Breaking News

बच्चों में छिपी अंतर्निहित शक्तियों को बाहर लाना एक बड़ी चुनौती :वर्षा जायसवाल

"नवाचार से नवपरिवर्तन की ओर" शिक्षकों में नई ऊर्जा का करेगी संचार- लेखिका की कलम से

दुद्धी,सोनभद्र : प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में वर्षों के अथक परिश्रम, कर्तव्यों एवं दायित्वों के प्रति अत्यधिक रुझान व समर्पण से मिली प्रेरणा ने शिक्षिका वर्षा रानी जायसवाल को लेखिका के रूप में एक नायाब पहचान दिलाई है। नवाचार से नवपरिवर्तन की ओर की लेखिका श्रीमती जायसवाल ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान किताब भेंट करते हुए कहा कि शिक्षण कार्य मेरे लिए एक चुनौती है, जो मुझे बच्चों में छिपी हुई अंतर्निर्मित शक्तियों को बाहर लाने के लिए प्रेरित करती है। इसके लिए मैंने नवाचार का प्रयोग शुरू किया।

बच्चों से आत्मिक संवाद स्थापित कर शिक्षण किया तो सीखना और सिखाना आनंददायक रुचिकर और सहज होने लगा। स्थापित करने के लिए मैं प्रयोग करती गई। बच्चे ही मेरे प्रेरणा के स्रोत रहे हैं। भावनाओं और शब्दों को विस्तार मिलाने से बच्चों के चेहरे पर आती हुई। खुशी मुझे कर्म करने की प्रेरणा देती है। आदिवासी बाहुल्य सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े लोगों को आधुनिकता की मुख्यधारा से जोड़ना एक एकमात्र ऐसी कड़ी है जो इनके सपनों को पंख लगाकर आधुनिकता एवं समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकती है।

मैंने अपनी पुस्तक शिक्षा में “नवाचार से नवपरिवर्तन की ओर” करने का प्रयास किया है। उन्होंने इसका श्रेय विद्यालय के सभी बच्चों, शिक्षकों, सहकर्मियों, अपने बच्चों एवं पति बालकृष्ण जायसवाल को देते हुए कहा कि एक टीम भावना के साथ कार्य करने से यह मुमकिन हो पाया है।उन्होंने विश्वास जताया कि शिक्षा में नवाचार से नवपरिवर्तन की ओर सभी शिक्षकों में नवीन ऊर्जा का संचार करेगी एवं बदलते हुए मेरे भारत की नींव को मजबूत बनाने में सार्थक सिद्ध होगी। जिससे बच्चों तथा समाज का भविष्य उज्जवल होगा।

ज्ञातव्य हो कि पिछले सप्ताह ही जनपद के सीडीओ, बीएसए समेत तमाम उच्चाधिकारियों ने पुस्तक का विमोचन कर, प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में इसे समय की मांग बताते हुए अन्य शिक्षकों में नवीन ऊर्जा का संचार करने वाला पुस्तक बताया था।

Related Articles

Back to top button