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इस वर्ष पैदा हुए बच्चों का ब्योरा जुटा रहीं फ्रंटलाइन वर्कर

नवम्बर से जनवरी तक छूटे बच्चों का कराया जायेगा टीकाकरण - दस्तक अभियान के तहत कोरोना और संचारी रोगों के बचाव के बारे में भी दी जा रही जानकारी

कुशीनगर । स्वास्थ्य विभाग इस साल पैदा हुए बच्चों का ब्योरा जुटा रहा है। इसकी जिम्मेदारी फ्रंटलाइन वर्कर ( ट्रिपल ए) को सौंपी गई है । अक्टूबर माह से बुखार के मरीजों की तलाश और दिमागी बुखार पर नियंत्रण के लिए संचारी रोग नियंत्रण माह और दस्तक अभियान भी चलाया जा रहा है। यह अभियान 31 अक्टूबर तक चलेगा। कोरोना काल में जो बच्चे टीकाकरण से वंचित रह गए, उनको भी चिन्हित करने के लिए अभियान के दौरान विशेष जोर दिया जा रहा है। इस वर्ष जन्म लेने वाले बच्चों का पूरा ब्योरा एकत्र हो जाने के बाद नवम्बर से जनवरी तक इन सभी बच्चों का टीकाकरण कराया जाएगा। अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.संजय गुप्ता ने बताया कि संचारी रोग नियंत्रण माह और दस्तक अभियान के तहत आशा और आगंनबाड़ी कार्यकर्ता कोविड-19 प्रोटोकॉल के तहत घर-घर जाकर लोगों को डेंगू, चिकनगुनिया, जेई,एईएस आदि संचारी रोगों के प्रति जागरूक कर रहीं हैं।

कोरोना के लक्षण वाले संभावित मरीजों की जानकारी जुटा रहीं हैं। वह लोग टीकाकरण से वंचित रह जाने वाले बच्चों की भी पूरी सूची तैयार कर रही हैं। डॉ.गुप्ता ने यह भी बताया कि नवजातों का टीकाकरण बहुत जरूरी है, इसकी बदौलत बच्चे कई गम्भीर बीमारियों से सुरक्षित रहते हैं। इसलिए अक्टूबर में टीकाकरण से वंचित बच्चों की पूरी जानकारी एकत्र होने के बाद नवम्बर से तीन महीनों तक अभियान चलाया जाएगा। इसमें सभी बच्चों का टीकाकरण सुनिश्चित कराया जाएगा। इस दौरान नियमित टीकाकरण से लेकर जरूरत के मुताबिक बूस्टर डोज भी दी जाएगी।

एसीएमओ ने यह भी बताया कि दस्तक अभियान के तहत आशा और एएनएम घर-घर जाकर बुखार और सांस की तकलीफ से पीड़ित लोगों की पहचान कर रहीं हैं। अभियान स्वास्थ्य विभाग, नगर विकास, पंचायती राज, पशुपालन विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, शिक्षा विभाग, दिव्यांग जन कल्याण विभाग, कृषि एवं सिंचाई विभाग के आपसी समन्वय से चल रहा है।
इस बीच आगामी त्यौहारों को देखते हुए गांव-गांव, नगर-नगर 10 से 16 अक्टूबर अक्तूबर तक विशेष सफाई अभियान भी चल रहा है, जिसमें साफ सफाई, जल निकासी, दवा छिड़काव, स्वच्छ पेयजल, कूड़ा निस्तारण, हाथ धोने के तौर तरीके, शौचालय का प्रयोग, कोरोना प्रोटोकॉल का पालन कराने पर विशेष जोर है।

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