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हेल्थ अफसर बनकर लोगों से की 15 करोड़ की ठगी

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने 49 वर्षीय एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। आरोपी ने विभिन्न राज्यों में कोविड वैक्सीन के ट्रांसपोर्टेशन के लिए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय से वर्क ऑर्डर दिलाने के नाम पर छह से ज्यादा लोगों से 15 करोड़ रुपये की ठगी की. आरोपी की पहचान उमेश बत्रा के रूप में हुई है. उमेश खुद को स्वास्थ्य मंत्रालय का अधिकारी बताया था. ईओडब्ल्यू के डीसीपी एमआई हैदर ने कहा कि छह शिकायतें प्राप्त हुईं जिनमें कोविड वैक्सीन के ट्रांसपोर्टेशन के लिए वर्क ऑर्डर देने के बहाने शिकायतकर्ताओं से कुल 15 करोड़ रुपये की ठगी की गई। सभी शिकायतों में, पीड़ितों ने बत्रा के खिलाफ एक जैसे आरोप लगाए. पीड़ितों ने दावा किया कि वैक्सीन ट्रांसपोर्टेशन के वर्क ऑर्डर को निष्पादित करने के लिए उन्हें स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के सम्मेलन कक्ष के अंदर बैठाया गया था, जो बाद में फेक पाए गए।

एक मामला दर्ज किया गया और जांच में सामने आया है कि सभी शिकायतकर्ता मई 2021 में बत्रा के संपर्क में आए थे. बत्रा ने उनसे कहा था कि वे वैक्सीन के ट्रांसपोर्टेशन लिए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय से कार्य आदेश का प्रबंधन कर सकते हैं. शिकायतकर्ताओं का विश्वास जीतने के लिए वह पीड़ितों को स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में लाए. अभियुक्तों ने खुद को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों के रूप में पेश किया और फेक कार्य आदेशों पर शिकायतकर्ताओं के हस्ताक्षर प्राप्त किए. इस तरह के फेक वर्क ऑर्डर के एवज में उन्हें शिकायतकर्ताओं से 15 करोड़ रुपये हासिल किए थे।

इससे पहले, जांच के दौरान अगस्त-सितंबर में कई छापेमारी में पांच आरोपी हरमन सभरवाल, गोविंद तुलस्यान, दिप्राना तिवारी, त्रिलोक सिंह और मृत्युंजय रॉय को गिरफ्तार किया गया था, हालांकि, बत्रा फरार था. अधिकारी ने कहा कि वह गिरफ्तारी से बच रहा था, इसलिए अदालत ने उसके खिलाफ सीपीसी धारा 82 के तहत घोषणा जारी की थी. 21 दिसंबर को बत्रा ने अदालत के सामने आत्मसमर्पण कर दिया और अदालत की अनुमति से उसे गिरफ्तार कर लिया गया. बत्रा खुद को स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के एक अधिकारी के रूप में पेश करते थे और एक सम्मेलन कक्ष में बैठते थे। अधिकारी ने कहा कि पूछताछ के दौरान बत्रा ने खुलासा किया कि उनके अन्य साथी विनोद और विनय भी खुद को स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों के रूप में पेश करते थे और वे स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के सम्मेलन कक्ष में भी बैठते थे। (वीएनएस)

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