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ठाकरे ने ‘शक्ति परीक्षण’ से पहले मुख्यमंत्री पद से दिया इस्तीफा

फ्लोर टेस्ट से पहले ही गिरी महाविकास आघाड़ी सरकार.महाराष्ट्र में नई लोकशाही संस्कृति का होगा जन्म : उद्धव ठाकरे

मुंबई । महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद से उद्धव ठाकरे ने इस्तीफा दे दिया है। ठाकरे ने बुधवार को राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मिलकर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया है। उद्धव ठाकरे ने सभी मंत्री समूह का इस्तीफा भी राज्यपाल को सौंप दिया है। राज्यपाल ने उद्धव ठाकरे सहित उनके मंत्री समूह का इस्तीफा मंजूर कर लिया है। इस तरह पिछले ढाई साल से उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में चल रही आघाड़ी सरकार का पतन हो गया है। ठाकरे ने ढाई साल तक सहयोग देने के लिए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार तथा अखिल भारतीय कांग्रेस पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने यह भी कहा कि कल से राज्य में नई लोकशाही का जन्म होगा और अब वे शिवसेना भवन में बैठकर संगठन को मजबूती देने का काम करेंगे।

महाराष्ट्र में 20 जून से चल रहे सियासी संकट को देखते हुए मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मिलकर आघाड़ी सरकार को बहुमत साबित करने के लिए विशेष अधिवेशन बुलाए जाने की मांग की थी। इसके बाद बुधवार सुबह राज्यपाल कोश्यारी ने उद्धव ठाकरे तथा महाराष्ट्र विधानमंडल सचिवालय को पत्र लिखकर गुरुवार को विशेष अधिवेशन बुलाए जाने का आदेश दिया था। राज्यपाल के इस आदेश को शिवसेना ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपाल के निर्णय पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद उद्धव ठाकरे ने राज्य की जनता को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित किया। उन्होंने कहा कि वे सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का स्वागत करते हैं, उन्हें किसके पास कितनी संख्या है, यह देखने में रुचि नहीं है। इसके बाद उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री पद तथा विधानपरिषद के सदस्य पद से इस्तीफा देने की घोषणा की।इसके बाद उद्धव ठाकरे मातोश्री से राजभवन के लिए रवाना हुए और राज्यपाल से मिलकर अपना इस्तीफा सौंप दिया। राज्यपाल कोश्यारी ने मुख्यमंत्री सहित महाविकास आघाड़ी सरकार के सभी मंत्री समूह का इस्तीफा मंजूर कर लिया है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे 23 जून को ही अपना शासकीय आवास वर्षा बंगला खाली कर चुके हैं।(हि.स.)

महाराष्ट्र विधानसभा में ‘शक्ति परीक्षण’ के फैसले में दखल से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, मलिक, देशमुख को वोटिंग की इजाजत

उच्चतम न्यायालय ने महाराष्ट्र विधानसभा में गुरुवार को विधायकों की संख्या बल के ‘शक्ति परीक्षण’ के राज्यपाल के फैसले में दखल देने से बुधवार को साफ तौर पर इनकार कर दिया।शीर्ष अदालत ने हालांकि,अन्य याचिकाओं की सुनवाई के बाद जेल में बंद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता एवं राज्य के मंत्री नवाब मलिक और पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख की अर्जी स्वीकार करते हुए गुरुवार को होने होने वाले शक्ति परीक्षण में उन्हें शामिल होने की इजाजत दे दी।न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला की अवकाशकालीन पीठ ने संबंधित पक्षों की घंटों दलीलें सुनने के बाद करीब रात नौ बजे अपना फैसला सुनाया।शीर्ष अदालत ने शक्ति परीक्षण पर अपना फैसला सुनाने के कुछ समय बाद ही राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों नेताओं को गुरुवार को होने वाले शक्ति परीक्षण में शामिल होने की अनुमति देने संबंधी अपना फैसला सुनाया। इसके लिए अलग-अलग याचिका दायर की गई थी।

महाराष्ट्र विधानसभा में विधायकों के संख्या बल का ‘शक्ति परीक्षण’ विवाद पर संबंधित पक्षों के वकीलों ने जोरदार दलीलें दीं।न्यायमूर्ति सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली अवकाशकालीन पीठ के समक्ष राज्यपाल की ओर से सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता और सत्ताधारी शिवसेना की ओर से डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने दलीलें दीं।इससे पहले दिन में शिवसेना का पक्ष रख रहे डॉ. सिंघवी की शीघ्र सुनवाई की गुहार स्वीकार करते हुए कहा था कि वह इस (शक्ति परीक्षण पर रोक लगाने की मांग संबंधी) याचिका पर में शाम पांच बजे सुनवाई करेगी।वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ सिंघवी ने ‘विशेष उल्लेख’ के दौरान पीठ के समक्ष उद्धव ठाकरे समर्थक समूह की ओर से दायर याचिका के तथ्यों का हवाला देते हुए तत्काल सुनवाई की गुहार लगाई थी। उन्होंने कहा था कि कल पूर्वाहन 11 बजे शक्ति परीक्षण होना है। लिहाजा, उनकी (शिवसेना सदस्य की) इस याचिका पर तत्काल सुनवाई की जाए।उन्होंने तर्क देते हुए कहा था कि शिवसेना के बागी एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले विधायकों के समूह को ‘अवैध शक्ति परीक्षण’ में वोट नहीं करने देना चाहिए।

श्री शिंदे गुट की ओर से वरिष्ठ वकील नीरज किशन कौल ने डॉक्टर सिंघवी के पीठ से अनुरोध का विरोध किया लेकिन पीठ ने कहा था कि शक्ति परीक्षण से पहले मामले की सुनवाई करनी होगी।पीठ ने कहा था, “हम फैसला पक्ष में करें या नहीं, उनकी सुनवाई से इनकार नहीं किया जा सकता। तत्काल सुनवाई की अनुमति दी जानी चाहिए।”शिवसेना के भरोसेमंद नेताओं में शामिल महाराष्ट्र के मंत्री एकनाथ शिंदे और कई विधायकों के एक समूह के महाराष्ट्र छोड़ने के बाद राज्य में राजनीतिक संकट गहराया हुआ है शिवसेना के बागी विधायकों की अच्छी खासी संख्या है। ये विधायक पहले गुजरात के सूरत और वहां से असम में गुवाहाटी चले गए थे। वे वहां एक सप्ताह से अधिक समय से हैं।माना जाता है कि शिंदे समूह कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के साथ शिवसेना के गठबंधन से नाराज हैं।विद्रोही गुट का दावा है कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाला शिवसेना पार्टी के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे के सिद्धांतों के खिलाफ कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस से गठबंधन किया हुआ है। विद्रोही गुट खुद को ‘शिवसेना (बालासाहेब)’ बता रहा है।(वार्ता)

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