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आईडीबीआई बैंक विनिवेश को मंजूरी, दिव्यांग पेंशन में राहत और रेल कर्मचारियों को बोनस

केंद्र सरकार ने आईडीबीआई बैंक के रणनीतिक विनिवेश को मंजूरी दे दी है। 52,878 करोड़ रुपये के इस सौदे के तहत सरकार और एलआईसी की 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बेची जाएगी। राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम को पांच साल के लिए बढ़ाया गया है। दिव्यांग पेंशन के लिए न्यूनतम दिव्यांगता सीमा 80 से घटाकर 40 प्रतिशत और न्यूनतम आयु सीमा समाप्त करने का निर्णय लिया गया है। वहीं, 11.40 लाख रेल कर्मचारियों को 78 दिनों का उत्पादकता-आधारित बोनस मिलेगा।

नयी दिल्ली : आईडीबीआई बैंक लिमिटेड भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) द्वारा विनियमित एक अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक है। बैंक की खराब वित्तीय स्थिति के कारण उसमें बार-बार पूंजी डालने की आवश्यकता पड़ी। शुरुआत में भारत सरकार ने पूंजी उपलब्ध कराई और बाद में भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) ने यह सहायता प्रदान की। 5 मई, 2017 को भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने बैंक की गैर-निष्पादित आस्तियों और उसे हुए घाटे को देखते हुए आईडीबीआई बैंक को त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई ढाँचे के अंतर्गत रखा और उस पर कई प्रतिबंध लगाए। बैंक की वित्तीय स्थिति में सुधार पर विचार करने के बाद, आरबीआई ने अपने पत्र, दिनांकित 10 मार्च, 2021, के माध्यम से कुछ शर्तों और निरंतर निगरानी के अधीन आईडीबीआई बैंक पर लगाए गए प्रतिबंध हटा दिए।

इसी पृष्ठभूमि में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने आईडीबीआई बैंक लिमिटेड के रणनीतिक पुनर्गठन को मंजूरी दी। इसके अनुपालन में, यह निर्णय लिया गया कि आईडीबीआई बैंक लिमिटेड में कुल 60.72% इक्विटी हिस्सेदारी एक रणनीतिक खरीदार को बेची जाएगी। इसमें भारत सरकार की 30.48% हिस्सेदारी और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की 30.24% हिस्सेदारी शामिल होगी। इसके बाद, भारत सरकार के पास 15% और एलआईसी के पास 19% हिस्सेदारी शेष रहेगी।सीसीईए के निर्णय को दो चरणों वाली प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से लागू किया गया। इस प्रक्रिया को बहुस्तरीय सामूहिक निर्णय-निर्माण तंत्र का समर्थन प्राप्त था, जिसमें अंतर-मंत्रालयी समूह (आईएमजी), विनिवेश संबंधी सचिवों का मुख्य समूह (सीजीडी) और सशक्त कैबिनेट मंत्रियों के समूह से युक्त वैकल्पिक तंत्र (एएम) शामिल थे।

सभी इच्छुक पक्षों से रुचि की अभिव्यक्ति (ईओआई) आमंत्रित करने के लिए प्रारंभिक सूचना ज्ञापन (पीआईएम) 07.10.2022 को जारी किया गया। बोली प्रक्रिया के चरण में केवल वे पक्ष भाग ले सकते थे, जिन्हें भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) द्वारा ‘उपयुक्त एवं उचित’ पाया गया था और जिन्हें गृह मंत्रालय (एमएचए) से सुरक्षा संबंधी मंजूरी प्राप्त थी। इसके लिए, पात्र इच्छुक पक्षों (क्यूआईपी) से तकनीकी और वित्तीय बोलियाँ आमंत्रित करने हेतु प्रस्ताव आमंत्रण अनुरोध जारी किया गया। शुरुआत में रुचि की अभिव्यक्ति प्रस्तुत करने वाले पाँच पक्षों में से चार पक्ष निर्धारित पात्रता मानदंडों और उसमें निर्धारित अयोग्यता संबंधी शर्तों के अनुसार योग्य पाए गए। इनमें से अंततः दो पक्षों ने तकनीकी-वित्तीय बोलियाँ प्रस्तुत कीं और इस लेन-देन के लिए योग्य बोलीदाता (क्यूबी) बने।

विनिवेश संबंधी सचिवों के मुख्य समूह (सीजीडी) द्वारा व्यापक मूल्यांकन किए जाने और वैकल्पिक तंत्र की सिफारिशों पर विचार करने के बाद, आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने 14/10/2026 को आयोजित अपनी बैठक में इस लेन-देन के लिए मेसर्स 10955230 कनाडा इंक. (मूल इकाई मेसर्स फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स लिमिटेड) को रणनीतिक खरीदार के रूप में मंजूरी दी। आईडीबीआई बैंक लिमिटेड में 60.72% हिस्सेदारी के अधिग्रहण के लिए क्रय मूल्‍य 52,878.0806181 करोड़ रुपये (शब्दों में: केवल बावन हजार आठ सौ अठहत्तर करोड़ आठ लाख छह हजार एक सौ इक्यासी रुपये) निर्धारित किया गया है। इसमें भारत सरकार के पास मौजूद 30.48% इक्विटी शेयरधारिता और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के पास मौजूद 30.24% इक्विटी शेयरधारिता शामिल है।

इस प्रकार के लेन-देन में बोली लगाने के लिए पहले से कोई निर्धारित मानदंड नहीं होता। बोलीदाता स्वयं मूल्यांकन करते हैं और अपनी बोलियाँ गोपनीय तरीके से सीलबंद लिफाफों में प्रस्तुत करते हैं। उद्यम का निष्पक्ष मूल्यांकन करने के लिए स्वतंत्र एजेंसियों को नियुक्त किया जाता है, जो उसी समय मूल्यांकन करती हैं। इसके बाद, प्रस्तुत बोलियों की उचितता का आकलन करने के लिए इस मूल्यांकन को तुलनात्मक आधार के रूप में उपयोग किया जाता है।

इस लेन-देन के अंतर्गत, प्रारंभिक बोलियाँ वित्त वर्ष 2025-26 में आमंत्रित की गई थीं। तुलना के लिए, उस समय प्रति शेयर 94.42 रुपये का आरक्षित मूल्य निर्धारित किया गया था, जो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बाजार मूल्य पर पड़े प्रभाव से प्रभावित था। उस समय प्रभाव-रहित काल्पनिक मूल्य का पता नहीं चल पाया था।

हालांकि, 07.10.2022 को प्रारंभिक सूचना ज्ञापन/रुचि की अभिव्यक्ति (पीआईएम/ईओआई) जारी किए जाने से पहले अंतिम कारोबारी दिन आईडीबीआई के शेयर का प्रभाव-रहित मूल्य 42.40 रुपये प्रति शेयर था। इसके विपरीत, 08.01.2026 को प्रारंभिक बोलियाँ आमंत्रित किए जाने से पहले अंतिम कारोबारी दिन शेयर का प्रभावग्रस्त मूल्य 108.12 रुपये प्रति शेयर था। प्रारंभिक बोलियाँ उस समय निर्धारित आरक्षित मूल्य से कम थीं और उन्हें मंजूरी नहीं दी गई। जब यह स्पष्ट हो गया कि प्रारंभिक बोलियाँ सफल नहीं हुई हैं, तो शेयर का प्रभावग्रस्त बाजार मूल्य स्वयं ही समायोजित हो गया और खोजे गए 75 रुपये प्रति शेयर के बोली मूल्य से काफी नीचे गिर गया।

इसके बाद, सामूहिक निर्णय-निर्माण तंत्र को प्रत्यायोजित और प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए तथा लेन-देन का मूल्य यथासंभव बढ़ाने के उद्देश्य से, वित्त वर्ष 2026-27 में योग्य बोलीदाताओं से उनके सर्वोत्तम प्रस्तावों को दर्शाने वाली सीलबंद बोलियाँ आमंत्रित की गईं। 18.05.2026 को सर्वोत्तम प्रस्ताव संबंधी बोलियाँ आमंत्रित किए जाने से पहले अंतिम कारोबारी दिन आईडीबीआई बैंक के शेयर का मूल्य 70.38 रुपये प्रति शेयर था।

कम कारोबार वाले आईडीबीआई बैंक के शेयर का बाजार मूल्य अस्थिर बना रहा और मूल्यांकन अवधि के दौरान प्रति शेयर 118.38 रुपये के उच्चतम स्तर से लेकर 61.01 रुपये के न्यूनतम स्तर तक उतार-चढ़ाव के साथ, बोली से प्राप्त मूल्य से ऊपर और नीचे दोनों स्तरों पर बना रहा। परिणामस्वरूप, शेयर के बाजार मूल्य को मूल्यांकन के लिए आधार नहीं बनाया गया, क्योंकि इससे उद्यम का मूल्यांकन उसके अंतर्निहित मूल्य से असंगत हो सकता था। इसके बजाय, इस समस्या का समाधान करने वाली बाजार गुणक पद्धति के माध्यम से सापेक्ष मूल्यांकन का उपयोग किया गया।

इसके अंतर्गत, 31 मार्च, 2026 को सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के समापन लेखों के आधार पर उद्यम का उचित बाजार मूल्य निर्धारित किया गया। इसके अतिरिक्त, परिसंपत्ति मूल्यांकन पद्धति का उपयोग भी किया गया, जिसमें देनदारियों के साथ-साथ भूमि और संपत्तियों सहित मूर्त एवं अमूर्त परिसंपत्तियों पर विचार किया जाता है। इस पद्धति के अंतर्गत, आईडीबीआई बैंक लिमिटेड के 31 मार्च, 2026 के लेखापरीक्षित खातों के अनुसार उद्यम का उचित शुद्ध परिसंपत्ति मूल्य निर्धारित किया गया।

तदनुसार, ऊपर बताई गई दो स्वतंत्र पद्धतियों का उपयोग करते हुए दो पेशेवर मूल्यांकन एजेंसियों द्वारा उद्यम का उचित मूल्यांकन किया गया। इन मूल्यांकनों का औसत 75.99 रुपये प्रति शेयर था, जिसे योग्य बोलियों के मूल्यांकन के लिए मानक मूल्य के रूप में निर्धारित किया गया। चूँकि सफल बोलीदाता द्वारा प्रस्तुत 81 रुपये प्रति शेयर की सर्वोत्तम प्रस्ताव वाली बोली मानक मूल्य के साथ-साथ दोनों स्वतंत्र मूल्यांकन एजेंसियों द्वारा अनुमानित उचित मूल्य से भी अधिक थी, इसलिए इसे उचित माना गया और मंजूरी दी गई।

सफल बोलीदाता को रुचि की अभिव्यक्ति (ईओआई) के चरण में किए गए उपयुक्तता एवं औचित्य संबंधी आकलन के अनुरूप भारतीय रिज़र्व बैंक के समक्ष अपने प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने होंगे और उसमें निर्धारित विनियामक शर्तों के अनुपालन के लिए अपना रोडमैप प्रस्तुत करना होगा। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद, यह हमारी अर्थव्यवस्था के वित्तीय क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) होगा।

सीसीईए ने मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार खुले बाजार के माध्यम से भारत सरकार की शेष हिस्सेदारी (आईडीबीआई बैंक लिमिटेड की कुल शेयरधारिता का 15%) की अल्पांश हिस्सेदारी की बिक्री करने के लिए वैकल्पिक तंत्र को शक्तियाँ भी प्रत्यायोजित की हैं। एलआईसी अपने नियामकों के निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करते हुए, अपनी आंतरिक प्रक्रियाओं के अनुसार अपनी शेष हिस्सेदारी का प्रबंधन करने के लिए स्वतंत्र होगी।

राष्ट्रीय सामाजिक सहायता योजना पांच साल के लिए बढ़ायी गयी, दिव्यांग पेंशन के लिए न्यूनतम उम्र की सीमा समाप्त

सरकार ने राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम का नाम बदलकर ‘प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना’ करने के साथ ही दिव्यांगजन पेंशन के लिए दिव्यांगता पात्रता की सीमा 80 से घटाकर विकलांगता 40 प्रतिशत तथा न्यूनतम उम्र की सीमा समाप्त कर दी है।सूचना प्रसारण मंत्री अश्वनी वैष्णव ने बुधवार को यहां संवाददाता सम्मेलन में बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने परिवर्तित नाम से प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता कार्यक्रम (एनएसएपी) को वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्षों के लिए जारी रखने की मंजूरी दे दी है। इस योजना पर कुल 53,428 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस फैसले से देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 3.20 करोड़ लाभार्थियों को फायदा मिलेगा।

उन्होंने कहा कि सरकार ने राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम का नाम बदलकर ‘प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना’ करने का निर्णय लिया है। इसी तरह, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना का नाम ‘प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना’, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना का नाम ‘प्रधानमंत्री विधवा पेंशन योजना’ और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांगता पेंशन योजना का नाम ‘प्रधानमंत्री दिव्यांगजन पेंशन योजना’ कर दिया गया है। राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना को अब ‘प्रधानमंत्री पारिवार लाभ योजना’ के नाम से जाना जाएगा। इन बदलावों के माध्यम से केंद्र सरकार की सामाजिक सहायता योजनाओं को नए नामों के साथ जारी रखा जाएगा।

कैबिनेट के फैसले के तहत दिव्यांगजन पेंशन की सहायता राशि में भी बदलाव किया गया है। अब 0 से 79 वर्ष आयु वर्ग के पात्र दिव्यांगजनों को 375 रुपये और 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के लाभार्थियों को 625 रुपये की सहायता दी जाएगी। इसके साथ ही, पेंशन के लिए बेंचमार्क दिव्यांगता की न्यूनतम सीमा मौजूदा 80 प्रतिशत से घटाकर 40 प्रतिशत कर दी गई है। अब दिव्यांगजन पेंशन के लिए न्यूनतम आयु की शर्त भी जन्म से लागू होगी। इन बदलावों का उद्देश्य अधिक दिव्यांगजनों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना और पात्रता संबंधी शर्तों को दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुरूप बनाना है।

उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन पेंशन की पात्रता, लाभार्थियों की संख्या और सहायता राशि में किए गए बदलावों को लागू करने के लिए तीन महीने के भीतर दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। वृद्धावस्था और विधवा पेंशन तथा परिवार लाभ योजना पहले की व्यवस्था के अनुसार चलती रहेंगी। राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम की शुरुआत 15 अगस्त, 1995 को गरीब परिवारों को आर्थिक सहायता देने के उद्देश्य से की गई थी। यह योजना संविधान के अनुच्छेद 41 में निहित राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों के अनुरूप सामाजिक सहायता उपलब्ध कराने की केंद्र सरकार की जिम्मेदारी से जुड़ी है। इसके तहत केंद्र सरकार शत-प्रतिशत वित्तीय सहायता देती है, ताकि देशभर में पात्र लाभार्थियों को सामाजिक सुरक्षा सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने रेल कर्मचारियों के लिए 78 दिनों के उत्पादकता-आधारित बोनस (पीएलबी) को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने रेल कर्मचारियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए 11,40,770 रेल कर्मचारियों को 78 दिनों के लिए 2009.61 करोड़ रुपये के पीएलबी के भुगतान को मंजूरी दे दी है। पात्र रेल कर्मचारियों को पीएलबी का भुगतान प्रत्येक वर्ष दुर्गा पूजा/दशहरा की छुट्टियों से पहले किया जाता है। इस वर्ष भी, लगभग 11.40 लाख गैर-राजपत्रित रेल कर्मचारियों को 78 दिनों के वेतन के बराबर पीएलबी राशि का भुगतान किया जा रहा है।

पीएलबी रेल कर्मचारियों को रेलवे के प्रदर्शन में सुधार के लिए प्रेरित करने वाले प्रोत्साहन के रूप में कार्य करता है। पात्र रेल कर्मचारियों को अधिकतम 78 दिनों के लिए 17,951 रुपये का भुगतान किया जाएगा। यह राशि रेल कर्मचारियों की विभिन्न श्रेणियों जैसे ट्रैक मेंटेनेंस कर्मी, लोको पायलट, ट्रेन मैनेजर (गार्ड), स्टेशन मास्टर, सुपरवाइजर, तकनीशियन, तकनीशियन सहायक, पॉइंट्समैन, मिनिस्ट्रियल स्टाफ और अन्य ग्रुप ‘सी’ स्टाफ को दी जाएगी।वर्ष 2025-26 में रेलवे का प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा। रेलवे ने रिकॉर्ड 1670 मिलियन टन माल लादा और लगभग 7.41 बिलियन यात्रियों को परिवहन प्रदान किया।

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