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ऊर्जा से उद्योग तक मोदी सरकार का बड़ा दांव, 21,685 करोड़ की 3 योजनाओं को मंजूरी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ऊर्जा सुरक्षा, औद्योगिक आत्मनिर्भरता और सांख्यिकीय सुधारों से जुड़े तीन बड़े फैसलों को मंजूरी दी। 14,500 करोड़ रुपये की योजना से 92 गीगावॉट ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित होगी। लिथियम और निकेल प्रसंस्करण के लिए 2,814 करोड़ रुपये की सहायता मिलेगी। वहीं, 4,371.10 करोड़ रुपये की वीआईएसटीएआर योजना से राष्ट्रीय सांख्यिकीय व्यवस्था का आधुनिकीकरण, डिजिटल सर्वेक्षण, आर्थिक गणना और बेहतर नीतिगत निर्णय प्रक्रिया को मजबूती मिलेगी।

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश की ऊर्जा सुरक्षा, स्वदेशी औद्योगिक क्षमता और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को मजबूत करने के उद्देश्य से तीन महत्वपूर्ण योजनाओं को मंजूरी दी है। इन फैसलों के तहत वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक ग्रिड-स्तरीय ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के विकास के लिए 14,500 करोड़ रुपये, लिथियम और निकेल जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए 2,814 करोड़ रुपये तथा आधिकारिक सांख्यिकीय व्यवस्था के आधुनिकीकरण के लिए 4,371.10 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इन योजनाओं से नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग, घरेलू विनिर्माण, आयात निर्भरता में कमी, औद्योगिक विकास और सरकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन को गति मिलने की उम्मीद है।

92 गीगावॉट ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने की योजना

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ग्रिड-स्तरीय ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के विकास के लिए व्यवहार्यता अंतर वित्त पोषण (वीजीएफ) योजना को मंजूरी दी है। इसके अंतर्गत 14,500 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता से देश में वर्तमान में कमीशन नहीं हुई 92 गीगावॉट ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

यह नई क्षमता देश की मौजूदा ग्रिड-स्तरीय ऊर्जा भंडारण क्षमता के लगभग 170 प्रतिशत के बराबर होगी। योजना के माध्यम से वर्ष 2031-32 तक आवश्यक 411 गीगावॉट-घंटे की ऊर्जा भंडारण क्षमता हासिल करने में सहायता मिलेगी।

इस परियोजना के तहत कुल 97,600 करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश से तीन प्रमुख क्षेत्रों में क्षमता विकसित की जाएगी। इसमें 60 गीगावॉट हाइड्रो पंप स्टोरेज प्लांट, 30 गीगावॉट बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली और दो गीगावॉट उभरती ऊर्जा भंडारण प्रौद्योगिकियों की क्षमता शामिल है।

ऊर्जा भंडारण प्रणालियां बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। विशेष रूप से सौर और पवन ऊर्जा के उत्पादन में होने वाले उतार-चढ़ाव के दौरान संग्रहित बिजली का उपयोग किया जा सकेगा। इससे ग्रिड की स्थिरता बढ़ेगी और उपभोक्ताओं को 24 घंटे विश्वसनीय तथा किफायती बिजली उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

प्रतिस्पर्धी बोली से होगा परियोजनाओं का आवंटन

योजना के अंतर्गत ऊर्जा भंडारण क्षमता का आवंटन टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा। सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की बिजली वितरण कंपनियां बैटरी ऊर्जा भंडारण तथा हाइड्रो पंप स्टोरेज परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता प्राप्त करने की पात्र होंगी।

वैकल्पिक ऊर्जा भंडारण प्रौद्योगिकियों पर आधारित परियोजनाओं का क्रियान्वयन भी सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की संस्थाओं द्वारा किया जाएगा।

स्वदेशी विनिर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए बैटरी ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं में कम से कम 40 प्रतिशत घरेलू सामग्री का उपयोग अनिवार्य होगा। इससे भारतीय उद्योगों को नए अवसर मिलेंगे और आयातित घटकों पर निर्भरता कम करने में सहायता मिलेगी।

सरकार का मानना है कि इस पहल से ऊर्जा क्षेत्र का बुनियादी ढांचा मजबूत होगा, पारंपरिक बिजली उत्पादन पर निर्भरता घटेगी और आत्मनिर्भर भारत तथा विकसित भारत के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

लिथियम और निकेल प्रसंस्करण के लिए 2,814 करोड़ रुपये

देश में महत्वपूर्ण खनिजों के घरेलू प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पांच वर्ष की अवधि वाली पूंजीगत व्यय सहायता योजना को भी मंजूरी दी है। वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक लागू रहने वाली इस योजना के लिए 2,814 करोड़ रुपये का वित्तीय परिव्यय निर्धारित किया गया है।

इसका उद्देश्य भारत में लिथियम और निकेल के अयस्कों तथा मध्यवर्ती उत्पादों को उच्च शुद्धता वाले यौगिकों में परिवर्तित करने के लिए प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित करना है। निकेल प्रसंस्करण के दौरान कोबाल्ट भी उप-उत्पाद के रूप में प्राप्त होने की संभावना है।

वर्तमान में महत्वपूर्ण खनिजों का प्रसंस्करण वैश्विक स्तर पर कुछ चुनिंदा क्षेत्रों तक सीमित है। इसके कारण अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखलाएं भू-राजनीतिक परिस्थितियों, कीमतों में उतार-चढ़ाव और संभावित प्रतिबंधों से प्रभावित होती हैं। भारत में घरेलू प्रसंस्करण क्षमता सीमित होने के कारण उच्च शुद्धता वाली सामग्रियों और परिष्कृत मध्यवर्ती उत्पादों के लिए आयात पर निर्भरता बनी हुई है।

नई योजना के माध्यम से इस स्थिति में बदलाव लाने और देश के भीतर खनिज मूल्य श्रृंखला विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।

चार प्रसंस्करण संयंत्रों की स्थापना

योजना के अंतर्गत चार महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। इनमें दो लिथियम और दो निकेल प्रसंस्करण संयंत्र शामिल होंगे।

खनिज संयंत्रों की संख्या प्रत्येक संयंत्र की न्यूनतम क्षमता अधिकतम पूंजीगत सहायता
लिथियम 2 30,000 मीट्रिक टन 500 करोड़ रुपये
निकेल 2 50,000 मीट्रिक टन 900 करोड़ रुपये

पात्र निवेश पर 30 प्रतिशत पूंजीगत सब्सिडी प्रदान की जाएगी। लाभार्थियों का चयन दो चरणों में होगा। पहले चरण में तकनीकी पात्रता का मूल्यांकन किया जाएगा, जबकि दूसरे चरण में वित्तीय बोली के आधार पर चयन होगा।

प्रत्येक खनिज के लिए दो लाभार्थियों का चयन न्यूनतम पूंजीगत सहायता की मांग के आधार पर किया जाएगा। निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति से जुड़े तीन चरणों में प्रोत्साहन राशि वितरित की जाएगी।

इस योजना से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली, इलेक्ट्रॉनिकी, रक्षा और विशेष इस्पात जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को कच्चे माल की उपलब्धता में सहायता मिलेगी। साथ ही घरेलू उत्पादन, रोजगार के अवसर और औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

सांख्यिकीय व्यवस्था के आधुनिकीकरण के लिए 4,371.10 करोड़ रुपये

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने विकसित भारत पहल–सांख्यिकीय परिवर्तन, विश्लेषण एवं अनुसंधान (वीआईएसटीएआर) योजना को भी मंजूरी दी है। वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक लागू रहने वाली इस योजना के लिए 4,371.10 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं।

इसका प्रमुख उद्देश्य देश की आधिकारिक सांख्यिकीय व्यवस्था को आधुनिक, समयबद्ध, तकनीक आधारित और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना है। इसके माध्यम से आंकड़ों की उपलब्धता में तेजी, विस्तृत वर्गीकरण, विभिन्न प्रणालियों के बीच समन्वय और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के अनुकूल आंकड़ा समूहों को बढ़ावा दिया जाएगा।

योजना के तहत सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की सांख्यिकीय और आंकड़ा प्रबंधन संबंधी गतिविधियों को व्यापक रूप से मजबूत किया जाएगा। इससे सरकारी नीतियों के निर्माण, संसाधनों के आवंटन और योजनाओं के क्रियान्वयन में आंकड़ों की भूमिका अधिक प्रभावी हो सकेगी।

तीन प्रमुख घटकों पर होगा काम

वीआईएसटीएआर योजना को तीन प्रमुख घटकों में विभाजित किया गया है।

  1. व्यापक सांख्यिकीय संचालन एवं पारितंत्र का सुदृढ़ीकरण।

  2. सांख्यिकीय सुदृढ़ीकरण के लिए सहायता।

  3. आर्थिक गणना।

व्यापक सांख्यिकीय संचालन के अंतर्गत मंत्रालय 16वें वित्त आयोग की अवधि में 59 सर्वेक्षण आयोजित करने का प्रस्ताव रखता है। इससे पहले 43 प्रमुख सर्वेक्षण आयोजित किए गए थे।

इन सर्वेक्षणों के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में आंकड़ों की कमियों को दूर करने और नीतिगत निर्णयों के लिए अधिक विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।

मंत्रालय आंकड़ा संग्रहण से लेकर प्रसंस्करण, सत्यापन और प्रसार तक की प्रक्रियाओं के पूर्ण डिजिटलीकरण पर ध्यान देगा। नियमित कार्यप्रणालियों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग का उपयोग बढ़ाया जाएगा।

इसके अतिरिक्त सेवाओं के उत्पादन का प्रमुख सूचकांक और असंगठित क्षेत्र के उद्यमों का सूचकांक जैसे नए सांख्यिकीय मापदंड जारी करने की योजना है।

वैकल्पिक आंकड़ों और डिजिटल तकनीक का उपयोग

नई सांख्यिकीय व्यवस्था में मोबाइल फोन, स्कैनर और ई-कॉमर्स जैसे वैकल्पिक आंकड़ा स्रोतों को भी शामिल किया जाएगा। इससे पारंपरिक सर्वेक्षणों को पूरक जानकारी मिलेगी, आंकड़ों की कमियां दूर होंगी और उत्तरदाताओं पर अनावश्यक बोझ घटेगा।

विभिन्न सरकारी विभागों के बीच आंकड़ों के अलग-अलग संग्रहण और प्रबंधन की व्यवस्था को बेहतर समन्वय के माध्यम से सुव्यवस्थित किया जाएगा। आंकड़ों के आदान-प्रदान, मशीन द्वारा पढ़े जा सकने वाले प्रारूप और प्रारंभिक स्तर से ही गोपनीयता सुनिश्चित करने पर भी ध्यान दिया जाएगा।

योजना के अंतर्गत विद्यार्थियों के लिए इंटर्नशिप और शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थानों के प्रस्तावों के माध्यम से युवाओं तथा शोधकर्ताओं की क्षमता विकसित करने के अवसर भी उपलब्ध कराए जाएंगे।

राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को मिलेगी वित्तीय सहायता

वीआईएसटीएआर योजना के सांख्यिकीय सुदृढ़ीकरण घटक के अंतर्गत राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को उनकी सांख्यिकीय क्षमताओं में सुधार के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी।

इसका उद्देश्य जिला और छोटे भौगोलिक क्षेत्रों तक उच्च गुणवत्ता वाले विस्तृत आंकड़े तैयार करने की क्षमता विकसित करना है। इससे स्थानीय स्तर पर योजनाओं के निर्माण और संसाधनों के बेहतर उपयोग में मदद मिलेगी।

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय प्रमुख राष्ट्रीय सर्वेक्षणों के जिला स्तर पर अनुमान तैयार करने के लिए तकनीकी सहायता प्रदान करेगा। इसमें आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण, घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण और असंगठित क्षेत्र के उद्यमों के वार्षिक सर्वेक्षण शामिल हैं।

दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के स्तर पर भी अनुमान तैयार करने की प्रक्रिया को व्यापक बनाया जाएगा। इसके अतिरिक्त राज्य एवं जिला स्तर पर सकल घरेलू उत्पाद और राज्य स्तर पर औद्योगिक उत्पादन सूचकांक के संकलन में सहायता दी जाएगी।

आठवीं आर्थिक गणना से गांव और वार्ड स्तर तक जुटेंगे आंकड़े

योजना के आर्थिक गणना घटक के अंतर्गत राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के सहयोग से आठवीं आर्थिक गणना आयोजित की जाएगी।

इसके माध्यम से देश के सभी गैर-कृषि प्रतिष्ठानों, उनमें नियोजित कर्मचारियों और उनकी आर्थिक गतिविधियों से संबंधित विस्तृत आंकड़े एकत्र किए जाएंगे। जानकारी ग्राम पंचायत और वार्ड स्तर तक उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।

आर्थिक गणना से असंगठित क्षेत्र की वास्तविक स्थिति का आकलन करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा राष्ट्रीय सांख्यिकीय व्यवसाय रजिस्टर विकसित करने के लिए आधारभूत आंकड़े उपलब्ध होंगे।

इन जानकारियों के आधार पर लक्षित उद्यम सर्वेक्षण, आवश्यक नीतिगत हस्तक्षेप और आर्थिक गतिविधियों के बेहतर विश्लेषण को संभव बनाया जा सकेगा। इससे राष्ट्रीय और उप-राष्ट्रीय स्तर पर योजनाकारों तथा नीति निर्माताओं को अधिक सटीक जानकारी मिलेगी और सकल घरेलू उत्पाद में असंगठित क्षेत्र के योगदान का अनुमान लगाने में सहायता होगी।

ऊर्जा सुरक्षा, औद्योगिक आत्मनिर्भरता और बेहतर शासन पर जोर

केंद्रीय मंत्रिमंडल के इन तीन फैसलों का व्यापक उद्देश्य देश की आर्थिक और तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करना है। ऊर्जा भंडारण योजना बिजली आपूर्ति को अधिक विश्वसनीय बनाने और नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग में वृद्धि करने पर केंद्रित है।

महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण योजना घरेलू उद्योगों को आवश्यक कच्चे माल की उपलब्धता बढ़ाने, आयात निर्भरता घटाने और उच्च मूल्य वाले उत्पादों के निर्माण को प्रोत्साहित करेगी।

वहीं वीआईएसटीएआर योजना सरकारी निर्णय प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के लिए समयबद्ध, विस्तृत और तकनीक आधारित आंकड़े उपलब्ध कराने की दिशा में काम करेगी।

इन पहलों के माध्यम से सरकार ने ऊर्जा क्षेत्र के बुनियादी ढांचे, महत्वपूर्ण औद्योगिक संसाधनों और राष्ट्रीय सांख्यिकीय व्यवस्था को एक साथ मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

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