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उपराष्ट्रपति ने कहा कि काशी और तमिलनाडु के बीच संबंध हजारों वर्षों तक और मजबूत होता रहेगा

वाराणसी। काशी तमिल संगमम् 4.0 के अवसर पर उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने वीडियो संदेश जारी कर उत्तर और दक्षिण भारत की सांस्कृतिक एकता के इस उत्सव को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि 2022 में आज़ादी का अमृत महोत्सव के दौरान शुरू हुई यह पहल आज राष्ट्रीय सांस्कृतिक मंच बन चुकी है, जो गंगा और कावेरी की परंपराओं को जोड़ती है। इस वर्ष की थीम ‘आइए तमिल सीखें’ भाषाई सौहार्द को सुदृढ़ करेगी। उन्होंने तेनकासी से काशी तक अगथियार यात्रा, तमिल शिक्षकों की पहल और छात्रों के आदान–प्रदान कार्यक्रम को सराहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कार्यक्रम के लिए शुभकामनाएं दीं और इसे ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मजबूत करने वाला बताया।

  • उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने सांस्कृतिक एकता के उत्सव को बताया- गंगा और कावेरी की परंपराओं का संगम

उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने काशी और तमिलनाडु के बीच अटूट सांस्कृतिक संबंध का उत्सव मनाने वाले काशी तमिल संगमम के चौथे संस्करण के अवसर पर एक विशेष वीडियो संदेश दिया। उपराष्ट्रपति ने कहा कि 2022 में आज़ादी का अमृत महोत्सव के दौरान काशी तमिल संगमम के शुभारंभ के बाद से यह पहल एक प्रमुख राष्ट्रीय मंच के रूप में विकसित हुई है जो गंगा की संस्कृति और कावेरी की परंपराओं को एक साथ लाती है और ये उत्तर और दक्षिण की सांस्कृतिक एकता और उनकी साझा सभ्यतागत विरासत का प्रतीक है। उन्होंने 30 नवंबर को प्रसारित मन की बात में प्रधानमंत्री की हालिया टिप्पणियों को याद किया, जिसमें प्रधानमंत्री ने संगमम को दुनिया की सबसे पुरानी भाषाओं में से एक और दुनिया के सबसे प्राचीन जीवित शहरों में से एक के बीच ‘संगम’ के रूप में वर्णित किया था।

उपराष्ट्रपति ने संतोष व्‍यक्‍त किया कि तमिल को उसका उचित सम्मान और निरंतर राष्ट्रीय समर्थन मिल रहा है। उन्होंने इस वर्ष की थीम, “आइए तमिल सीखें” का स्वागत किया, जो भाषाई और सांस्कृतिक सद्भाव को सुदृढ़ करती है। उन्होंने चेन्नई के केंद्रीय शास्त्रीय तमिल संस्थान द्वारा प्रशिक्षित पचास हिंदी भाषी तमिल शिक्षकों और समन्वयकों की पहल की सराहना की, जो 15 दिनों की अवधि में पचास सरकारी और निजी स्कूलों के 1,500 से अधिक छात्रों को बुनियादी तमिल पढ़ाने के लिए वाराणसी पहुंचे हैं।

तमिलनाडु और काशी के बीच प्राचीन सांस्कृतिक मार्गों को फिर से खोजने के प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति ने तेनकासी से काशी तक प्रतीकात्मक अगथियार यात्रा का उल्लेख किया, जिसकी शुरूआत 2 दिसंबर को शुरू हुई और 10 दिसंबर को समाप्त होगी। यह यात्रा पांड्य राजा अथिवीरा पराक्रम पांडियन द्वारा फैलाए गए एकता के संदेश का स्मरण कराती है, जिनकी यात्राओं ने तमिलनाडु को काशी से जोड़ा और तेनकासी-तमिलनाडु का एक शहर जिसके नाम का अर्थ ‘दक्षिणी काशी’ को उसकी पहचान दी है। उन्होंने उस पहल का भी स्वागत किया जिसके तहत उत्तर प्रदेश के 300 छात्र दस समूहों में केंद्रीय शास्त्रीय तमिल संस्थान सहित तमिलनाडु के प्रमुख संस्थानों की यात्रा करेंगे और इससे दोतरफा सांस्‍कृतिक समझ और आदान-प्रदान मजबूत होगा।

संगमम को ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ का प्रतीक बताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि काशी और तमिलनाडु भारत की प्राचीन सभ्यता के उज्‍जवल दीपस्‍तंभ हैं, जो अपनी सांस्कृतिक समृद्धि से राष्ट्र को आलोकित करते हैं। उपराष्ट्रपति ने इस सांस्कृतिक एकता कार्यक्रम को इतने भव्य तरीके से आयोजित करने के लिए उत्‍तर प्रदेश सरकार के शिक्षा मंत्रालय और अन्य केंद्रीय मंत्रालयों की सराहना की।

उपराष्ट्रपति ने काशी तमिल संगमम के लिए अपनी शुभकामनाएं व्‍यक्‍त करते हुए कहा कि यह एक भव्य सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और बौद्धिक उत्सव बने। उन्होंने इस उम्‍मीद के साथ अपनी बात समाप्‍त की कि संगमम सदैव इसी प्रकार आलोकिक रहेगा, काशी और तमिलनाडु के बीच यह संबंध हज़ारों वर्षों तक और प्रगाढ़ होगा और यह एकता की भावना प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्‍व द्वारा परिकल्पित भारत की दिशा में राष्‍ट्र का मार्गदर्शन करेगी।

प्रधानमंत्री ने काशी तमिल संगमम के लिए शुभकामनाएं दीं

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज से आरंभ काशी तमिल संगमम के लिए अपनी शुभकामनाएं दी हैं। श्री मोदी ने कहा कि यह जीवंत कार्यक्रम ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को और गहनता प्रदान करता है। श्री मोदी ने कहा, “मैं संगमम में आने वाले सभी लोगों के काशी प्रवास के सुखद और यादगार होने की कामना करता हूं!”

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया एक्स पर अपने संदेश में लिखा: “आज से आरंभ काशी तमिल संगमम पर, मैं इस जीवंत कार्यक्रम के लिए अपनी शुभकामनाएं देता हूं, जो ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को और अधिक प्रगाढ़ बनाता है। मैं संगमम में आने वाले सभी लोगों के लिए काशी में सुखद और यादगार प्रवास की कामना करता हूं!”

काशी तमिल संगमम के लिए तमिलनाडु से वाराणसी के लिए सात विशेष ट्रेनों का परिचालन

भारतीय रेलवे ने चौथे काशी तमिल संगमम के मद्देनजर तमिलनाडु से उत्तर प्रदेश के वाराणसी के बीच सात विशेष ट्रेनों का परिचालन करने का निर्णय लिया है।रेलवे की ओर से मंगलवार को जारी विज्ञप्ति के अनुसार चौथे काशी तमिल संगमम में बड़े पैमाने पर जन भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए कन्याकुमारी, चेन्नई, कोयंबटूर और वाराणसी के बीच सात विशेष रेलगाडियों का संचालन किया जा रहा है। इसका उदेश्य तमिल भाषी क्षेत्र और काशी के प्राचीन आध्यात्मिक केंद्र के बीच सांस्कृतिक संबंधों को सुदृढ़ करने का है। इन विशेष ट्रेनों को इस बहु-दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम में आने वाले लोगों के लिए निर्बाध यात्रा और लंबी दूरी की आरामदायक सफर सुनिश्चित करने के लिए निर्धारित किया गया है।

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