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तेजस्वान से दिव्यास्त्र तक, यूपी-जापान मीट में दिखी भारत की तकनीकी ताकत

लखनऊ में आयोजित यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट 2026 में उत्तर प्रदेश की औद्योगिक और तकनीकी क्षमता की झलक देखने को मिली। प्रदर्शनी में आईआईटी कानपुर से इनक्यूबेटेड मराल एयरोस्पेस का तेजस्वान ड्रोन, एस्कॉर्ट्स कुबोटा की कृषि मशीनरी, होवेरिट का दिव्यास्त्र एमके-1 और एमकेयू के आधुनिक बैलेस्टिक सुरक्षा उपकरण प्रमुख आकर्षण रहे। स्वदेशी एयरोस्पेस, डिफेंस, कृषि और कंस्ट्रक्शन तकनीक ने निवेश और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में प्रदेश की बढ़ती क्षमता को प्रदर्शित किया।

लखनऊ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट 2026 की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री ने विभिन्न स्टॉल पर पहुंचकर प्रदर्शित उत्पादों और उनकी तकनीक की जानकारी ली। प्रदर्शनी में आधुनिक तकनीक के साथ स्वदेशी उत्पादों की क्षमता भी देखने को मिली। एयरोस्पेस, डिफेंस, कृषि और कंस्ट्रक्शन क्षेत्र से जुड़े अत्याधुनिक उत्पादों ने खासा आकर्षण बटोरा। आईआईटी कानपुर से इनक्यूबेटेड स्टार्टअप मराल एयरोस्पेस का तेजस्वान ड्रोन प्रमुख आकर्षण रहा। इसके अलावा एस्कॉर्ट्स कुबोटा के कृषि उपकरण, होवेरिट का दिव्यास्त्र एमके-1 तथा एमकेयू के बैलेस्टिक हेलमेट और सुरक्षा उपकरणों ने भी लोगों का ध्यान खींचा। मुख्यमंत्री ने इन उत्पादों की तकनीकी विशेषताओं और उपयोगिता के बारे में जानकारी ली।

12 घंटे तक आसमान में रह सकेगा तेजस्वान

प्रदर्शनी में सबसे ज्यादा चर्चा मराल एयरोस्पेस के स्वदेशी फिक्स्ड-विंग यूएवी तेजस्वान की रही। मराल एयरोस्पेस के फाउंडर विवेक कुमार पांडेय ने बताया कि कंपनी भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर (आईआईटी कानपुर) में इनक्यूबेट हुआ डीप-टेक एयरोस्पेस स्टार्टअप है। कंपनी रक्षा, सुरक्षा और वाणिज्यिक क्षेत्रों के लिए स्वदेशी डिजाइन वाले लंबे समय तक उड़ान भरने में सक्षम मानवरहित हवाई प्रणालियां विकसित कर रही है। कंपनी के प्रमुख प्लेटफॉर्म तेजस्वान को लंबे समय तक आसमान में बने रहने के उद्देश्य से तैयार किया जा रहा है। यह करीब 12 घंटे तक लगातार उड़ान भरने में सक्षम है।

साथ ही समुद्र तल से करीब 6000 मीटर की ऊंचाई तक संचालन के लिए डिजाइन किया जा रहा है। इसमें 5 किलोग्राम तक पेलोड ले जाने और करीब 120 से 150 किलोमीटर की एकतरफा रेंज प्रस्तावित है। कंपनी के मुताबिक, रात में भी यह करीब चार घंटे तक उड़ान भरने में सक्षम होगा। तेजस्वान में उच्च दक्षता वाले सोलर सेल, हल्की कंपोजिट संरचना, अधिक ऊर्जा घनत्व वाली बैटरियां, स्वायत्त उड़ान प्रणाली और सुरक्षा के लिए रिडंडेंट सिस्टम जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। इसकी उपयोगिता खुफिया, निगरानी एवं टोही (आईएसआ), सीमा निगरानी, आपदा प्रबंधन, संचार रिले और बुनियादी ढांचे के निरीक्षण जैसे क्षेत्रों में बताई गई है।

90 दिन तक आसमान में रहने वाले एचएपीएस पर भी काम

मराल एयरोस्पेस केवल तेजस्वान तक सीमित नहीं है। कंपनी हाई-एल्टीट्यूड स्यूडो-सैटेलाइट यानी एचएपीएस प्लेटफॉर्म पर भी काम कर रही है। इसे करीब 90 दिनों तक लगातार संचालन के लिए तैयार किया जा रहा है। ऐसे प्लेटफॉर्म लंबे समय तक ऊंचाई पर रहकर निगरानी, संचार और अन्य रणनीतिक जरूरतों में उपयोगी हो सकते हैं।

प्रदर्शनी में 27 लाख का कंबाइन हार्वेस्टर से लेकर 6 लाख का कॉम्पैक्ट ट्रैक्टर रहा आकर्षण का केंद्र

प्रदर्शनी में एस्कॉर्ट्स कुबोटा लिमिटेड कंपनी के कृषि और कंस्ट्रक्शन उपकरण भी आकर्षण का केंद्र रहे। कंपनी के एग्री सॉल्यूशन प्रोडक्ट मैनेजर आतसुया ओता ने बताया कि कंपनी ने उत्तर प्रदेश में करीब 154 एकड़ जमीन 90 साल की लीज पर ली है। यहां आने वाले सात वर्षों में ट्रैक्टर, कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट और पार्ट्स सेंटर विकसित करने की योजना है। कंपनी की ओर से इस परियोजना में 2,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की तैयारी है।

प्रदर्शनी में कंपनी की ओर से कंबाइन हार्वेस्टर, राइस ट्रांसप्लांटर, कॉम्पैक्ट ट्रैक्टर और डीजल जेनसेट लगाए गए थे। कंबाइन हार्वेस्टर की बिक्री के मामले में वह देश में दूसरे स्थान पर है, जबकि राइस ट्रांसप्लांटर की बिक्री में नंबर वन है। कंपनी के प्रदर्शित उत्पादों में कंबाइन हार्वेस्टर की कीमत करीब 27 लाख रुपये, राइस ट्रांसप्लांटर की करीब 14 लाख रुपये, कॉम्पैक्ट ट्रैक्टर की करीब 6 लाख रुपये और डीजल जेनसेट की कीमत करीब 7 लाख रुपये है। कंपनी भारत में कंस्ट्रक्शन क्षेत्र के लिए क्रेन, बैकहो लोडर और ट्रैक्टर जैसे उपकरणों का निर्माण कर रही है, जबकि कंबाइन हार्वेस्टर और राइस ट्रांसप्लांटर का आयात किया जाता है। कंपनी कृषि और निर्माण क्षेत्र के लिए मशीनरी और उपकरण तैयार करती है।

400-500 किलोमीटर रेंज वाला दिव्यास्त्र एमके वन भी प्रदर्शनी में

डिफेंस टेक्नोलॉजी की झलक होवेरिट प्राइवेट लिमिटेड के दिव्यास्त्र एमके वन में भी देखने को मिली। कंपनी के फ्लाइट टेस्टिंग इंजीनियर लारिब ने बताया कि दिव्यास्त्र एमके वन एक लोइटरिंग म्यूनिशन/आत्मघाती ड्रोन प्लेटफॉर्म है, जिसे लक्षित स्थान तक पहुंचकर हमला करने के लिए डिजाइन किया गया है। लारिब ने बताया कि इसकी प्रस्तावित रेंज 400 से 500 किलोमीटर तक है और यह करीब 800 से 1,000 मीटर की ऊंचाई पर उड़ान भर सकता है।

इसकी लगातार उड़ान क्षमता करीब 5 घंटे है। इसमें थर्मल इमेजिंग कैमरा लगाया गया है और यह आईसी इंजन से संचालित होता है। इसका मई 2026 में भारतीय सेना द्वारा सफल परीक्षण किया गया था। दिव्यास्त्र एमके वन करीब 20 किलोग्राम तक पेलोड ले जाने में सक्षम है और लोड के साथ इसका कुल वजन करीब 40 किलोग्राम है। इसकी गति करीब 250 से 350 किलोमीटर प्रति घंटा है। कंपनी इसे मेड इन इंडिया प्लेटफॉर्म के तौर पर विकसित कर रही है। होवेरिट कंपनी यूपी डिफेंस कॉरिडोर के तहत काम कर रही है। दिव्यास्त्र का नया एमके-3 वेरिएंट जेट इंजन से संचालित होगा और इसका कानपुर में परीक्षण किया जा चुका है।

कारगिल से आधुनिक बैलेस्टिक सुरक्षा तक पहुंचा एमकेयू

प्रदर्शनी में सैनिकों की सुरक्षा से जुड़े उपकरणों ने भी लोगों का ध्यान खींचा। दशकों पुरानी एमकेयू लिमिटेड ने बैलेस्टिक हेलमेट, बैलेस्टिक जैकेट, नाइट विजन बाइनोक्युलर और थर्मल वेपन साइट जैसे उत्पाद प्रदर्शित किए। कंपनी के सीनियर सेल्स मैनेजर सोहम सेठ ने बताया कि कंपनी ने कारगिल युद्ध के दौरान जूतों की आपूर्ति की थी। इसके बाद कंपनी ने बैलेस्टिक हेलमेट और बैलेस्टिक जैकेट के क्षेत्र में विस्तार किया। आज कंपनी भारत में सुरक्षा उपकरणों के निर्माण के क्षेत्र में काम कर रही है।

सीनियर सेल्स मैनेजर ने बताया कि उसके उत्पाद करीब 90 देशों तक पहुंच रहे हैं। प्रदर्शनी में सैनिकों और सुरक्षा बलों के लिए आधुनिक बैलेस्टिक सुरक्षा उपकरणों के साथ-साथ कम रोशनी और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में निगरानी एवं लक्ष्य पहचान में इस्तेमाल होने वाली तकनीकों का भी प्रदर्शन किया गया है।

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