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माता-पिता की बेरूखी से आहत, बड़ी बहन ही छोटी बहन की निकली कातिल

छोटी बहन थी बडी बहने के प्रेम सबंधों की राजदार , प्रेम और उपेक्षा ने पैदा की नफरत

मिर्जापुर ।  माता-पिता की बेरूखी व छोटी बहन को मिल रहे लाड़ प्यार से खिन्‍न के साथ ही प्रेम में बांधा बन रही छोटी बहन को बडी बहने ने प्रेमी के साथ मिलकर मौत के घाट उतार दिया । पडरी थाने के एक गांव से गायब दो सगी बहनों के मामले में पुलिस ने चौंकाने वाले खुलासा घटना के नौ घंटे के अंदर कर दिया । पुलिस की पूछताछ में बड़ी बहन ने बताया कि माता-पिता छोटी बहन को काफी प्यार करते थे। यही नहीं छोटी बहन बड़ी बहन की आदतों को पसंद भी नहीं करती थी। बड़ी बहन को डर सता रहा था कि छोटी बहन उसके प्रेम प्रसंग का माता-पिता के सामने राज फांस न कर दे ।

पुलिस की पूछताछ में हत्यारोपित बहन ने बताया कि माता-पिता छोटी बहन को प्यार, दुलार करते ा माता पिता भेदभाव उसे दिल में टीस पैदा कर दिया । छोटी बहन उसके प्रेम संबधों की राजदार भी थी। लिहाजा उसने प्रेमी संग मिलकर उसे रास्ते से ही हटाने का फैसला कर लिया । पुलितस के अनुसार फतहां घाट से हत्यारोपित ने अपनी मोबाइल बंद कर दिया, हत्या के पहले आरोपित प्रेमी दोनों को लेकर बाइक से मर्जिापुर शहर में घूमा। प्रेमी ने मासूका को साड़ी खरीदी। शास्त्री पुल, कचहरी व फतहां घाट पर पहुंच कर अपना मोबाइल बंद कर दिया,इससे सर्विलांस टीम को उसे ट्रेस करने में काफी परेशानी हुई।

फतहां के बाद आरोपित ने अपना मोबाइल चालू नहीं किया। फतहां घाट पर लोकेशन मिलने पर पुलिस ने तलाश की, लेकिन तब तक वहां से निकल चुका था। पांच भाई-बहन में दूसरे नंबर पर थी मृतका कक्षा तीन में पढ़ती थी। तीनों भाई दोनों बहनों से छोटे हैं। छोटी पुत्री की हत्या के बाद परिजनों में कोहराम मच गया। छोटी बेटी लड़की होने से परिवार वाले उसे प्यार दुलार करते थे। बड़ी बेटी पुलिस हिरासत व छोटी बेटी की जान चली जाने के बाद मां का रो-रो कर हाल बेहाल हो गया।

हत्या का खुलासा करने वाली टीम को 25 हजार रुपये पुरस्कार एएसपी सिटी संजय वर्मा व सीओ सदर डा. अरुण कुमार सिंह के नेतृत्व में पड़री पुलिस की टीम ने हत्या का नौ घंटे के अंदर खुलासा कर दिया। आईजी पीयूष कुमार श्रीवास्तव ने घटना का अनावरण करने वाली टीम को 25 हजार रुपये का पुरस्कार देने की घोषण की है। टीम में प्रभारी निरीक्षक वेंकटेश तिवारी, उपनिरीक्षक संजय यादव, उपनिरीक्षक मो. मेराज खाँ, प्रदीप पाण्डेय, राजकुमार सिंह, संतोष कुमार, भगवान दास यादव, संजय सिंह रहे।

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