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किसानों के लिए 18 हजार करोड़ की सौगात, जानिए किस राज्य को कितना मिला लाभ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के बनासकांठा में आयोजित किसान कार्यक्रम में पीएम किसान सम्मान निधि की नई किस्त जारी की। देश के करीब 10 करोड़ किसानों के खातों में 18 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि हस्तांतरित की गई। प्रधानमंत्री ने कृषि बजट में पांच गुना से अधिक वृद्धि, एमएसपी, फसल बीमा, खाद सब्सिडी, सोलर पंप, डेयरी विकास और आधुनिक कृषि तकनीकों की उपलब्धियां बताईं। कार्यक्रम में किसानों, पशुपालकों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ी कई विकास परियोजनाओं का भी शुभारंभ हुआ।

बनासकांठा (गुजरात)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश के किसान विकसित भारत की मजबूत नींव हैं और केंद्र सरकार किसानों की आय बढ़ाने, कृषि को आधुनिक बनाने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। वर्ष 2013-14 की तुलना में देश का कृषि बजट पांच गुना से अधिक हो चुका है। सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को आर्थिक सहायता देने के साथ खेती की लागत कम करने और कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के बनासकांठा में आयोजित किसान कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान देशभर के विभिन्न जिलों के किसान तकनीक के माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े। प्रधानमंत्री ने पीएम किसान सम्मान निधि की नई किस्त जारी करते हुए बताया कि देश के करीब 10 करोड़ किसानों के बैंक खातों में 18 हजार करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि हस्तांतरित की गई है। इसमें गुजरात के 50 लाख से अधिक किसानों को एक हजार करोड़ रुपये से ज्यादा तथा बनासकांठा के किसान परिवारों को लगभग 50 करोड़ रुपये का लाभ मिला है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में छोटे किसानों की संख्या 85 प्रतिशत से अधिक है। लंबे समय तक उनकी आवश्यकताओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया, लेकिन वर्तमान सरकार ने पीएम किसान सम्मान निधि के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में सहायता पहुंचाई है। उन्होंने बताया कि पीएम किसान सम्मान निधि के तहत अब तक लगभग साढ़े चार लाख करोड़ रुपये किसानों के खातों में पहुंचाए जा चुके हैं।

उन्होंने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों के कारण खाद की कीमतों में भारी वृद्धि हुई, लेकिन सरकार ने इसका आर्थिक बोझ किसानों पर नहीं पड़ने दिया। खाद पर सब्सिडी के लिए सरकार ने लगभग 16 लाख करोड़ रुपये खर्च किए हैं। प्रधानमंत्री के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की एक बोरी की कीमत करीब तीन हजार रुपये होने के बावजूद भारतीय किसानों को यह 300 रुपये से कम में उपलब्ध कराई जा रही है। इसी प्रकार डीएपी खाद की बोरी, जिसकी अंतरराष्ट्रीय कीमत पांच हजार रुपये से अधिक पहुंच गई है, भारतीय किसानों को लगभग 1,350 रुपये में मिल रही है।

एमएसपी और फसल बीमा से किसानों को राहत

प्रधानमंत्री ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को किसानों के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा बताते हुए कहा कि पिछले 12 वर्षों में गेहूं और धान किसानों को एमएसपी के रूप में लगभग 24 लाख करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। वहीं, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों को फसल नुकसान के मुआवजे के रूप में दो लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि मिल चुकी है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत अब तक लगभग 12 लाख सोलर पंप किसानों को उपलब्ध कराए गए हैं। इससे सिंचाई के लिए बिजली और डीजल पर निर्भरता कम हुई है। किसानों को डीजल की खरीद पर होने वाले खर्च में भी राहत मिली है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार की विभिन्न योजनाओं और फैसलों से किसानों को बड़ी आर्थिक बचत हुई है और उनकी आय बढ़ाने में मदद मिली है।

खेती में विज्ञान और आधुनिक तकनीक का विस्तार

प्रधानमंत्री ने कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल का उल्लेख करते हुए कहा कि सॉयल हेल्थ कार्ड योजना के माध्यम से किसानों को मिट्टी की गुणवत्ता और आवश्यक पोषक तत्वों की जानकारी मिल रही है। देश में अब तक 26 करोड़ से अधिक सॉयल हेल्थ कार्ड जारी किए जा चुके हैं। इससे किसानों को फसल और मिट्टी की जरूरत के अनुसार खाद के इस्तेमाल में मदद मिली है।

उन्होंने बताया कि बदलती जलवायु और मौसम की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए किसानों को बीते वर्षों में बीजों की लगभग तीन हजार नई किस्में उपलब्ध कराई गई हैं। सरकार का प्रयास है कि किसानों को ऐसी उन्नत किस्मों के बीज मिलें, जो बदलते मौसम के अनुकूल हों और बेहतर उत्पादन देने में सक्षम हों।

पशुपालन और डेयरी क्षेत्र को मिल रहा प्रोत्साहन

प्रधानमंत्री ने कहा कि पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है और इसमें महिलाओं की बड़ी भागीदारी है। पशुओं की बेहतर नस्ल, समय पर टीकाकरण और वैज्ञानिक उपचार से दूध उत्पादन बढ़ाने के साथ पशुपालकों की आमदनी में भी वृद्धि की जा सकती है।

उन्होंने राष्ट्रीय गोकुल मिशन का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके तहत देशी नस्लों के संरक्षण और वैज्ञानिक प्रजनन को बढ़ावा दिया जा रहा है। बनासकांठा में स्थापित नया अनुसंधान केंद्र इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यहां गिर, साहीवाल और कांकरेज जैसी देशी गायों तथा मेहसाणा, मुर्रा और जाफराबादी जैसी भैंसों की नस्लों के संरक्षण एवं संवर्धन पर काम किया जाएगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आईवीएफ जैसी आधुनिक तकनीकों के माध्यम से बेहतर नस्ल के पशुओं के गुण अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है। इससे दूध उत्पादन बढ़ाने और पशुपालकों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में सहायता मिलेगी।

उन्होंने पशुओं को खुरपका-मुंहपका जैसी बीमारियों से बचाने के लिए चलाए जा रहे टीकाकरण अभियान की जानकारी देते हुए बताया कि अब तक लगभग 150 करोड़ टीके लगाए जा चुके हैं। आठ करोड़ से अधिक किसानों के पशुओं को मुफ्त टीकाकरण का लाभ मिला है।

प्रधानमंत्री के अनुसार, वर्ष 2013-14 में गाय और भैंस से औसतन प्रतिदिन पांच लीटर से भी कम दूध प्राप्त होता था, जबकि अब यह औसत बढ़कर लगभग आठ लीटर हो गया है। भारत दूध उत्पादन में दुनिया में पहले स्थान पर है और दूध उत्पादकता बढ़ने की गति भी विश्व में सबसे तेज है।

गोबर से बायो-सीएनजी और जैविक खाद उत्पादन पर जोर

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार पशुपालकों की आमदनी को दूध तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि गोबर और कृषि अवशेषों के बेहतर इस्तेमाल से भी अतिरिक्त आय के अवसर विकसित किए जा रहे हैं। इसके लिए बायोगैस, बायो-सीएनजी और जैविक खाद उत्पादन से जुड़ा बुनियादी ढांचा तैयार किया जा रहा है। बनास डेयरी जैसे सहकारी संस्थान इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान दो बायो-सीएनजी संयंत्रों का शिलान्यास भी किया गया।

मधुमक्खी पालन और मत्स्य पालन से बढ़ रहे आय के अवसर

प्रधानमंत्री ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए पारंपरिक खेती के साथ अन्य गतिविधियों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। मत्स्य पालन के क्षेत्र में विस्तार के साथ सहकारिता को बढ़ावा दिया गया है। देश का समुद्री खाद्य निर्यात दोगुने से अधिक हो चुका है।

उन्होंने मधुमक्खी पालन को किसानों और महिलाओं के लिए अतिरिक्त आय का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। पिछले 12 वर्षों में देश में शहद उत्पादन दोगुना हुआ है। भारत प्राकृतिक शहद के प्रमुख निर्यातक देशों में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। इस क्षेत्र में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं का योगदान भी बढ़ रहा है।

बनासकांठा में सिंचाई और सहकारिता से बदली तस्वीर

प्रधानमंत्री ने बनासकांठा के विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि नर्मदा के पानी और टपक सिंचाई जैसी आधुनिक तकनीकों ने क्षेत्र की कृषि व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। बनासकांठा का आलू आज देश और दुनिया में अपनी पहचान बना चुका है। बनास डेयरी ने सहकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है और इसका लाभ वाराणसी सहित देश के अन्य हिस्सों को भी मिल रहा है।

उन्होंने बताया कि आलू प्रसंस्करण से जुड़े संयंत्रों की क्षमता बढ़ाई गई है, जिससे किसानों से अधिक मात्रा में आलू की खरीद संभव होगी। इसके अतिरिक्त फल और सब्जी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए क्लस्टर डेवलपमेंट कार्यक्रम के तहत 12 क्लस्टर स्वीकृत किए गए हैं। इनमें टमाटर, आलू, मिर्च, अंगूर, केला, प्याज, संतरा, अनार और कोको जैसी फसलों को शामिल किया गया है। किसानों को नए बाग लगाने और पुराने बागों के पुनर्विकास के लिए सब्सिडी भी दी जाएगी।

रेल और सड़क कनेक्टिविटी को मिलेगा विस्तार

कार्यक्रम में गुजरात के विकास से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण भी किया गया। प्रधानमंत्री ने अहमदाबाद-वाराणसी साबरमती एक्सप्रेस तथा मेहसाणा-बेचारजी-साबरमती मेमू ट्रेन सेवाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इनसे रेल कनेक्टिविटी को मजबूती मिलेगी। अहमदाबाद मेट्रो सेवा के विस्तार के साथ गिफ्ट सिटी और एयरपोर्ट को जोड़ने वाली मेट्रो परियोजना का भी शिलान्यास किया गया। अहमदाबाद-मेहसाणा राजमार्ग को चार लेन से आठ लेन में विकसित करने की योजना भी शुरू की जा रही है।

इसके अलावा गुजरात में चार हजार से अधिक आधुनिक आंगनबाड़ियों का शुभारंभ किया गया, जिनसे लगभग चार लाख बच्चों और गर्भवती महिलाओं को लाभ मिलने की उम्मीद है।

25 वर्षों की सार्वजनिक सेवा को किया याद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने का उल्लेख करते हुए कहा कि सात अक्टूबर 2001 को उन्होंने पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। उन्होंने बनासकांठा के लोगों के साथ अपने पुराने संबंधों को याद करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद उनका पहला बड़ा सार्वजनिक कार्यक्रम डीसा में लोक कल्याण मेले के रूप में आयोजित हुआ था, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए थे।

उन्होंने कहा कि गुजरात के लोगों ने उन्हें सार्वजनिक जीवन में आगे बढ़ने और देश की सेवा करने का अवसर दिया। जनसेवा के माध्यम से राष्ट्रसेवा और गुजरात के विकास के माध्यम से देश के विकास का विचार ही उनके कार्यों का आधार रहा है। उन्होंने कहा कि उनके जीवन में जनता का मार्गदर्शन और सहयोग महत्वपूर्ण रहा है तथा वह अंतिम सांस तक देशवासियों की सेवा के लिए समर्पित रहेंगे।

प्रधानमंत्री ने क्षेत्र में पानी और बिजली की बचत की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि 25 वर्ष पहले बनासकांठा में बिजली और पानी की गंभीर समस्याएं थीं, लेकिन निरंतर प्रयासों और आधुनिक सिंचाई तकनीकों से स्थिति में बड़ा सुधार हुआ है। उन्होंने किसानों से जल संरक्षण और ऊर्जा की बचत को प्राथमिकता देने की अपील की।

अफवाहों से बचने और राष्ट्रीय एकता मजबूत करने की अपील

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और ईरान तथा खाड़ी क्षेत्र में जारी युद्ध का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वैश्विक संकट के बीच देश को एकजुट होकर परिस्थितियों का सामना करना चाहिए। उनके अनुसार, खाद की उपलब्धता और रसोई गैस को लेकर अफवाहें फैलाकर देश में भ्रम और भय का माहौल बनाने का प्रयास किया गया, लेकिन सरकार ने किसानों को खाद की कमी नहीं होने दी।उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की कीमतें बढ़ने के बावजूद सरकार किसानों को राहत देने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रही है।

संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर मनाए जाने वाले राष्ट्रीय एकता दिवस का उल्लेख किया। उन्होंने देशवासियों, विशेषकर युवाओं से रन फॉर यूनिटी में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की। उन्होंने बताया कि इस बार एकता नगर में आयोजित होने वाला एकता पर्व सुबह के बजाय शाम साढ़े पांच बजे आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में पुलिस और सुरक्षा बलों की परेड तथा विभिन्न झांकियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी।

प्रधानमंत्री ने देशवासियों से राष्ट्रीय एकता और अखंडता के संकल्प को मजबूत करने तथा विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

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