सर्वपितृ अमावस्या 2025 : पितृ तर्पण और श्राद्ध से खुलता है समृद्धि का मार्ग

वाराणसी। हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद या आश्विन मास की अमावस्या को सर्वपितृ अमावस्या या महालय अमावस्या कहा जाता है। इसे पितृपक्ष का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। पौराणिक मान्यता है कि पितृपक्ष के पंद्रह दिनों तक पितर अपने वंशजों से तर्पण और श्राद्ध की प्रतीक्षा करते … Continue reading सर्वपितृ अमावस्या 2025 : पितृ तर्पण और श्राद्ध से खुलता है समृद्धि का मार्ग