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अयोध्या से चित्रकूट तक गूंजे रामायण के स्वर, लखनऊ में महर्षि वाल्मीकि की प्रतिमा स्थापित

उत्तर प्रदेश में महर्षि वाल्मीकि जयंती श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश के सभी 75 जिलों में महर्षि वाल्मीकि मंदिरों और रामायण से जुड़े प्रमुख स्थलों पर दीपदान, रामायण पाठ, भजन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। अयोध्या, चित्रकूट, मेरठ और अलीगढ़ में विशेष आयोजन हुए। लखनऊ के गोमती तट स्थित वाल्मीकि वाटिका में महर्षि वाल्मीकि की प्रतिमा स्थापित की गई। सरकार ने रामायण की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

लखनऊ : महर्षि वाल्मीकि की जयंती पर सोमवार को उत्तर प्रदेश में आस्था, भक्ति और सांस्कृतिक विरासत का व्यापक उत्सव देखने को मिला। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश के सभी 75 जिलों में महर्षि वाल्मीकि मंदिरों और रामायण से जुड़े प्रमुख स्थलों पर दीपदान, रामायण पाठ, भजन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।

इन आयोजनों में रामायण के आदर्शों, मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक समरसता और भारतीय जीवन मूल्यों को केंद्र में रखा गया। चित्रकूट की लालापुर तपोस्थली से लेकर अयोध्या के श्रीमद् वाल्मीकि रामायण भवन तक धार्मिक अनुष्ठानों के जरिए महर्षि वाल्मीकि की साहित्यिक और आध्यात्मिक विरासत को याद किया गया।

अयोध्या में पूजन और सुंदरकांड पाठ, लालापुर में भजन संध्या
अयोध्या स्थित श्रीमद् वाल्मीकि रामायण भवन में संस्कृति विभाग और जिला प्रशासन की ओर से आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत सुबह आठ बजे महर्षि वाल्मीकि के विधि-विधान से पूजन के साथ हुई। इसके बाद वाल्मीकि रामायण के सुंदरकांड का पाठ किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आयोजित अनुष्ठान में संत-महात्माओं और विद्यार्थियों ने भाग लिया। वहीं, चित्रकूट स्थित महर्षि वाल्मीकि की तपोस्थली लालापुर में जिला प्रशासन की ओर से वृहद आयोजन हुआ, जिसमें वाल्मीकि रामायण पाठ, भजन संध्या और स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुतियां शामिल रहीं। इसके अलावा गोस्वामी तुलसीदास की जन्मस्थली राजापुर, चित्रकूट में रामायण पाठ किया गया।

इसके साथ ही मेरठ के कैंट क्षेत्र स्थित रजबन वाल्मीकि मंदिर में महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर जिलाधिकारी डॉ. वीके सिंह और मुख्य विकास अधिकारी नूपुर गोयल ने अखंड रामायण पाठ का शुभारंभ किया। वहीं, अलीगढ़ में भी जयंती श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर शहर में शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें लोगों ने भाग लेकर महर्षि वाल्मीकि के प्रति अपनी आस्था प्रकट की।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि महर्षि वाल्मीकि की रामायण केवल एक महाकाव्य नहीं, बल्कि भारतीय साहित्य, संस्कृति और जीवन मूल्यों की अमूल्य धरोहर है। उत्तर प्रदेश में महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर 75 जिलों में आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से इस विरासत को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है। रामायण से जुड़े करीब 280 स्थलों की धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता को सामने लाने के साथ ही दीपदान, अखंड रामायण पाठ, भजन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध परंपरा से जोड़ने की पहल की गई है।

आयोजनों को व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए जिला, तहसील और विकासखंड स्तर पर समितियां गठित की गईं। जिलाधिकारियों की अध्यक्षता वाली जिला समितियों ने कार्यक्रम स्थलों और कलाकारों के चयन की जिम्मेदारी संभाली। संस्कृति विभाग, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग और जिला पर्यटन एवं संस्कृति परिषद के बीच समन्वय स्थापित किया गया। स्थानीय जनप्रतिनिधियों को कार्यक्रमों में आमंत्रित करने और आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। जिला प्रशासन को आयोजन स्थलों पर साफ-सफाई, पेयजल, सुरक्षा, ध्वनि और प्रकाश की व्यवस्था समय से पूरी करने के निर्देश दिए गए। लगातार रामायण पाठ के लिए ग्रंथ की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ गायक कलाकारों और भजन मंडलियों को पहले से सूचना देने की व्यवस्था भी की गई।

पोर्टल पर दर्ज हुई मंदिरों और कलाकारों की जानकारी

कार्यक्रमों के बेहतर प्रबंधन के लिए मंदिरों और आयोजन स्थलों के नाम-पते, तस्वीरें, जीपीएस लोकेशन और मंदिर प्रबंधकों के संपर्क विवरण संस्कृति विभाग के पोर्टल पर उपलब्ध कराए गए। चयनित कलाकारों और भजन गायकों के नाम, पते और मोबाइल नंबर भी पोर्टल पर दर्ज किए गए, ताकि आयोजन और समन्वय में आसानी हो। मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि कलाकारों के मानदेय के भुगतान के लिए प्रत्येक जिले को एक-एक लाख रुपये उपलब्ध कराए गए। इसके लिए कुल 75 लाख रुपये जिला पर्यटन एवं संस्कृति परिषदों को दिए गए।

रामायण के संदेश को जनभागीदारी से आगे बढ़ाने पर जोर

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने बताया कि, प्रदेशभर में हुए आयोजनों का उद्देश्य महर्षि वाल्मीकि के योगदान को सम्मान देने के साथ रामायण में निहित आदर्शों और सामाजिक मूल्यों को लोगों तक पहुंचाना रहा। दीपदान, रामायण पाठ और भजन कार्यक्रमों ने धार्मिक स्थलों को भक्तिमय बनाया, वहीं स्थानीय कलाकारों की भागीदारी ने सांस्कृतिक परंपराओं को मंच दिया। उन्होंने बताया सरकार की पहल के तहत प्रशासनिक समन्वय, कलाकारों को मानदेय और आयोजन स्थलों की जानकारी एकत्र करने जैसी व्यवस्थाओं पर भी ध्यान दिया गया। इन कार्यक्रमों के जरिए रामायण की विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने और प्रदेश की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान को व्यापक स्तर पर सामने लाने का प्रयास किया गया।

योगी सरकार में महर्षि वाल्मीकि के आदर्शों का सम्मान, लखनऊ में गोमती तट पर स्थापित हुई प्रतिमा

महर्षि वाल्मीकि के आदर्शों, शिक्षाओं और महान योगदान को जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में लखनऊ में महत्वपूर्ण पहल की गई। महर्षि वाल्मीकि प्रकटोत्सव एवं शोभायात्रा आयोजन समिति के तत्वावधान में सोमवार को गोमती तट स्थित वाल्मीकि वाटिका, प्रेरणा स्थल पर भगवान महर्षि वाल्मीकि की प्रतिमा स्थापित की गई। महापौर सुषमा खर्कवाल ने फीता काटकर प्रतिमा का विधिवत उद्घाटन किया।

इस अवसर पर समाज के लोगों ने महर्षि वाल्मीकि के आदर्शों पर चलने और सामाजिक एकता को मजबूत करने का संकल्प लिया। समिति के अध्यक्ष चौधरी बृजेश पुजारी ने कहा कि प्रतिमा स्थापना वाल्मीकि समाज के लिए गौरवपूर्ण है।

कार्यक्रम में पार्षद प्रमोद सिंह राजन, निशातगंज वार्ड के पार्षद, नगर निगम कर्मचारी संघ के अध्यक्ष आनंद वर्मा समेत समाज के तमाम लोग उपस्थित रहे। संस्था के संरक्षक एवं उत्तर प्रदेश राज्य सफाई कर्मचारी आयोग के पूर्व सदस्य श्याम लाल वाल्मीकि, प्रमोद हंस और दिनेश वाल्मीकि ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।

महापुरुषों के सम्मान और सांस्कृतिक विरासत पर जोर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में महापुरुषों की जयंती और प्रकटोत्सव के आयोजनों के माध्यम से उनकी विरासत को सम्मान देने तथा सामाजिक सद्भाव को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया जा रहा है। महर्षि वाल्मीकि भारतीय संस्कृति और साहित्य के महान ऋषि हैं। रामायण की रचना के लिए विख्यात महर्षि वाल्मीकि के विचार आज भी समाज को सत्य, मर्यादा और नैतिक मूल्यों की प्रेरणा देते हैं।

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