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UPI पर 0.4% लेवी से व्यापारियों में चिंता, वाराणसी फर्नीचर मंडल की बैठक में उठी आवाज

वाराणसी फर्नीचर एवं फर्निशिंग व्यापार मंडल की महत्वपूर्ण बैठक में UPI लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत टैक्स/लेवी को लेकर व्यापारियों ने विरोध जताया। रथयात्रा स्थित होटल शाही दया में हुई बैठक में पदाधिकारियों ने कहा कि अतिरिक्त लेवी से छोटे और मध्यम व्यापारियों पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है। अध्यक्ष अजय गुप्ता, महामंत्री रमेश यादव और संरक्षक मंडल के सदस्यों ने सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने तथा लेवी की दर कम करने की मांग की। बैठक में व्यापारियों से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

वाराणसी : वाराणसी फर्नीचर एवं फर्निशिंग व्यापार मंडल के कार्यकारिणी एवं संरक्षक मंडल की महत्वपूर्ण बैठक रथयात्रा स्थित होटल शाही दया में आयोजित की गई। बैठक में व्यापारियों से जुड़े विभिन्न विषयों के साथ विशेष रूप से UPI लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत टैक्स/लेवी लगाए जाने से संबंधित मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में उपस्थित पदाधिकारियों और सदस्यों ने इस लेवी को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए सरकार से निर्णय पर पुनर्विचार करने तथा दर कम करने की मांग की।

व्यापार मंडल के सदस्यों ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल भुगतान व्यापारिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। ग्राहक और व्यापारी दोनों ही तेजी से UPI सहित डिजिटल भुगतान माध्यमों का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में UPI लेन-देन पर किसी भी प्रकार की अतिरिक्त लेवी का सीधा असर व्यापारिक लेन-देन की लागत पर पड़ने की आशंका है। व्यापारियों का कहना था कि छोटे और मध्यम स्तर के कारोबारियों के लिए अतिरिक्त शुल्क का प्रभाव विशेष रूप से महसूस किया जा सकता है।

बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि फर्नीचर एवं फर्निशिंग कारोबार में भुगतान की राशि कई बार अपेक्षाकृत अधिक होती है। ऐसे में डिजिटल माध्यम से होने वाले लेन-देन पर प्रतिशत के आधार पर कोई अतिरिक्त शुल्क लागू होने पर व्यापारियों के खर्च में वृद्धि हो सकती है। सदस्यों ने सरकार से मांग की कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने की नीति के साथ-साथ व्यापारियों पर पड़ने वाले संभावित आर्थिक प्रभाव को भी ध्यान में रखा जाए।

व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ की चिंता

मंडल के अध्यक्ष अजय गुप्ता ने कहा कि UPI पर 0.4 प्रतिशत की लेवी व्यापारियों के लिए अतिरिक्त आर्थिक भार का कारण बन सकती है। उन्होंने कहा कि व्यापारिक क्षेत्र पहले से ही विभिन्न प्रकार के खर्च और वित्तीय दायित्वों के बीच काम कर रहा है। ऐसे में डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त लागत बढ़ने से कारोबार प्रभावित हो सकता है। उन्होंने सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने और लेवी की दर को कम करने का अनुरोध किया।

महामंत्री रमेश यादव ने कहा कि डिजिटल भुगतान की सुविधा का इस्तेमाल छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारियों तक कर रहे हैं। उनके अनुसार यदि UPI लेन-देन पर अतिरिक्त लेवी लागू होती है तो इसका प्रभाव छोटे व्यापारियों पर भी पड़ सकता है। उन्होंने सरकार से व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए इस विषय पर पुनर्विचार करने की मांग की।

डिजिटल भुगतान को लेकर व्यापार मंडल की चिंता

संरक्षक राजेश अग्रवाल ने कहा कि बैठक में उपस्थित सदस्यों ने UPI पर 0.4 प्रतिशत लेवी को लेकर एकमत से अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान ने व्यापारियों और ग्राहकों के बीच लेन-देन को काफी सुविधाजनक बनाया है। ऐसे में इससे संबंधित अतिरिक्त लागत को लेकर व्यापारिक संगठनों की चिंताओं पर सरकार को विचार करना चाहिए।

संरक्षक डॉ. यादवेंद्र सिंह बब्बन ने कहा कि UPI आम लोगों और व्यापारियों के लिए डिजिटल भुगतान का सरल माध्यम बन चुका है। उन्होंने कहा कि यदि डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क बढ़ता है तो इसका असर व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ सकता है। उन्होंने भी सरकार से लेवी की दर कम करने की मांग की।

बैठक में पदाधिकारियों और सदस्यों की मौजूदगी

बैठक में व्यापार मंडल के अध्यक्ष अजय गुप्ता, महामंत्री रमेश यादव, संरक्षक राजेश अग्रवाल, नरेंद्र गर्ग, अरुण रुस्तगी, डॉ. यादवेंद्र सिंह बब्बन और अजय जायसवाल के अलावा कार्यकारिणी सदस्य संजय अरोड़ा, उपेंद्र, राजकुमार, राजकुमार यादव सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे। बैठक के दौरान व्यापारियों से जुड़े अन्य विषयों पर भी विचार-विमर्श किया गया। सदस्यों ने व्यापारिक गतिविधियों को सुचारू बनाए रखने और कारोबारियों के हितों से जुड़े मुद्दों को संबंधित स्तर पर उठाने पर जोर दिया।

बैठक के अंत में वाराणसी फर्नीचर एवं फर्निशिंग व्यापार मंडल की ओर से सरकार से मांग की गई कि UPI पर 0.4 प्रतिशत टैक्स/लेवी से जुड़े निर्णय पर व्यापारिक संगठनों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए पुनर्विचार किया जाए। मंडल ने लेवी की दर कम करने तथा छोटे एवं मध्यम कारोबारियों पर संभावित अतिरिक्त आर्थिक बोझ को कम करने की मांग दोहराई।

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