Breaking News

प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए बोर्ड बना सकती है सरकार

कृषि और एमएसएमई दोनों के मेल से पूरा होगा ‘हर परिवार एक रोजगार’ का लक्ष्य

  • कमाल करेगा एमएसएमई और प्राकृतिक खेती का संगम
  • दोनों के मेल से पूरा होगा हर परिवार एक रोजगार का लक्ष्य
  • एमएसएमई में होगी ओडीओपी की महत्वपूर्ण भूमिका
  • एमएसएमई में होगी ओडीओपी की महत्वपूर्ण भूमिका

गिरीश पांडेय

सर्वाधिक रोजगार की संभानाओं वाले दो क्षेत्र कृषि और एमएसएमई (लघु, सूक्ष्म और मध्यम उद्योग) का संगम कमाल करेगा। एमएसएमई सेक्टर में एक जिला, एक उत्पाद (ओडीओपी) और कृषि क्षेत्र में जन,जमीन एवं जल के लिए मुफीद इको फ्रेंडली प्राकृतिक खेती की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इन दोनों के जरिए योगी सरकार हर परिवार, एक रोजगार के लक्ष्य को साधेगी।

मालूम हो कि देश की सर्वाधिक (करीब 90 लाख) इकाइयां उत्तर प्रदेश में है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने पहले कार्यकाल से ही संभावनाओं के इस क्षेत्र पर फोकस किया। नतीजे सबके सामने हैं। पिछले वित्तीय वर्ष में इसी क्षेत्र के बूते निर्यात के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश ने लंबी छलांग लगाई। निर्यात में 30 फीसद वृद्धि हुई और उत्तर प्रदेश देश का पांचवां सबसे बड़ा निर्यातक राज्य बन गया।

इस निर्यात में भी ओडीओपी उत्पादों की हिस्सेदारी करीब 70 फीसद रही। यही नहीं, जनवरी 2018 में लांच होने के बाद से योगी-01 में ओडीओपी के जरिए 25 लाख लोगों को रोजगार/स्वरोजगार मिला। इसी सफलता के मद्देनजर लोक कल्याण संकल्प पत्र- 2022 में भजपा ने अगले पांच वर्षों में इसके माध्यम से रोजगार/स्वरोजगार एवं निर्यात का लक्ष्य बढ़ाकर दोगुना कर दिया।

ओडीओपी उत्पाद गुणवत्ता एवं कीमत में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार के अनुरूप हों इसके लिए सरकार इनके लिए संबंधित जिलों में कॉमन फैसिलिटी सेंटर बनवा रही है। इससे संबंधित जिले से जुड़े ओडीओपी के सभी स्टेकहोल्डर्स को एक ही छत के नीचे सभी अत्याधुनिक सुविधाएं मिलेंगी। ओडीओपी के कई उत्पाद मसलन कालानमक धान, गुड़, दाल को सरकार अपने स्तर से भी लोकप्रिय बनाने का संभव प्रयास कर रही है। सालाना होने वाला गुड़ महोत्सव एवं कालानमक महोत्सव इसका प्रमाण है।

रही प्राकृतिक या जैविक खेती की बात तो सरकार के प्रोत्साहन का ही नतीजा है कि 2016-17 की तुलना में 2027 में तीन गुना रकबे पर जैविक खेती का लक्ष्य सरकार ने रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार विभिन्न योजनाओं के जरिए जैविक यूपी के जरिए जैविक भारत के सपने को साकार करने में लगी है।

प्रदेश जैविक खेती की संभावनाएं

उत्तर प्रदेश में जैविक खेती के लिए भरपूर बुनियादी सुविधाएं पहले से मौजूद हैं। सरकार इन सुविधाओं में लगातार विस्तार भी कर रही है। मसलन जैविक खेती का मुख्यालय नेशनल सेंटर फॉर ऑर्गेनिक फॉर्मिंग (एनसीओएफ) गाजियाबाद में स्थित है। देश की सबसे बड़ी जैविक उत्पादन कंपनी उत्तर प्रदेश की ही है। यहां प्रदेश के एक बड़े हिस्से में अब भी परंपरागत खेती की परंपरा है। गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए इसके किनारों पर जैविक खेती की संभावनाओं को और बढ़ा देती है। 2017 के जैविक खेती के कुंभ के दौरान भी एक्सपर्ट्स ने गंगा के मैदानी इलाकों को जैविक खेती के लिए आरक्षित करने की संस्तुति की गई थी।

योगी सरकार की ओर से अब तक किए गए कार्य और नतीजे

जैविक खेती को लोकप्रिय बनाने के लिए योगी-1 से ही प्रयास जारी हैं। इसके तहत योगी-1 में जैविक खेती के क्लस्टर्स बनाकर किसानों को जैविक खेती से जोड़ा गया। तीन वर्ष के लक्ष्य के साथ 20 हेक्टेयर के एक क्लस्टर से 50 किसानों को जोड़ा गया। प्रति क्लस्टर सरकार तीन साल में 10 लाख रुपए प्रशिक्षण से लेकर गुणवत्तापूर्ण कृषि निवेश उपलब्ध कराने पर ख़र्च करती है। जैविक उत्पादों के परीक्षण के लिए एक प्रयोगशाला लखनऊ में क्रियाशील है। मेरठ और वाराणसी में काम प्रगति पर है।

पिछले दो वर्षों के दौरान 35 जिलों में 38,703 हेक्टेयर क्षेत्रफल पर जैविक कृषि परियोजना को स्वीकृति दी जा चुकी है। इसके लिए 22,86,915 किसानों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। जैविक खेती के प्रति लोग जागरूक हों। इस बाबत 16 दिसंबर 2021 में कृषि विभाग वाराणसी में 22 जनवरी 2020 को चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर में नमामि गंगे योजना के तहत कार्यशाला और प्रदेश के पांच कृषि विश्विद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके), कृषि प्रबन्धन संस्थान रहमान खेड़ा पर जैविक खेती के प्रदर्शन के पीछे भी सरकार का यही मकसद रहा है।

कार्ययोजना

योगी-2 में जैविक खेती को प्रोत्साहन देने के लिए जो लक्ष्य रखा है उसके अनुसार गंगा के किनारे के सभी 27 जिलों में 10 किलोमीटर के दायरे में जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। बुंदेलखंड के सभी 7 जिलों में गो आधारित जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे इस पूरे क्षेत्र में निराश्रित गोवंश की समस्या हल करने में मदद मिलेगी। प्रदेश के हर ब्लॉक में जैविक खेती को विस्तार दिया जाएगा।

ऐसे उत्पादों का अलग ब्रांड स्थापित करना, हर मंडी में जैविक आउटलेट के लिए अलग जगह का निर्धारण किया गया है। जरूरी हुआ तो सरकार जैविक खेती के लिए बोर्ड भी बना सकती है। सरकार का लक्ष्य अगले पांच साल में प्रदेश के 3,00,000 क्षेत्रफल पर जैविक खेती का विस्तार करते हुए 7,50,000 किसानों को इससे जोड़ने की है।

जैविक खेती के लिए खरीफ के मौजूदा सीजन ( 2022) से शुरू होने वाली योजना के तहत जिन ब्लाकों में जैविक खेती के लिए क्लस्टर बनेंगे उसमें से प्रत्येक में 1-1 चैंपियन फार्मर एवं लोकल रिसोर्स पर्सन, 10 कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन और 2 लोकल रिसोर्स पर्सन चयनित किए जाएंगे। कुल मिलाकर लक्ष्य जैविक उत्तर प्रदेश के जरिए जैविक भारत का है।

ऑर्गेनिक फॉर्मिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया की ओर से 9 से 11 नवंबर 2017 में जैविक खेती के प्रोत्साहन के लिए इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट ग्रेटर नोएडा में जैविक कृषि कुंभ का आयोजन किया गया था। इसमें 107 देशों ने भाग लिया था। इससे मिले आंकड़ों के अनुसार उस समय भारत के जिन प्रमुख राज्यो में प्रमाणित जैविक खेती होती थी उनमें राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, जम्मू कश्मीर, छत्तीसगढ़ और आंध्रप्रदेश के बाद उत्तर प्रदेश का नंबर सातवां था।

प्रदेश में जैविक खेती का कुल रकबा 1,01,459 हेक्टेयर था। तबसे अब तक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्ग दर्शन में इसमें खासी प्रगति हो चुकी है। जैविक क्लस्टर्स को बढ़ावा देकर प्रदेश सरकार 2021-2022 तक 95,680 हेक्टर तक किया जा चुका है। अगले पांच साल में जैविक खेती का रकबा बढ़ाकर क्रमशः 3,00,000 हेक्टेयर करने का है।

BABA GANINATH BHAKT MANDAL  BABA GANINATH BHAKT MANDAL

Related Articles

Back to top button