दीपोत्सव में आकर्षण का केंद्र बना सरयू की रेत से तैयार दिव्य दरबार
अयोध्या दीपोत्सव 2026 में इस बार आस्था, कला और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। 220 टन बालू से 50 फीट लंबा और 20 फीट ऊंचा भव्य राम दरबार तैयार किया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र कुमार इसे साकार कर रहे हैं। दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका और लाओस की रामलीला टीमें अपनी प्रस्तुति देंगी। 12 मंचों पर करीब 2500 कलाकार रामकथा, लोकनृत्य और संगीत के जरिए रामनगरी को वैश्विक सांस्कृतिक पहचान देंगे।
अयोध्या: सीएम योगी के विजन के अनुरूप रामनगरी के दीपोत्सव में इस बार कला और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। अयोध्या के राम कथा पार्क के पास सरयू की रेत से तैयार दिव्य दरबार दीपोत्सव में आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना है।220 टन बालू से भगवान श्रीराम का यह भव्य दरबार साकार किया जा रहा है। रेत पर उकेरी जा रही यह विशाल कलाकृति दीपोत्सव में आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन रही है।
50 फीट लंबी और 20 फीट ऊंची इस कलाकृति में भव्य राम मंदिर के साथ प्रभु श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान की आकृतियां बनाई जा रही हैं। इसकी विशालता और कलात्मक बारीकियां इसे खास बना रही हैं। इस भव्य सैंड आर्ट को अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त बिहार के कलाकार मधुरेंद्र कुमार तैयार कर रहे हैं। वह अपने सहयोगियों के साथ इसके निर्माण कार्य में जुटे हैं। विशाल आकार में तैयार हो रहे राम दरबार के माध्यम से कलाकार अयोध्या की धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत को कलात्मक अभिव्यक्ति दे रहे हैं।
रेत पर उकेर रहे आस्था और संस्कृति की तस्वीर
220 टन बालू से तैयार हो रही यह कलाकृति अपनी भव्यता के साथ ही कलाकारों के कौशल का भी परिचय देगी। इसमें राम मंदिर की संरचना के साथ राम परिवार की आकृतियों को विशेष रूप से उकेरा जा रहा है। सैंड आर्ट के माध्यम से रामायण की भावभूमि और प्रभु श्रीराम के आदर्शों को लोगों के सामने प्रस्तुत करने का प्रयास किया जा रहा है। इस कलाकृति के जरिए विश्व शांति, प्रेम और आपसी सद्भाव का संदेश भी दिया जाएगा।कलाकृति की विशालता को देखते हुए इसके लिए विश्व रिकॉर्ड में स्थान बनाने के लिए आवेदन किया गया है। 50 फीट लंबी और 20 फीट ऊंची राम दरबार की यह रचना दीपोत्सव के दौरान देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण होगी।
35 हजार से अधिक कलाकृतियां बना चुके हैं मधुरेंद्र
सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र कुमार अपनी विशिष्ट कला के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुके हैं। उन्होंने बताया कि वे अब तक 35 हजार से अधिक कलाकृतियों का निर्माण कर चुके हैं। उनकी रचनाओं में केवल रेत ही नहीं, बल्कि राख, पत्तियां, पत्थर, धातु और फल-सब्जियों जैसी विभिन्न सामग्रियों का भी इस्तेमाल किया गया है। जर्मनी, जापान, रूस, अमेरिका, नेपाल और भूटान सहित कई देशों में वह अपनी कला का प्रदर्शन कर चुके हैं और अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त कर चुके हैं।
भगवान बुद्ध के जीवन पर बनाई थीं 50 रेत प्रतिमाएं
मधुरेंद्र कुमार को यूएन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी स्थान मिल चुका है। उन्होंने भगवान बुद्ध के जीवन पर आधारित 50 अलग-अलग रेत प्रतिमाओं का निर्माण किया था। उनकी कलाकृतियां सामाजिक और वैश्विक संदेशों को कला के माध्यम से प्रस्तुत करने के लिए जानी जाती हैं। अयोध्या में तैयार हो रहा राम दरबार भी इसी परंपरा की एक महत्वपूर्ण कड़ी है, जिसमें आस्था, भारतीय संस्कृति और विश्व बंधुत्व का संदेश समाहित है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्वागत में कमल, कलश और दीपों से सजा रामकथा पार्क का मार्ग
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप रामनगरी अपने दसवें दीपोत्सव को ऐतिहासिक और यादगार बनाने के लिए पूरी तरह सजकर तैयार हो रही है। आयोजन की भव्यता को आकर्षक स्वरूप देने में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ कलाकार और स्थानीय नागरिक भी जुटे हैं। इसी क्रम में रामकथा पार्क के समीप मुख्य सड़क और होटल सरयू यात्री निवास के सामने का पूरा क्षेत्र रंग-बिरंगी कलाकृतियों से सजाया जा रहा है। इसी मार्ग से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रामकथा पार्क स्थित मुख्य आयोजन स्थल में प्रवेश करेंगे। उनके स्वागत के लिए सड़क पर आकर्षक रंगोलियां उकेरी गई हैं, जो दीपोत्सव की सांस्कृतिक छटा को और निखार रही हैं। इन तस्वीरों में कमल का फूल, कलश और पारंपरिक दीपों की सुंदर कलाकृतियां सड़क पर सजीव हो रही हैं, जो उत्सव की भव्यता को दर्शाती हैं।
रंगोलियों में दिख रही भारतीय संस्कृति की झलक
मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर तैयार किए जा रहे इस मार्ग पर कलाकारों ने अपनी कल्पनाशीलता और हुनर का शानदार प्रदर्शन किया है। सड़क को पेंटिंग बनाकर उस पर विभिन्न धार्मिक एवं पारंपरिक आकृतियां बनाई जा रही हैं। कहीं मंगल कलश और स्वस्तिक के चिह्न भारतीय संस्कृति की झलक प्रस्तुत कर रहे हैं, तो कहीं विशाल कमल के फूल और दीपों की सुंदर आकृतियां लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं। रंगों के आकर्षक संयोजन से तैयार हो रही ये कलाकृतियां रामनगरी के उत्सवी वातावरण को खास बना रही हैं। कलाकार बारीकी से प्रत्येक आकृति को अंतिम रूप देने में जुटे हैं, ताकि मुख्यमंत्री के आगमन के समय पूरा मार्ग आकर्षक नजर आए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं दीपोत्सव की तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं। रामकथा पार्क के समीप सड़क पर उकेरी जा रही रंगोलियां भी इसी भव्य आयोजन का हिस्सा हैं। दीपों की जगमगाहट, पारंपरिक कलाकृतियों और आधुनिक तकनीक के समन्वय से दसवां दीपोत्सव रामनगरी की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर नई पहचान देने की तैयारी में है।
गिरमिटिया मजदूरों के वंशजों ने पीढ़ियों से संजोकर रखी रामकथा की परंपरा, अब अयोध्या में दिखाएंगे अपनी कला
रामनगरी अयोध्या के दसवें दीपोत्सव में दुनिया के अलग-अलग देशों की सांस्कृतिक विरासत और रामकथा की वैश्विक स्वीकार्यता की झलक देखने को मिलेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में आयोजित होने वाले इस दीपोत्सव में तीन देशों की चार रामलीला टीमें अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक शैलियों में भगवान श्रीराम की कथा का मंचन करने के लिए तैयार हैं। दक्षिण अफ्रीका की दो टीमों के अलावा श्रीलंका और लाओस के कलाकार रामलीला की प्रस्तुति देंगे। वहीं, देश-विदेश के लगभग 2500 कलाकार 12 मंचों पर अपनी कला और सांस्कृतिक परंपराओं से दर्शकों को परिचित कराएंगे।
इस बार दक्षिण अफ्रीका की रामलीला विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगी। वर्षों पहले गिरमिटिया मजदूर के रूप में भारत से दक्षिण अफ्रीका गए लोगों ने कठिन परिस्थितियों में भी अपनी संस्कृति, परंपराओं और रामकथा से जुड़ाव बनाए रखा। उन्होंने न केवल अपनी सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ियों तक पहुंचाया, बल्कि वहां के स्थानीय समाज को भी भारतीय परंपराओं और रामकथा से जोड़ा। लंबे समय तक अभ्यास और सांस्कृतिक साधना के बाद दक्षिण अफ्रीका के कलाकार अब अयोध्या पहुंचकर अपनी कला के माध्यम से रामलीला का मंचन करेंगे। यह प्रस्तुति भारतवंशियों के सांस्कृतिक जुड़ाव और रामकथा की सीमाओं से परे पहुंच को प्रदर्शित करेगी। एक टीम रामचरितमानस का गायन करेगी तो दूसरी टीम रामलीला का मंचन करेगी।
अलग-अलग देशों की संस्कृति और रामलीला शैली का दिखेगा संगम
दीपोत्सव में श्रीलंका और लाओस के कलाकार भी अपनी-अपनी सांस्कृतिक परंपराओं के अनुरूप रामलीला प्रस्तुत करेंगे। अलग-अलग देशों की भाषाओं, वेशभूषा, संगीत, नृत्य और अभिनय शैलियों में रामकथा का स्वरूप दर्शकों के लिए खास अनुभव होगा। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से यह देखने का अवसर मिलेगा कि भगवान श्रीराम की कथा ने विभिन्न देशों की लोकसंस्कृतियों में किस तरह अपनी जगह बनाई है। दक्षिण अफ्रीका की दो टीमों की भागीदारी इस अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक आयोजन को और विशिष्ट बनाएगी।
12 मंचों पर 2500 कलाकार बिखेरेंगे सांस्कृतिक छटा
संस्कृति विभाग की ओर से दीपोत्सव के लिए छह लघु, चार मध्यम और दो दीर्घ मंच तैयार कराए जा रहे हैं। कुल 12 मंचों पर लगभग 2500 भारतीय और विदेशी कलाकार अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। पांच राज्यों के कलाकार भी आयोजन में सहभागिता करेंगे। असम, बंगाल, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और केरल के कलाकार श्रीराम चरित्र एवं रामकथा पर आधारित लोकनृत्य, संगीत और अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे। राज्यों से आए कलाकार स्थानीय लोक संस्कृति में रामलीला का चित्रण करेंगे। इस प्रकार दीपोत्सव में देश के विभिन्न क्षेत्रों की लोककलाओं और अंतरराष्ट्रीय रामलीला परंपराओं का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।
अंतरराष्ट्रीय पहचान के साथ स्थानीय कलाकारों को भी मिलेगा अवसर
अयोध्या अंतरराष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान के सलाहकार एवं विशेष कार्याधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने बताया कि देश-विदेश के कलाकारों की भागीदारी से दीपोत्सव की सांस्कृतिक विविधता और आकर्षण बढ़ेगा। विभिन्न देशों की रामलीला और राज्यों की रामकथा आधारित प्रस्तुतियां आयोजन को व्यापक सांस्कृतिक मंच प्रदान करेंगी। लगभग 2500 कलाकारों की सहभागिता से रामनगरी में विविध संस्कृतियों का जीवंत स्वरूप दिखाई देगा। इससे स्थानीय कलाकारों को भी अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के अवसर मिलेगा। साथ ही, विदेशी कलाकारों की भागीदारी से अयोध्या की अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक पहचान और मजबूत होगी तथा पर्यटन से जुड़े कारोबारियों को लाभ मिलने की संभावना है।
धार्मिक पर्यटन के साथ सांस्कृतिक पर्यटन का वैश्विक केंद्र
राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या की पहचान धार्मिक पर्यटन के साथ सांस्कृतिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में भी तेजी से व्यापक हुई है। विभिन्न देशों की रामलीला के जरिए भगवान श्रीराम के आदर्शों, मर्यादा और जीवन दर्शन को अलग-अलग सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों में प्रस्तुत किया जाएगा।
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