लिखा गया : हर्षवर्धन त्रिपाठी
1857 की क्रांति के इतिहास को भारतीय दृष्टि से नहीं देखा गया
प्रयागराज । भारतीय इतिहास को तोड़-मरोड़ कर लिखा गया है। इसलिए केवल इसमें सैनिक व सामंत विद्रोह को ही पढ़ा जाता है। जब आजादी की बात होती है, तो राजनीतिक पार्टियों के इर्द-गिर्द समाप्त हो जाती है। जब 1857 की क्रांति शुरू हुई थी उस समय किसी राजनीतिक पार्टी का गठन ही नहीं हुआ था।
उक्त विचार वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी ने आजादी के अमृत महोत्सव श्रृंखला के अंतर्गत अमर शहीदों की याद में उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, प्रयागराज द्वारा ‘‘1857 की क्रान्ति व आजादी का लक्ष्य‘‘ पर संगोष्ठी में व्यक्त किया। मंगलवार को सांस्कृतिक केंद्र के प्रेक्षागृह में संगोष्ठी में बतौर मुख्य वक्ता उन्होंने देश की आजादी में वीर सावरकर के योगदानों का भी जिक्र किया। उन्होंने हिन्दी भाषा, रंग व धर्म को न बांटने की व एक राष्ट्र की बात कही।
दिल्ली के वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव ने कहा कि एक-दो किताब और उसके अध्याय पढ़ लेने से इतिहास की पूर्ण जानकारी नहीं हो जाती है। सबसे पहले लोगों को अपने स्थानीय इतिहास के बारे में जानना चाहिए। 1857 की क्रान्ति में सक्रिय योगदान देने वाले क्रान्तिकारी मंगल पाण्डे का जिक्र करते हुए कहा कि कोई भी लक्ष्य अंतिम नहीं होना चाहिए। देश को स्वतंत्र कराने में जिस साझा शक्ति से हिंदू-मुस्लिम अंग्रेजों से लड़े उसी साझा शक्ति को अंग्रेजों ने तोड़ने की कोशिश की। आज नई पीढ़ी को इस शक्ति को समझना होगा तभी सपने सकार होगें।
कार्यक्रम का समापन उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक प्रो. सुरेश शर्मा ने एवं कार्यक्रम में आए हुए मुख्य वक्ताओं एवं वहां पर उपस्थित जनों को धन्यवाद ज्ञापित आशीष श्रीवास्तव ने किया। इस मौके पर रानी देवी सरस्वती विद्या निकेतन इंटर कॉलेज राजापुर, ज्वाला देवी सरस्वती विद्या मंदिर सिविल लाइन, जीआईसी एवं मैरी वॉनामेकर गर्ल्स इंटर कॉलेज के छात्र-छात्राएं एवं उनके प्रतिनिधि तथा प्रयागराज के बुद्धिजीवी वर्ग एवं केन्द्र के अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे।(हि.स.)



