भोजपुरी फिल्मों की कहानी और संवाद में गिरावट: संस्कृति की आत्मा को चोट

पटकथा से गायब हो गया गाँव, खेत-खलिहान और लोकसंस्कृति दोअर्थी संवादों से परिवार के साथ फिल्म देखना हुआ मुश्किल कहानी की जगह फूहड़ हास्य और हिंसा परोसने का चलन भोजपुरी फिल्मों की पहचान कभी गाँव-देहात की सादगी, पारिवारिक रिश्तों की गहराई और लोकजीवन की मिठास से होती थी। खेत-खलिहान, कुएँ … Continue reading भोजपुरी फिल्मों की कहानी और संवाद में गिरावट: संस्कृति की आत्मा को चोट