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प्रदूषण मुक्त होगी पहली “कनहर सिंचाई परियोजना”

एशिया के विशालतम वाटर पुल एवं सुरंग में कनहर परियोजना की गणना

सोनभद्र से देवेश मोहन की रिपोर्ट

दुद्धी,सोनभद्र– जनपद के सुदूरवर्ती पहाड़ी अंचल में बसे गरीब आदिवासी किसानों के सपने साकार होते नजर आ रहे हैं।बांध की आस में चार दशक की लम्बी इंतजारी में कई बुजुर्गों की पथरायी बूढ़ी आँखों ने तो उम्मीद ही खो बैठी थी।लेकिन 2007 में वर्तमान सरकार ने उम्मीद खो चुके लोगों में फिर से सपने सजोने के बीजारोपण कर डाले हैं।देश-प्रदेश में तमाम बांध एवं जलाशयों का निर्माण किया गया है।जिस पर सिंचाई के साथ-साथ औद्योगिक कल-कारखानों के अधिष्ठापन से जल एवं वायु प्रदूषण में वृद्धि होती रही है।लेकिन कनहर सिंचाई परियोजना पुरे देश में प्रदूषण मुक्त अपनी तरह की पहली अलग सिंचाई परियोजना के रूप में विख्यात होगी।शुद्ध रूप से सिंचाई व पेयजल पर आधारित इस परियोजना पर कोई औद्योगिक इकाई प्रस्तावित नही है।जिससे कि पर्यावरण पर कोई प्रतिकूल प्रभाव पड़े।हर तरफ सिर्फ हरियाली और खुशहाली का वातावरण होगा।वर्ष 1976 की दशक में जब इसकी नींव तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने रखी थी। तब इसकी अनुमानित लागत महज 27 करोड़ रूपये ही थी। बांध की नींव पड़ते ही क्षेत्रवासियों के ख़ुशी का ठिकाना न रहा।मानों जैसे सरकार ने गरीब-आदिवासी किसानों के सुखी,बंजर व बेजान खेतों के लिए अमृत बांध की सौगात दे दी हो।मगर क्षेत्रवासियों के दुर्भाग्य ने यहां भी उनका साथ न छोड़ा।

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बजट व धनाभाव के कारण काम धीमा पड़ा और परियोजना ठण्डे बस्ते में चला गया । समय बदली,सरकार बदली और पॉलिसी बदली।लिहाजा यह महत्वपूर्ण परियोजना तीन दशक तक लंबित रहा।वर्ष 2007 में दुद्घी विधान सभा से चुनकर आये विधायक सीएम प्रसाद ने क्षेत्र के लिए वरदान साबित होने वाली इस महत्वाकांक्षी कनहर सिंचाई परियोजना की सुधि ली।उन्होंने सिंचाई महकमा के ऑफिसों में धूल फांक रही फाइलों को लगातार पत्राचार कर पटरी पर लाया।उन्होंने बांध की महत्ता पर फोकस करते हुए सरकार से धन आवंटित कराकर,परियोजना को पुनः शुरू कराया।फिर 2012 में जीतकर आयीं विधायक रूबी प्रसाद ने भी इसमें विशेष रूचि दिखायी और सरकार से लगातार धन आवंटित कराकर गति प्रदान की।वर्तमान विधायक हरीराम चेरो ने भी विकास के इस पहिया को अनवरत चलाने का वीणा उठाया।जिसके कारण परियोजना अपने मूर्तता की ओर अग्रसर है।आज करीब 2300 करोड़ रूपये की लागत पर पहुंच चुकी इस परियोजना में अब तक 1000 करोड़ रूपये खर्च की जा चुकी है और आगे का निर्माण कार्य निर्वाध रूप से जारी है।फंडिंग समयानुसार होते रहने पर इस परियोजना को जून 2018 तक पूरा कर लेने का लक्ष्य है।39.90 मीटर ऊँची इस बांध की पानी स्टोरेज क्षमता 10.29 लाख क्यूसेक है।इसका कुल कैचमेंट एरिया यूपी,झारखण्ड व छत्तीसगढ़ को मिलाकर 4580 एस्क्वायर किमी है।

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इससे दो नहरें दायीं व बायीं नहर के रूप में निकलेंगी। जिसकी कुल लम्बाई करीब 125 किमी होगी।जबकि इसके अतिरिक्त सैकड़ो रजवाहे एवं अल्पिकाएँ होंगी।16 गेट वाली इस विशाल जलाशय की सबसे प्रमुख बात यह होगी कि कोन क्षेत्र में सिंचाई हेतु निकली नहर को हरनाकछार गांव में नेशनल हाईवे एवं रेलवे लाईन को पार करने के लिए करीब पौने दो किमी लम्बी वाटर पुल (एक्वाडक्ट) का निर्माण हो रहा है।जिसकी गणना एशिया के सबसे विशाल वाटर पुल के रूप में की जा रही है।इसी नहर को कोन ब्लाक के कचनरवा गांव में पहाड़ो के नीचे से 2.665 किमी लम्बी सुरंग (टनल) बनाकर,पानी आगे ले जाने की योजना भी मूर्त रूप ले चली है।सुरंग व वाटर पुल का निर्माण अन्तिम चरण में है।इस बांध से दुद्धी व कोन ब्लाक के 108 गांवों की दोनों फसलें रबी व खरीफ को मिलाकर करीब 26076 हेक्टेयर खेती की सिंचाई होगी और करीब दो लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त खाद्यान्न की पैदावारी होगी।

“क्षेत्रीय विकास की धुरी है कनहर परियोजना”

इस परियोजना से क्षेत्रीय विकास की काफी कुछ अपेक्षाएं जुडी हैं।या यूं कहें कि विकास की रीढ़ माने जाने वाले कनहर बांध से यहां की असिंचित खेतें लहलहा उठेंगी।ऊसर-बंजर जमीनों के भारी-भरकम काश्तकार भी जो अब तक काम के लिए बाहर की ओर पलायन करते थे,अपने खेतों में सोना उपजायेंगे।जिससे न सिर्फ उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी,अपितु क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।हर गरीब किसान का सपना पूरा होगा।हर हाथों को कम मिलेगा और सबके होंठो पर मुस्कान होगी।

“अधिकारी नही,कनहर की जिम्मेदारी बनकर सामने आये विजय”

कहने को तो कनहर सिंचाई परियोजना के चार दशक की लम्बी यात्रा में अनेकों अधिकारी आये और गये।अब तक इस परियोजना से जुड़े सभी ने सिर्फ नौकरी की। लेकिन 6 वर्ष पूर्व कनहर खंड 3 के अधिशासी अभियंता के रूप में कार्यभार संभालने वालेे विजय कुमार श्रीवास्तव ने कनहर को अपनी जिम्मेदारी मानकर,ड्यूटी निभाई।इन्होंने न सिर्फ विभागीय काम-काज को अंजाम दिया।बल्कि परियोजना निर्माण में आड़े आने वाली समस्त बाधाओं को दूर करने में भी अहम भूमिका निभाई।चाहे वह विस्थापितों का मुद्दा हो या फिर बजट से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों के बीच तालमेल बनाकर परियोजना को आगे बढ़ाने का!सभी जगहों पर श्री श्रीवास्तव ने तन्मयता दिखाई।जिसका कारण है कि परियोजना स्थल पर गोली चलने से लेकर तमाम अड़चनों के बावजूद निर्माण कार्य बाधित नही हुई और पूर्णता की ओर अग्रसर है।क्षेत्रहित में इनके इस जज्बे व जिम्मेदारीपूर्ण कार्य के लिए सन सोसायटी क्लब विंढमगंज ने एक कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी के रूप में स्मृति चिन्ह से उनका सम्मान भी किया।उनके सहयोग में तत्कालीन एई व वर्तमान अधिशासी अभियंता हेमन्त वर्मा एवं कार्यदायी संस्था के सीनियर जीएम ए.राजन, संजीव व सत्यनारायण राजू ने भी अहम योगदान दिए हैं।

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