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82 वर्षीय महिला ने कुछ यूं की पूरे गांव की भ्रांति दूर, कोरोना वेक्सीनेशन को हुए सब तैयार

यह कहानी एक 82 वर्षीय महिला की है, जो आज पूरे समाज के समक्ष एक मिसाल बन गई है। दरअसल, उन्होंने जो कार्य किया, वह आज के परिपेक्ष में बहुत महत्वपूर्ण है। इस घटना को लेकर यह कहना भी गलत नहीं होगा कि यदि ऐसे लोग अधिक से अधिक संख्या में सामने आते हैं तो न केवल भारत बल्कि पूरा विश्व जल्द से जल्द कोरोना से जंग जीत सकता है।

कोरोना वेक्सीनेशन की मुख्य प्रेरक बनी बुजुर्ग महिला

जी हां, छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के करतला विकासखंड के औराई गांव की 82 वर्षीय महिला मंगलासो बाई पूरे गांव के लिए कोरोना वेक्सीनेशन की मुख्य प्रेरक बन गई है। जब गांव के लोग कोरोना के टीके को लेकर फैली भ्रांतियों से घिरकर टीका लगवाने से कतरा रहे थे, तब मंगलासो बाई पूरे गांव में एक ऐसी अकेली महिला थी, जिन्होंने टीका लगवाकर सभी मिथकों को दरकिनार कर दिया।

बाद में इस बुजुर्ग महिला से हिम्मत पाकर पूरे गांव के लोग टीकाकरण को तैयार हो गए। इस प्रकार गांव की बुजुर्ग मंगलासो बाई कोरोना टीका लगवाने की मार्गदर्शक बन गई है। मंगलासो बाई की प्रेरणा से गांव के करीब 332 लोग अब तक कोरोना से बचाव के लिए टीका लगवा चुके हैं। 45 वर्ष से अधिक उम्र के 273 और 18 साल से अधिक उम्र के 59 लोगों ने इस गांव में कोरोना को फैलने से रोकने के लिए बचाव कवच पहन लिया है।

देश की आजादी से पहले 1939 में जन्मी थी मंगलासो बाई

देश की आजादी से पहले 1939 में जन्मी मंगलासो बाई करतला विकासखंड में धुर आदिवासी क्षेत्र की निवासी है। कोरोना संक्रमण वैसे तो इस क्षेत्र में ज्यादा नहीं है लेकिन फिर भी जिला प्रशासन ने बचाव के लिए यहां टीकाकरण अभियान चलाया है। 18 साल से अधिक 44 साल तक के अंत्योदय, बीपीएल, एपीएल और फ्रंट लाईन वर्करों से लेकर 45 साल से अधिक के लोगों को तेजी से कोरोना की वेक्सीन लगाई जा रही है।

अपने घर में अकेले ही रहती है मंगलासो बाई

मंगलासो बाई अपने घर में अकेले ही रहती है और इस उम्र में भी पूरी सक्रियता के साथ दैनिक दिनचर्या के अपने सभी काम वह खुद ही करती हैं। उनके पास प्राथमिकता परिवार का राशनकार्ड है, जिस पर उन्हें हर माह शासन के नियमानुसार दस किलो चावल मिलता है।

मंगलासो बाई बताती है कि मार्च में जब कोरोना का टीका लगाने का काम गांव में शुरू हुआ तो लोग टीके के बारे में फैली भ्रांतियों से डर कर टीका लगवाने से कतराते थे। टीका लगाने से तबीयत खराब होगी, कोरोना होगा, मौत हो सकती है, जैसी अफवाहों को मंगलासो बाई ने 13 मार्च को पहला टीका लगवाकर झुठला दिया। टीका लगाने के बाद थोड़ा बदन दर्द और सिर दर्द हुआ। दूसरे ही दिन मंगलासो बाई का पूरा दर्द ठीक हो गया और गांव वालों ने उन्हें पहले की तरह ही काम करते देखा।

कोरोना के टीके को लेकर यूं लगाया अफवाहों पर विराम

टीका लगने के बाद भी बुजुर्ग मंगलासो बाई के पहले की तरह ही काम करने, तबीयत ठीक रहने से लोगों में कोरोना वेक्सीन को लेकर फैले भ्रम और अफवाहों पर विराम लग गया। लोगों को मंगलासो बाई ने भी समझाया। उन्होंने 11 मई को फिर से कोरोना टीके का दूसरा डोज लगवाया। अभी भी वे पूरी तरह से स्वस्थ्य हैं। मंगलासो बाई के साथ मितानीन और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने भी लोगों को कोरोना महामारी के बारे में बताया। कोराना की भयावहता, बार-बार हाथ धोने, मास्क पहनने से लेकर एक दूसरे से दो गज की दूरी रखने के बारे में भी पूरी जानकारी ग्रामीणों को दी गई।

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