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अभी चुनाव नहीं चाहता है राजद/बिहार में कोरोना महामारी को लेकर नीतीश सरकार लापरवाह -तेजस्वी यादव

चुनाव जब होगा दुबारा मुख्यमंत्री बनने का नीतीश का सपना अब पूरा नहीं होगा

अजीत मिश्र

पटना।कोरोना महामारी बिहार में बिकराल रूप लेती जा रही है।ज्यादा संख्या में टेस्टिंग को लेकर नीतीश सरकार कत्तई गम्भीर नहीं है,वहीं मरीजों की बढ़ती संख्या के बावजूद अस्पतालों में अव्यवस्था चरम पर है।बिहार में फिलहाल सबकुछ भगवान भरोसे चल रहा है।बढ़ती महामारी को लेकर जनता के बीच जान बचाने के लाले पड़े हुए हैं।ऐसे में राजद नेता और विधान सभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव दो तीन महीने बाद बिहार में विधानसभा चुनाव कराने के पक्ष में नहीं हैं।उनका कहना है कि ऐसा करना जनता के हित में नहीं होगा।आरजेडी फिलहाल चुनाव टालने के पक्ष में है।तेजस्वी का कहना है कि यह समय चुनाव का नहीं है बल्कि बीमार परेशान लोगों को बचाने का है।उन्होंने सवाल किया कि जहां पूरा बिहार कोरोना महामारी के कारण बदहाल है ऐसे में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चुनाव को लेकर क्यों परेशान हैं?यह समझ से परे है।उन्होंने कहा कि दरअसल मुख्यमंत्री चाहते हैं कि लाशों के ढेर पर बिहार विधानसभा सभा चुनाव हो।श्री यादव ने सरकार पर आरोप लगाया कि जुलाई महीने में जो हालात हैं इससे ज्यादा बदतर अगस्त और सितंबर महीने में आगे होने वाले हैं।ऐसे में नीतीश कुमार को चुनाव से ज्यादा आम लोगों की फिक्र होनी चाहिए।उनका कहना था कि कुर्सी प्रेमी नीतीश बाबू को राष्ट्रपति शासन से डर लग रहा हैं।राजद के प्रमुख नेता तेजस्वी ने कहा कि करोना महामारी जैसे गंभीर समय में नीतीश कुमार चुनाव को लेकर जितने बेचैन हैं वह उनकी हताशा को हीं दिखाता है।नीतीश कुमार को डर है की कहीं चुनाव राष्ट्रपति शासन में ना हो जाए और उनको इसका नुकसान ना उठाना पड़ जाए। सरकार पर गंभीर सवाल दागते हुए नेता प्रतिपक्ष ने बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर कई सवाल खड़े किए।उन्होंने एनएचआरएम और नीति आयोग के डाटा को सामने रखते हुए सरकार पर कई बड़े आरोप भी लगाए।तेजस्वी ने कहा कि बिहार में फार्मासिस्ट के 86 फीसदी पोस्ट खाली हैं। रेडियोग्राफी में पूरे बिहार में 99 फीसदी पद खाली हैं।नर्सिंग स्टाफ के पद 44 फीसदी खाली हैं।वहीं एनएचआरएम द्वारा 15 साल के जारी रिपोर्ट में बिहार को सबसे पीछे बताया गया है।जाहिर है ये स्थिति चिंताजनक है।यहां 75 फीसदी आबादी के लिए राशन कार्ड तक नहीं बनाया गया है।बिहार का परफॉर्मेंस देखते हुए केंद्र ने पैसा देना बंद कर दिया है।नीति आयोग ने बिहार को फिसड्डी राज्यो में शामिल किया है।दूसरी ओर तेजश्वी के विधानसभा चुनाव नहीं कराने के बयान पर जदयू के नेता व मंत्री नीरज कुमार ने साफ किया कि चुनाव कराना चुनाव आयोग का विशेषाधिकार है। चुनाव आयोग जो तय करेगा उनकी पार्टी उसपर अमल करेगी। वहीं बीजेपी के प्रमुख नेता राजेश्वर राज ने कहा कि दरअसल तेजस्वी चुनाव से डरे हुए हैं और चुनाव से भागना चाहते हैं।चुनाव कब कराना है चुनाव आयोग तय करेगा।आयोग के दायरे में हस्तक्षेप करना मुख्यमंत्री के अधिकार के बाहर है।हालांकि बिहार में कोरोना महामारी ने जरूर आम लोगों के जीवन को दुश्वार कर दिया है लेकिन विधान सभा चुनाव रोके जाने को लेकर और किसी दल की ओर से अंतिम प्रतिक्रिया आनी अभी बाक़ी है।

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