इलाहाबाद की साहित्यिक दुनिया के अनकहे किस्से समेटे है ‘अनुभव बहते रहे अबाध’
समीक्षा | रविनंदन सिंह प्रख्यात कवि, चित्रकार एवं आलोचक डॉ. जगदीश गुप्त की अप्रकाशित कविताओं का संग्रह ‘अनुभव बहते रहे अबाध’ लोक भारती प्रकाशन से प्रकाशित हुआ है। उनके आत्मज विभु गुप्त द्वारा संकलित एवं संपादित यह पुस्तक केवल अप्रकाशित कविताओं का संग्रह नहीं, बल्कि इलाहाबाद की समृद्ध साहित्यिक परंपरा, … Continue reading इलाहाबाद की साहित्यिक दुनिया के अनकहे किस्से समेटे है ‘अनुभव बहते रहे अबाध’
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