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अयोध्या में इस बार कुछ ऐसा होगा खास: 28 मिनट में जीवंत होगी श्रीराम के लौटने की गाथा, जानें दीपोत्सव की पूरी तैयारी

अयोध्या दीपोत्सव 2026 का दसवां आयोजन 7 नवंबर को भव्य रूप में होगा। राम की पैड़ी पर 100 से अधिक कलाकार 28 मिनट के मल्टीमीडिया प्रोजेक्शन और लेजर शो में भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन की गाथा जीवंत करेंगे। 13 थीमेटिक प्रवेश द्वार, 20 सेल्फी प्वाइंट, रामायण आधारित चित्रांकन, मोबाइल पर 3D दृश्य और विशेष ड्रोन शो आकर्षण होंगे। अवध विश्वविद्यालय के स्वयंसेवक घाटों पर दीप सजाएंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीपोत्सव को सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बताया।

लखनऊ/अयोध्या : अयोध्या में 7 नवंबर को आयोजित होने वाला दसवां दीपोत्सव-2026 इस बार परंपरा, आधुनिक तकनीक, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक समरसता के अद्भुत संगम का साक्षी बनेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में रामनगरी को भव्य एवं दिव्य स्वरूप देने की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। राम की पैड़ी पर 100 से अधिक भारतीय लोक एवं शास्त्रीय कलाकारों की प्रस्तुतियों के साथ 28 मिनट का मल्टीमीडिया प्रोजेक्शन और लेजर शो भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन की गाथा को जीवंत करेगा। वहीं, 13 थीमेटिक प्रवेश द्वार, 20 सेल्फी प्वाइंट, रामायण आधारित चित्रांकन, मोबाइल पर 3डी दृश्य और घाटों पर दीपों की श्रृंखला श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण होंगे। इस आयोजन के माध्यम से नई पीढ़ी को रामायण की विरासत से जोड़ने के साथ सामाजिक एकता और सांस्कृतिक गौरव का संदेश भी दिया जाएगा।

तकनीक और परंपरा के संगम से सजेगी राम की पैड़ी

उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग की ओर से राम की पैड़ी पर मल्टीमीडिया प्रोजेक्शन, लेजर शो, एरियल एक्ट और मंचीय प्रस्तुतियों का समन्वय किया जा रहा है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार, इस बार विशेष प्रस्तुतियां जेन-जी की रुचियों को ध्यान में रखकर तैयार की गई हैं। पिछले आयोजनों के दृश्य, संगीत, स्टोरीबोर्ड और एनिमेशन दोहराने के बजाय नए कंटेंट के माध्यम से युवाओं को भगवान श्रीराम की आस्था और अयोध्या की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का प्रयास होगा।

मुख्य आयोजन में करीब 28 मिनट की प्रस्तुति के दौरान प्रोजेक्शन मैपिंग, लेजर, 2डी एवं 3डी दृश्य, मानव आधारित एरियल एक्ट, लाइव और मूविंग प्रॉप्स का उपयोग किया जाएगा। कहानी, नृत्य, संगीत, वॉयस ओवर और प्रकाश प्रभावों के माध्यम से रामायण के प्रसंग क्रमबद्ध ढंग से प्रस्तुत होंगे। हिंदी पटकथा को नाटकीय स्वरूप देने के लिए प्रसिद्ध अथवा राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त क्रिएटिव डायरेक्टर या स्क्रिप्ट राइटर के निर्देशन की व्यवस्था की जा रही है।

राम की पैड़ी पर पानी के बीच फ्लोटिंग मंच तैयार किया जा रहा है, जहां कलाकारों की प्रस्तुतियां तकनीकी प्रभावों के साथ दर्शकों को रोमांचित करेंगी। सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखते हुए पूरी व्यवस्था विकसित की जा रही है।

पांच से नौ नवंबर तक होंगे विविध आयोजन

दीपोत्सव के अंतर्गत 5 से 9 नवंबर तक मल्टीमीडिया प्रोजेक्शन और लेजर शो आयोजित किए जाएंगे। पांच नवंबर को दो ट्रायल शो से शुरुआत होगी, जबकि छह नवंबर को फुल ड्रेस रिहर्सल होगी। सात नवंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष विशेष प्रस्तुति के साथ आमजन के लिए तीन अतिरिक्त शो भी आयोजित किए जाएंगे।

आठ नवंबर को दीपावली के दिन चार शो होंगे, जिनमें नृत्य कार्यक्रम शामिल नहीं रहेगा। नौ नवंबर को अयोध्यावासियों के लिए विशेष ड्रोन शो आयोजित किया जाएगा।

मुख्य प्रस्तुति के अतिरिक्त आठ मिनट का लेजर शो दीपावली और श्रीराम के अयोध्या आगमन की थीम पर आधारित होगा। वहीं, 20 मिनट के मल्टीमीडिया प्रोजेक्शन मैपिंग शो में दृश्यों, संगीत और वॉयस ओवर का समन्वय देखने को मिलेगा। हजारों दर्शकों की सुविधा के लिए बेहतर साउंड सिस्टम और आउटडोर एलईडी वॉल की व्यवस्था भी की जा रही है।

मोबाइल पर मिलेगा रामायण के 3डी दृश्यों का अनुभव

युवाओं को डिजिटल माध्यम से रामायण से जोड़ने के लिए ऑगमेंटेड रियलिटी (एआर) तकनीक का प्रयोग किया जाएगा। इसके तहत राम की पैड़ी क्षेत्र के लिए आईओएस और एंड्रॉयड ऐप तैयार किया जा रहा है। मोबाइल से निर्धारित स्थान को स्कैन करने पर रामायण के पांच 3डी दृश्य वास्तविक परिवेश में दिखाई देंगे।

दर्शक इन दृश्यों को रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर साझा भी कर सकेंगे। ऐप को जियो-फेंसिंग से जोड़ा जाएगा, जिससे यह सुविधा केवल राम की पैड़ी क्षेत्र में ही उपलब्ध होगी।

पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने कहा कि प्रोजेक्शन मैपिंग, लेजर शो, एरियल एक्ट, लाइव प्रस्तुतियों और ऑगमेंटेड रियलिटी के माध्यम से भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन की कथा नए अंदाज में प्रस्तुत होगी। इससे ‘विजिट माय स्टेट’ अभियान को भी बढ़ावा मिलेगा और देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु अयोध्या की आस्था, संस्कृति एवं दीपोत्सव की भव्यता का यादगार अनुभव लेकर लौटेंगे।

रामायण के प्रसंगों से सजेगी रामनगरी की दीवारें

दीपोत्सव के दशक को यादगार बनाने के लिए अयोध्या नगर निगम की ओर से रामकथा पार्क से लता मंगेशकर चौक तक दीवारों पर आकर्षक चित्रांकन कराया जा रहा है। इनमें भगवान श्रीराम, माता सीता और रामायण के प्रमुख पात्रों एवं प्रसंगों के साथ पारंपरिक दीपों की आकृतियां उकेरी जा रही हैं। रंगों और कूची के माध्यम से कलाकार त्रेता युग की सांस्कृतिक झलक प्रस्तुत कर रहे हैं।

दीवारों पर दीपोत्सव अयोध्या-2026 का संदेश और स्वागत संबंधी कलाकृतियां भी बनाई जा रही हैं। रात्रि में रोशनी के बीच ये चित्र शहर की सुंदरता को और निखारेंगे। नगर निगम का उद्देश्य केवल सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि चित्रों के माध्यम से नई पीढ़ी को भगवान श्रीराम के आदर्शों, मर्यादा और जीवन दर्शन से परिचित कराना भी है।

नगर आयुक्त जयेंद्र कुमार ने कहा कि दसवां दीपोत्सव अयोध्या के लिए विशेष महत्व रखता है। शहर के प्रमुख मार्गों, चौराहों और सार्वजनिक स्थलों का सौंदर्यीकरण कर स्वच्छ, सुंदर, सुव्यवस्थित एवं आकर्षक स्वरूप दिया जा रहा है, ताकि श्रद्धालुओं को रामनगरी के प्रत्येक कोने में धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत की झलक मिले।

13 प्रवेश द्वार और 20 सेल्फी प्वाइंट होंगे आकर्षण

दीपोत्सव के अवसर पर रामायण थीम पर आधारित 13 त्रि-आयामी (3डी) प्रवेश द्वार बनाए जा रहे हैं। इनमें तीन हाईवे से प्रवेश मार्गों पर तथा दस राम की पैड़ी पर स्थापित होंगे। इन पर रामायण की चौपाइयां अंकित की जा रही हैं, जो श्रद्धालुओं को प्रभु श्रीराम की लीलाओं का स्मरण कराएंगी।

इसके अतिरिक्त 20 सेल्फी प्वाइंट तैयार किए जा रहे हैं। इनमें दस रामकथा मार्ग पर और शेष दस लता मंगेशकर चौक से राम की पैड़ी तक स्थापित होंगे। इनकी थीम महर्षि वाल्मीकि आश्रम, श्रीराम द्वारा धनुष भंग, श्रीराम-सीता विवाह, शबरी की भक्ति, श्रीराम-भरत मिलाप, जटायु को प्रभु का अंतिम स्नेह और श्रीराम-निषादराज मिलन जैसे प्रसंगों पर आधारित है।

लता चौक से राम की पैड़ी तक के सेल्फी प्वाइंट रामायण के सातों कांडों पर केंद्रित होंगे। धनुष के आकार में तैयार की जा रही संरचनाओं में सुमेरु पर्वत लेकर उड़ते हनुमान, केले के पत्ते के नीचे श्रीराम की वर्षा से रक्षा करते हनुमान, श्रीराम-लक्ष्मण को कंधे पर लेकर उड़ते हनुमान, जटायु से वार्तालाप, अशोक वाटिका में माता सीता से भेंट, रावण वध, केवट मिलन, लंका दहन और माता सीता की अग्नि परीक्षा जैसे दृश्य प्रदर्शित किए जाएंगे।

इन इंस्टॉलेशन के माध्यम से पारंपरिक भक्ति और डिजिटल आकर्षण का संगम प्रस्तुत होगा। श्रद्धालु यहां तस्वीरें लेकर दीपोत्सव की स्मृतियों को सहेज सकेंगे।

अवध विश्वविद्यालय के स्वयंसेवक सजाएंगे दीपों की श्रृंखला

दीपोत्सव में घाटों पर दीप सज्जा की जिम्मेदारी डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के स्वयंसेवक संभालेंगे। विश्वविद्यालय की टीम बुधवार सुबह आठ बजे 25 बसों के माध्यम से आयोजन स्थल के लिए रवाना होगी। पहुंचने के साथ ही निर्धारित घाटों पर दीये बिछाने का कार्य शुरू किया जाएगा।

यातायात समिति के समन्वयक प्रो. अनूप कुमार के निर्देशन में बसों के लिए मार्ग और समय-सारिणी निर्धारित कर दी गई है। स्वयंसेवकों एवं नोडल अधिकारियों को समय से पहले उपस्थित होने, परिचय-पत्र साथ रखने और अनुशासन के साथ निर्धारित बसों में स्थान ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं।

कुलपति ने अपने संदेश में कहा कि युवा स्वयंसेवक इस महापर्व की सबसे मजबूत कड़ी हैं। उनके परिश्रम, निष्ठा, अनुशासन और समर्पण से दीपोत्सव को एक बार फिर विश्व पटल पर नया कीर्तिमान स्थापित करने में मदद मिलेगी।

सामाजिक समरसता का संदेश देगा दीपोत्सव

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि जाति की जड़ता समाज को बांटती है, जबकि साझा आस्था और संस्कृति लोगों को एक सूत्र में पिरोती हैं। श्री अयोध्या जी का दीपोत्सव सामाजिक एकता का जीवंत उदाहरण है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले जातीय विभाजन को राजनीति का आधार बनाने वाली सरकारों ने समाज को जोड़ने वाली सांस्कृतिक शक्ति की उपेक्षा की। डबल इंजन सरकार ने 2017 में दीपोत्सव की शुरुआत कर रामनगरी की सांस्कृतिक विरासत को जन-जन के उत्सव में बदल दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पूज्य संतों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में धर्माचार्य, विद्यार्थी, स्वच्छताकर्मी, कुम्हार और व्यापारी समान उत्साह एवं श्रद्धा से आयोजन में सहभागी होते हैं। यहां पहचान जाति से नहीं, बल्कि सहभागिता से होती है। अलग-अलग हाथों में जलने वाले दीपों का प्रकाश पूरे समाज को एक करता है। यही दीपोत्सव का संदेश और समरस समाज की संकल्पना है।

इस प्रकार अयोध्या का दसवां दीपोत्सव धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत, आधुनिक तकनीक, पर्यटन और जनभागीदारी को एक मंच पर लाकर रामनगरी को वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण आयोजन बनने जा रहा है।

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