
पूर्व मंत्री का किला ढहा, शिष्य ने गुरु को दिया मात
कभी विजय सिंह गोंड़ ने अपने गुरु रामप्यारे पनिका को हराकर, राजनीति से कराया था अलविदा
- देवेश मोहन
दुद्धी, सोनभद्र – आदिवासियों के कद्दावर नेता पूर्व मंत्री विजय सिंह गोंड़ को उनके ही गढ़ में उनके शिष्य रामदुलार गोंड़ ने हराकर, उनके अजेय होने का मिथक तोड़ दिया। सूबे के अंतिम विधानसभा क्षेत्र 403 दुद्धी में आजादी के बाद से अब तक सम्पन्न हुए 17 बार के विस चुनाव में लगातार 7 बार जीत दर्ज करने वाले आदिवासी नेता विजय सिंह गोंड़ को लगातार दूसरी बार हार से सामना करना पड़ा। यूूपी विधानसभा में अजेय विधायक का तमगा लेने वाले विजय सिंह को वर्ष 2017 में पहली बार भाजपा अपनादल गठबंधन से शिकस्त मिली थी। तब उन्हें इस अप्रत्याशित परिणाम पर भरोसा न था।

लेकिन मोदी लहर में अच्छों अच्छों की हवा खराब रही,तो मन मसोस कर इन्होंने भी जनता जनार्दन के जनादेश को स्वीकार किया। खोई जमीन व जनाधार की वापसी के लिए इस बार दमदारी से चुनाव लड़ रहे पूर्व मंत्री विजय सिंह गोंड़ को उनके अपने ही शिष्य रामदुलार ने हराकर, पुराने परम्परा को दोहराया है। इससे पहले वर्ष 1996 के चुनाव में पूर्व मंत्री विजय सिंह ने भी अपने राजनीतिक गुरु स्व.रामप्यारे पनिका को हराकर, इस परम्परा की शुरुआत की थी।
इस बार के चुनाव में मतदाताओं ने डबल इंजन की सरकार पर भरोसा कर, जिले के चारो विधानसभा में ऐतिहासिक परिणाम दिये। यूपी विधान सभा चुनाव में रिकार्ड सीट हासिल करने वाली भाजपा गठबंधन ने एक ओर जहां इतिहास रचने का काम किया है।वहीं दूसरी ओर आदिवासियों के लिए आरक्षित हुई दुद्धी एवं ओबरा विधान सभा सीट पर भी भाजपा ने अपने कामयाबी के झंडे गाड़े हैं। सबसे रोचक जीत दुद्धी विधानसभा सीट पर भाजपा ने दर्ज कर,कमल खिलाई है। भाजपा की इस ऐतिहासिक जीत ने पूर्व मंत्री विजय सिंह गोंड़ का किला ढहा दिया है।
इतिहास रचने वाले मोदी-योगी लहर के इस चुनाव में जनपद की चारो सीट भाजपा की झोली में चली गयी और राजनितिक गणितज्ञों के सारे गणित धरे के धरे रह गये। मतदान की तिथि ज्यों-ज्यों नजदीक आती रही , त्यों-त्यों वोटों के ध्रुवीकरण से समीकरण बनते-बिगड़ते रहे।जिसमें क्षेत्र के कद्दावर आदिवासी नेता विजय सिंह गोंड़ अपनी 42 वर्षों की पुरानी राजनितिक प्रतिष्ठा भी नहीं बचा सके। इस क्षेत्र से लगातार सात बार विधायक चुने जाने का दम्भ भरने वाले श्री गोंड़ को अल्प समय में उनके ही समाज का उनका अपना शिष्य भाजपा प्रत्याशी रामदुलार गोंड़ ने 6723 वोटों से पराजित कर गौरवमयी इतिहास बनाया है।
रामदुलार को लड़ाई में कमजोर व बाहर मानने वाले सपाई, परिणाम देख हतप्रभ रह गये। वर्ष 2017 के दुद्धी विधान सभा चुनाव में हरीराम चेरो ने पहली बार विजय सिंह का किला ढहाते हुए, उनके अजेय क्रम को तोड़ा था। ठीक उसी तर्ज पर भाजपा प्रत्याशी रामदुलार ने भी अपने राजनीतिक गुरु पूर्व मंत्री विजय सिंह को पटखनी देकर सबकी गणित फेल कर दी।आदिवासियों की वोट पर एकाधिकार रखने वाले आदिवासी नेता एवं पूर्व मंत्री विजय सिंह गोंड़ के वोट बैंक में विरोधियों ने सेंध लगाने का हर संभव प्रयास किया, जो सफल रहा। खासकर भाजपा द्वारा उनके ही समाज के उनके करीबी शिष्य को टिकट देंना सफल साबित हुआ।
दुर्भाग्य ने इस बार सपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे पूर्व मंत्री को अपने 42 वर्षों की राजनितिक अनुभव का लाभ लेने से रोक दिया। निर्दल से लेकर विभिन्न पार्टियों के बैनर तले लगातार सात बार चुनाव जीत चुके विजय सिंह के विजय रथ को दूसरी बार रोकने में भाजपा गठबंधन कामयाब रही।हालांकि इस बड़ी जीत के बाद नवनिर्वाचित विधायक रामदुलार से क्षेत्रवासियों की काफी अपेक्षाएं बंधी हैं।जिसमें दुद्धी को जिला बनाने,नगर के बाहर से बाईपास सड़क निकाले जाने,कनहर परियोजना को जल्द पूरा कराने, क्षेत्र को 24 घंटे विद्युतापूर्ति कराने, बेरोजगारों को रोजगार मुहैया कराने से लेकर विकास के तमाम मुद्दे हैं। फ़िलहाल जनपद के सभी नवनिर्वाचित विधायकों के सामने कड़ी चुनौती है।सभी लोग किस हद तक अपने वादों पर खरा उतरते हैं, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।



