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ठीक हुए मामलों और सक्रिय मामलों के बीच का अंतर बढ़कर लगभग 1.6 लाख हुआ

ठीक होने की दर 60.81 प्रतिशत है .95 लाख से ज्यादा नमूनों की जांच की गई .

कोविड-19 से ठीक होने वाले मामलों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। केंद्र सरकार द्वारा राज्य/ केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों के साथ मिलकर कोविड-19 के प्रसार, रोकथाम और प्रबंधन की दिशा में किए जा रहे समन्वित प्रयास के कारण, वर्तमान समय में कोविड-19 के सक्रिय मामलों की तुलना में ठीक हुए लोगों की संख्या 1,58,793 ज्यादा हो चुकी है। इसके कारण, ठीक होने की दर बढ़कर 60.81 प्रतिशत हो गई है। पिछले 24 घंटे के दौरान, कोविड​​-19 के कुल 14,335 रोगी ठीक हुए है, जिससे स्वस्थ्य हुए लोगों का आंकड़ा बढ़कर 3,94,226 हो चुका है। वर्तमान में, सक्रिय मामलों की संख्या 2,35,433 है और सभी मामले चिकित्सा निगरानी के अंतर्गत हैं , कोविड-19 की जांच करने वाली नैदानिक ​​प्रयोगशालाओं का नेटवर्क लगातार बढ़ रहा है, भारत में अब प्रयोगशालाओं की कुल संख्या बढ़कर 1,087 हो गई हैं, इसमें सरकारी क्षेत्र में 780 और निजी क्षेत्र में 307 प्रयोगशालाएं हैं।

मेघालय आशाकर्मी : कोविड​​-19 के खिलाफ सामुदायिक प्रयासों का अभिन्न अंग

जैसे ही मेघालय में कोविड-19 का पहला मामला दर्ज हुआ आशा कार्यकर्ताओं को चिन्हित कंटेनमेंट जोन में संक्रमण के मामलों का पता लगाने के लिए तैनात की जाने वाली टीम का हिस्सा बनाने के लिए प्रशिक्षित किया गया।राज्य की राजधानी शिलांग से 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित 70 से अधिक मकानों वाले मावथरिया पोमलकरई गाँव से राज्य में कोविड-19 के पहले पुष्ट मामले का पता लगा था। जल्द ही गाँव में सामुदायिक कोविड प्रबंधन समिति का गठन किया गया और इसमें एक आशा कार्यकर्ता एस कुर्कलांग को सक्रिय सदस्य के रूप में शामिल किया गया।

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गाँव में कोविड-19 के 35 प्राथमिक संपर्कों की पहचान में कुर्कलांग ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जब कोविड समिति द्वारा स्थानीय समुदाय के कुछ लोगों को घर पर क्वारंटीन रहने की सलाह दी गई तब उसने उनलोगों को क्वारंटीन में रहने के तौर तरीकों और नियमों के बारे पूरी जानकारी दी। इसके अलावा उसने क्वारंटीन में भेजे गए लोगों की स्वास्थ्य संबंधी और अन्य आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए नियमित रूप से उनके घरों का दौरा भी किया।

गाँव के स्वयंसेवकों के साथ मिलकर कुर्कलांग ने गाँव के सदस्यों को राशन और पीने का पानी जैसी आवश्यक वस्तुएं मुहैया कराने में मदद की। नवजात शिशुओं, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और तपेदिक, उच्च रक्तचाप तथा मधुमेह के ज्ञात रोगियों को भी नियमित रूप से स्वास्थ्य सेवाएं देना जारी रखा। उसने संस्थागत प्रसव की सुविधा दिलवाने में मदद करने के साथ ही गर्भवती महिलाओं और बच्चों के समय पर टीकाकरण के लिए ग्रामीणों को जागरुक बनाया। उसने अपने साथियों के साथ मिलकर कोविड से संबंधित अतिरिक्त कार्यों के अलावा अपने सभी नियमित कार्यों को करना जारी रखा। इससे गैर कोविड से संबंधित आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं बाधित नहीं हुईं।

आशाकर्मियों के साथ सामुदायिक स्तर पर किए गए संयुक्त प्रयासों की वजह से आज पोमलकरई गांव कोविड से मुक्त हो गया है। मेघालय में कोविड के संक्रमण को फैलने से रोकने में आशा जैसी स्वास्थ्य क्षेत्र की अग्रिम पंक्ति की कार्यकर्ताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। कोविड-19 के खिलाफ राज्य सरकार की लड़ाई में आशाकार्यकर्ताओं की सशक्त भूमिका रही है।लगभग 6700 आशा कार्यकर्ताओं को कोविड विलेज हेल्थ अवेयरनेस एंड एक्टिव केस सर्च टीमों का हिस्सा बनाया गया। इन टीमों ने कोविड-19 के खिलाफ निवारक उपायों जैसे हाथ धोना, मास्क पहनना / चेहरे को ढंकना, सामाजिक दूरी बनाए रखना आदि के बारे में समुदायिक स्तर पर जागरूकता बढ़ाई और साथ ही  सक्रियता से संक्रमण के मामलों का पता लगा कर लोगों को परीक्षण और उपचार के लिए समय पर पहुंच की सुविधा भी प्रदान की ।

धन्वंतरि रथ: अहमदाबाद में लोगों के घरों तक गैर-कोविड स्वास्थ्य देखभाल सेवाएं पहुंचाना

 

कोविड-19 महामारी के दौरान जहां कोविड स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं को प्राथमिकता दी जा रही है वहीं सभी राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों में कोविड के अलावा अन्य स्वास्थ्य सेवाओं पर भी बराबर ध्यान दिया जा रहा है। इस संबंध में अहमदाबाद नगर निगम (एएमसी) ने धन्वंतरि रथ के माध्यम से एक अनूठी और अभिनव मिसाल कायम की गई है। धन्वंतरि रथ शहर में लोगों के घरों तक गैर-कोविड ​​आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने वाली मोबाइल मेडिकल वैन है। शहर के कई बड़े अस्पताल कोविड- 19 के मरीजों के उपचार के लिए समर्पित हैं, इसलिए मधुमेह, रक्तचाप, हृदय रोग आदि से संबंधित गैर-कोविड आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं लोगों तक पहुंचाना सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न उपाय किए गए हैं क्योंकि ज्यादातर अस्पतालों में ओपीडी बंद रहने से लोग इस समय अस्पताल भी नहीं जा पा रहे हैं।

अहमदाबाद नगर निगम (एएमसी) द्वारा शुरू की गई पहल में ‘धन्वंतरि रथ’ के नाम से मोबाइल चिकित्सा वाहनों की बड़े पैमाने पर तैनाती की गई है। इन चिकित्सा  वाहनों में अहमदाबाद नगर निगम के शहरी स्वास्थ्य केंद्र के स्थानीय चिकित्सा अधिकारी के साथ आयुष चिकित्सक, चिकित्सा सहायक, और नर्सिंग स्टाफ होते हैं। ये चिकित्सा वाहन शहर के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं और अहमदाबाद शहर में सभी लोगों को उनके घरों तक गैर-कोविड बीमारियों के लिए ​​आवश्यक स्वास्थ्य  सेवाओं के रूप में ओपीडी सेवाएं और चिकित्सा परामर्श प्रदान कर रही हैं। इन मोबाइल चिकित्सा वाहनों में सभी जरूरी दवाएं होती हैं जिनमें आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक दवाएं, विटामिन की खुराक और पल्स ऑक्सीमीटर के साथ बुनियादी परीक्षण उपकरण भी शामिल हैं। इन स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं के अलावा, धन्वंतरि रथ ने कई वजहों से अस्पताल नहीं जा सकने वाले लोगों तक पहुंचकर उन लोगों की पहचान करने में मदद की जिन लोगों को आगे नैदानिक ​​उपचार या आईपीडी भर्ती की आवश्यकता थी। इसके साथ ही धन्वंतरि रथ ने यह सुनिश्चित किया कि वे समय रहते अस्पताल पहुंच सकें।

अहमदाबाद नगर निगम पूरे शहर में 120 धन्वंतरि रथ चला रहा है। धन्वंतरि रथ ने अब तक 4.27 लाख से अधिक लोगों को ओपीडी परामर्श दिए हैं। नगर निगम की इस पहल की मदद से बुखार के 20,143 से अधिक रोगियों तथा खांसी, ठंड और नजला के 74,048 रोगियों का इलाज किया गया। इस पहल से श्वसन संबंधी गंभीर संक्रमण वाले 462 से अधिक रोगियों को शहरी स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों में नैदानिक ​​उपचार के लिए भेजा गया। इसके माध्यम से उच्च रक्तचाप, मधुमेह और ऐसी दूसरी बीमारियों से ग्रस्त अन्य 826 रोगियों को पास के शहरी स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों में ​​उपचार के भेजा गया। धन्वंतरि रथों की तैनाती का कोविड-19 के रोगियों के उपचार पर भी काफी अच्छा प्रभाव पड़ा है क्योंकि समय रहते इसके संक्रमण के कई छिपे मामलों की पहचान की जा सकी।

तेजी से आते मॉनसून के मौसम और इस मौसम में वेक्टर जनित रोगों के बढ़ने की संभावना को देखते हुए 15 जून, 2020 से इन मोबाइल चिकित्सा वाहनों की स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा बढ़ाकर इसमें मलेरिया और डेंगू के परीक्षणों को भी शामिल कर लिया गया है।

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