अधिकारी नही जिम्मेदारी बनकर सामने आये एसडीएम शैलेन्द्र
आमजन के लिए सुलभ एसडीएम की कार्यशैली के लोग हुए कायल

दुद्धी, सोनभद्र– एसडीएम शैलेन्द्र कुमार मिश्रा की न्यायप्रिय कार्यशैली जन-जन की आवाज बनती जा रही है।गत 27 अप्रैल 2022 को दुद्धी सर्कील का कमान संभालने वाले एसडीएम श्री मिश्रा ने एआरओ कोर्ट के पीठासीन अधिकारी रहते हुए क्षेत्र की गरीबी एवं आदिवासियों की निष्छलता को बहुत ही करीब से देखा व महसूस किया था। जिसकी वजह रही कि दुद्धी एसडीएम का दायित्व मिलते ही उन्होंने अपनी न्यायप्रिय कार्यशैली की छाप लोगों में छोड़नी शुरू कर दी। उनके जनता दर्शन में पहुंचने वाला न कोई भी व्यक्ति छोटा होता है और न ही कोई बड़ा। सभी के साथ एक समान आचरण एवं न्यायप्रिय निदान से लोग उनके मुरीद होने लगे हैं। कभी किसी फरियादी से तल्ख आवाज में बात न करना और हर स्तर से उसका सहयोग करना उनकी फितरत बन चुकी है।
दैनिक दिनचर्या की बात करें तो तमाम प्रशासनिक एवं न्यायिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए, पिपरी स्थित आवास पर प्रतिदिन प्रातः 8.30 बजे से 9.30 बजे तक जनता दर्शन के तहत लोगों की समस्याएं सुनना और उसका त्वरित निदान के लिए हर सम्भव प्रयास करना आमबात है। उसके बाद तहसील मुख्यालय पहुंचकर, वहां भी जनता की समस्याओं को सुनना एवं कोर्ट की जिम्मेदारी का निर्वहन करना होता है। बतादें कि पर्यावरण प्रेमी एसडीएम श्री मिश्रा द्वारा प्रारंभ में शांति भंग के छोटे मोटे मामलों में चालान होकर आने वाले लोगों से जमानत के समय पौधरोपण कराने और उसके संरक्षण संकल्प दिलाने का काम काफी दिनों तक किया गया। इससे सैकड़ो पौधरोपण होने के साथ ही पेड़-पौधों के प्रति लोगों में रुझान जागृत करने का एक अनूठा प्रयास किया गया।
हर लोगों के लिए सुलभ एवं सरल भाव के धनी एसडीएम श्री मिश्रा को अब कोई भी फरियादी रास्ते में देखकर रोक लेता है और अपनी फरियाद दरख्वास्त करता है। यदि फरियादी का काम सामान्य है तो एसडीएम साहब संबंधित को फोन घुमा के वहीं से निबटा देते हैं। इतने सरल अधिकारी को पाकर लोग योगी राज में न्याय चला निर्धन से मिलने के स्लोगन को चरितार्थ होता देख रहे हैं। उनके इस कार्यशैली के बाबत जब एसडीएम श्री मिश्रा से बात की गई तो उन्होंने बड़े ही सरल लहजे में कहा कि अधिकारी से पहले हम एक इंसान हैं। इस दृष्टि से हर अधिकारी को अपने आप को फरियादी की जगह खड़ाकर काम करना चाहिए। फिर हर जायज काम आसान हो जायेगा, किसी को कोई शिकायत नही रहेगी। सरकार ने हमें जिस उद्देश्य के साथ लोगों की सेवा में भेजा है, उसे हम अधिकारी नही, एक जिम्मेदारी के तहत करते हैं।



