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बिहार के बाहर फंसे छात्रों को घर लाने का सरकार पर दबाव

तेजस्वी ने नीतीश पर कोरोना पर असंवेदनशीलता का लगाया आरोप

बिहार से अजीत मिश्र

पटना।प्रदेश सरकार पर लॉक डाउन के कारण राज्य के बाहर फंसे छात्रों को बिहार लाने का दबाव बढ़ता जा रहा है दूसरी ओर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ऐसा करने से इनकार कर दिया है उनका कहना है कि ऐसा करना सोसल डिस्टनसिंग के खिलाफ होगा।
दूसरी ओर बताया जाता है कि उत्तरप्रदेश सरकार ने राजस्थान के कोटा में फंसे राज्य के साढ़े सात हजार से अधिक छात्रों को वापस लाने के लिए शुक्रवार को 300 बसें भेज दीं जो देर शाम तक कोटा पहुंच भी गईं। यूपी के विभिन्न जिलों के ये छात्र कोटा में कोचिंग में पढ़ाई कर रहे हैं। लॉकडाउन के बीच इतनी तादाद में छात्रों को निकालने के फैसले पर राजनीति भी गरमा गई है। इसी बीच यह भी चर्चा है कि कोटा में 82 लोग कोरोना पॉजिटिव मिल चुके हैं।सूचना है कि कोचिंग के हॉस्टल में भी एक छात्र पॉजिटिव पाया गया है। यह छात्र 13 अप्रैल को कोटा से भरतपुर पहुंचा था। इस रिपोर्ट के बाद उस होस्टल में रह रहे 11 स्टूडेंट्स की जांच की गई है। उन्हें क्वारैंटाइन में भेज दिया गया है। इससे कोटा में रह रहे यूपी समेत बाहरी राज्यों के छात्र डरे और सहमे हुए हैं।इस मामले पर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का कहना है कि यूपी की तरह अन्य राज्य सरकारें भी तैयार हो जाएं तो उनके छात्र भी घर भेजे जा सकते हैं।सूचना है कि नीतीश कुमार ने कोटा से छात्रों को लाये जाने का विरोध किया है।उनका कहना है कि यह लॉकडाउन के नियमों और उद्देश्य के खिलाफ होगा। ऐसा कदापि नहीं होना चाहिए। केंद्र सरकार को इस मामले को देखना चाहिए। नीतीश ने कहा कि हमलोग बिहार के बाहर रहने वाले लोगों की स्थानीय स्तर पर ही मदद कर रहे हैं। यूपी सरकार के इस फैसले से देश के दूसरे राज्यों पर भी दबाव बनेगा।अन्य राज्यों के लोग भी कहेंगे कि अगर यूपी की सरकार कोटा से छात्रों को बुला रही है तो हमारे बच्चों को भी बुलाया जाना चाहिए। इसके बाद ट्रेन और बसें चलाने की भी मांग होने लगेगी। यूपी सरकार का यह कार्यकलाप गलत है। ऐसा करने से लॉकडाउन का मकसद ही विफल हो जाएगा। इससे पहले भी बिहार सरकार ने केंद्रीय गृह सचिव को पत्र लिखकर कोटा के डीएम द्वारा बिहार के बच्चों को वापस भेजने के लिए विशेष पास जारी करने का विरोध किया गया था।
मुख्य सचिव दीपक कुमार ने इस संबंध में केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला को 13 अप्रैल को ही एक पत्र लिखा था। इसमें राज्य सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से राजस्थान में लॉकडाउन को सख्ती से पालन कराने का अनुरोध किया था। इसके बावजूद कोटा से बड़ी तादाद में बच्चे बिहार चले आए थे जिन्हें राज्य सरकार ने उनके अभिभावकों के साथ 14 दिनों के लिए क्वॉरेंटाइन सेंटर में भेज दिया गया।इसके साथ हीं कहा जा रहा है कि आगे यह भी चर्चा होगी कि छात्रों को अनुमति लेकर गरीब श्रमिकों को क्यों रोका जा रहा है।
मुख्य सचिव दीपक कुमार का कहना है कि इस अनुमति से कई समस्याएं खड़ी हो जाएंगी। छात्रों को अनुमति दे रहे हैं तो प्रवासी मजदूरों को किस आधार पर रोक सकते हैं। राजस्थान सरकार छात्रों को दिए विशेष परमिट रद्द करे। राज्य सरकार पहले भी, इसका विरोध कर चुकी है।वही विधान सभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव का आरोप है कि कोरोना महामारी को लेकर नीतीश सरकार असंवेदनशीलता की रवैया अपना रही है।
तेजस्वी ने यूपी के मुख्यमंत्री योगी की तरफदारी करते हुए कहा कि उन्होंने बाहर फंसे अपने लोगों को घर लौटने का इंतजाम कराया। फिर, जहां-तहां बड़ी संख्या में फंसे बिहार के लोग क्यों नहीं लौट सकते हैं? बिहारी छात्र कोटा के डीएम से विशेष अनुमति लेकर बिहार लौटना चाह रहे हैं लेकिन उन्हें प्रदेश नहीं आने दिया जा रहा है।हालांकि राज्य में कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रेमचन्द्र मिश्र ने भी बाहर फंसे छात्रों को घर लाने की वकालत की है।यही नहीं सम्वेदनशीलता को प्रमुख मुद्दा मानते हुए सासाराम के वरिष्ठ समाजसेवी एडवोकेट उपेंद्र सिंह कहते हैं कि अगर बाहर फंसे छात्रों को तत्काल घर नहीं पहुंचाया गया तो उनमें एंग्जायटी की बीमारी पनप सकती है।दूसरी ओर रोजगार के लिये बिहार से बाहर गए मजदूरों की हालत भी बहुत दयनीय है।सरकार को इसपर भी तत्काल ध्यान देना होगा।

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