संगीत, दर्शन और स्थानीय जीवन के संगम से कैसे जीवित होती है काशी की आत्मा

वाराणसी केवल एक शहर नहीं, बल्कि एक सतत प्रवाह है-जहाँ समय रुकता नहीं, बल्कि साधना करता है। गंगा के घाटों पर उतरती सुबह की रोशनी, मंदिरों की घंटियों में घुली प्रार्थना और गलियों में बहती लोक-स्मृतियाँ-यही काशी की पहचान है। इसी जीवित विरासत को शब्द, स्वर और संवेदना के साथ … Continue reading संगीत, दर्शन और स्थानीय जीवन के संगम से कैसे जीवित होती है काशी की आत्मा