Breaking News

कुवैत ने भारत से मांगा 192 मीट्रिक टन गाय का गोबर : राधा मोहन सिंह

कानपुर । प्राकृतिक खेती देसी गाय के गोबर और गोमूत्र से की जाती है, जिसमें कृषि लागत शून्य होती है। कृषि उत्पाद गुणवत्ता युक्त प्राप्त होता है। शहरों में प्राकृतिक कृषि उत्पादों की मांग बढ़ती जा रही है। कुवैत ने भारत से अभी 192 मीट्रिक टन देसी गाय के गोबर की मांग की है क्योंकि कुवैत के कृषि वैज्ञानिकों ने पाया है कि खजूर की फसल में देसी गाय के गोबर के आशातीत परिणाम आ आ रहे हैं। यह बातें सांसद एवं पूर्व किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने सीएसए में कही।

चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) के प्रसार निदेशालय में सोमवार को कृषि विज्ञान केंद्र दलीपनगर द्वारा आयोजित एक दिवसीय कृषक-वैज्ञानिक संवाद एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा कि कृषि सीधे तौर पर मिट्टी से जुड़ी है तथा कृषकों की उन्नति मिट्टी पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा वर्ष 2015 में किसानों के लाभ हेतु राष्ट्रव्यापी मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना का शुभारंभ किया। किसानों से अपील करते हुए कहा कि कम से कम अपने पूरे परिवार के लिए प्राकृतिक खेती का शुभारंभ करें। जिससे परिवार के सदस्य स्वस्थ रह सकें।

कुलपति डॉ डीआर सिंह ने बताया कि प्राकृतिक खेती अपनाकर हम अपने स्वास्थ्य, मृदा स्वास्थ्य एवं पर्यावरण को सुरक्षित रख सकते हैं।क्योंकि प्राकृतिक खेती में देसी गाय के गोबर, गोमूत्र द्वारा जीवामृत, वीजामृत, घनजीवामृत आदि का निर्माण कर प्रयोग करते हैं जिसे मृदा की उर्वरा शक्ति के साथ ही सूक्ष्मजीवों की संख्या में बढ़ोतरी होती है। विशिष्ट अतिथि अतिथि कृषक समृद्धि आयोग उत्तर प्रदेश के सदस्य श्याम बिहारी गुप्ता ने भी प्राकृतिक खेती पर जोर दिया।(हि.स.)

BABA GANINATH BHAKT MANDAL  BABA GANINATH BHAKT MANDAL

Related Articles

Back to top button