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अर्थव्यवस्था बढ़ाने पर बल: वित्तमंत्री

इन महत्वपूर्ण संशोधनों के साथ वित्त विधेयक 2021 को मिली संसद के दोनों सदनों की मंजूरी

राज्यसभा ने बीते दिन वित्त विधेयक 2021-22 को चर्चा के बाद लोकसभा को लौटा दिया है और इसी के साथ संसद से आम बजट 2021 को मंजूरी मिलने की प्रक्रिया पूरी हो गयी है। लोकसभा में इस विधेयक को मंगलवार को ही मंजूरी दे दी थी। बीते दिन राज्य सभा में वित्त विधेयक पर चर्चा के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जवाब देते हुए कहा कि सीमा शुल्क ढांचे को तर्कसंगत बनाया जाएगा ताकि घरेलू कारोबारियों को, खासतौर से एमएसएमई श्रेणी के उद्यमों को सुविधा मिल सके। साथ ही कर आधार को भी व्यापक बनाया जाएगा।

अर्थव्यवस्था बढ़ाने पर बल: वित्तमंत्री

निर्मला सीतारमण ने कहा अर्थव्यवस्था को बढ़ाने के लिए कारोबार की सुगमता पर बल दिया गया है और इसके अनुपालन के लिए कई महत्वपूर्ण बदलाव भी किये गये हैं। इस क्रम में उत्पादन शुल्क में भी बदलाव किया गया है। वित्तमंत्री ने कहा, भारत की एक निवेश ग्रेड रेटिंग है और अच्छे निवेश के चलते उन्हें नहीं लगता कि यह घटेगी। उन्होंने कहा कि कर व्यवस्था में कुछ बदलाव किए गए हैं जिनका मकसद कारोबार करने की सुगमता को बढ़ाना है। साथ ही अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए उठाए गए कदमों का ही नतीजा है कि कोरोना संकट के दौरान आर्थिक मोर्चे पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा।

वित्त मंत्रालय का मामला नहीं जीएसटी

वित्त मंत्री ने जीएसटी को लेकर सदस्यों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि जीएसटी वित्त मंत्रालय का मामला नहीं है। जीएसटी में कोई भी फैसला जीएसटी परिषद करती है और वही इससे संबंधित बदलाव कर सकती है। परिषद में देश के सभी राज्यों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं और उन्हें ही बदलाव का अधिकार है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों को कम करने के लिए राज्य सरकारों को काउंसिल की बैठक में प्रस्ताव लेकर आना चाहिए।

विदेशी ई-कॉमर्स कंपनियों को राहत

सरकार ने वित्त विधेयक में संशोधन करके यह फैसला लिया है कि विदेशी ई-कॉमर्स कंपनियों की भारतीय शाखा के जरिए बेची गईं वस्तुओं, सेवाओं पर दो फीसदी का डिजिटल टैक्स नहीं लगेगा, ताकि उन्हें बराबरी का मौका मुहैया कराया जा सके। वित्त विधेयक 2021 में संशोधन करके यह स्पष्ट किया गया है कि विदेशी ई-कॉमर्स मंचों को दो प्रतिशत की समतुल्य उपकर का भुगतान नहीं करना पड़ेगा, यदि वे स्थाई रूप से यहां हैं या वे आयकर देते हैं। हालांकि, जो विदेशी कंपनी किसी तरह का टैक्स नहीं देती हैं, उन्हें इसका भुगतान करना होगा।

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