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“एफपीआईएस कार्यक्रम भारत को चिकित्सा शिक्षा में अग्रणी बनाएगा”: डॉ. हर्षवर्धन

उन्होंने राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के अवसर पर डॉक्टरों को बधाई दी, उन्हें असली हीरो कहा

नई दिल्ली । केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने आज यहां स्वास्थ्य राज्य मंत्री  अश्विनी कुमार चौबे के साथ राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड (एनबीई) के अंतरराष्ट्रीय छात्रों के फैलोशिप प्रोग्राम (एफपीआई) के लिए गुड क्लीनिकल प्रैक्टिस गाइडलाइंस हैंडबुक और प्रॉस्पेक्टस जारी किया। वेब प्लेटफॉर्म पर ई-बुक का विमोचन करते हुए, डॉ. हर्षवर्धन ने चिकित्सा समुदाय से अपने पेशे में नैतिक व्यवहार का पालन करने का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि “गुड क्लीनिकल प्रैक्टिस गाइडलाइंस हैंडबुक, डिप्लोमैट्स ऑफ नेशनल बोर्ड (डीएनबी) रेज़ीड़ेंट को मार्गदर्शक बिंदु प्रदान करने का एक प्रयास है, जहां पर एक चिकित्सा पेशेवर से अपेक्षित नैतिक और पेशेवर आचरण के सिद्धांतों का पालन करने की अपेक्षा की जाती है। यह अभ्यास समान रूप से डॉक्टरों और रोगियों की सुरक्षा के लिए है।” उन्होंने डीएनबी रेज़ीड़ेंट प्रशिक्षण जीवन के प्रारंभिक वर्षों में, ‘गुड क्लीनिकल प्रैक्टिशनर’ के रूप में अपनी भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को समझने के महत्व पर बल दिया।

डॉ. हर्षवर्धन ने 42 से अधिक अग्रणी संस्थानों के लिए 11 विशेषज्ञताओं में, फैलोशिप प्रोग्राम फॉर इंटरनेशनल स्टूडेंट्स (एफपीआई) – वर्तमान वर्ष 2020-2021 के लिए प्रॉस्पेक्टस का भी इलेक्ट्रॉनिक रूप से विमोचन किया। इस अभिनव प्रयास की सराहना करते हुए, उन्होंने कहा कि “यह पहला मौका है जब सार्क देशों सहित सभी देशों के अंतर्राष्ट्रीय छात्रों के लिए कॉमन फेलोशिप प्रवेश परिक्षा के माध्यम से पोस्ट एमडी/एमएस स्तर पर अंतर्राष्ट्रीय फैलोशिप कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है और यह अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा क्षेत्र में देश की प्रतिष्ठा को बहुत आगे तक लेकर जाएगा। पाठ्यक्रम संरचना के संदर्भ में, उन्होंने आगे कहा, “एनबीई के प्रमुख डीएनबी कार्यक्रम, आधुनिक चिकित्सा के 82 विषयों और उप-विशेषज्ञताएं प्रस्तुत करते हैं, जिसमें वृहत् रूप से 29 डीएनबी कार्यक्रम, 703 निजी और सरकारी संस्थानों में 23 उप-विशेषज्ञताओं में 30 सुपर स्पेशलिटीज और फैलोशिप कार्यक्रम शामिल हैं। एनबीई पूरे देश के सरकारी/ पीएसयू/ म्यूनिसिपल/ प्राइवेट क्षेत्र के अस्पतालों को मौजूदा संरचना और क्लीनिकल साधनों का इस्तेमाल करते हुए पोस्ट ग्रेजुएट सीटों की संख्या में बढ़ोत्तरी करके देश में विशेषज्ञता के अंतर को पाटने के लिए डीएनबी कार्यक्रम की शुरुआत करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।

डॉ. हर्षवर्धन ने राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के अवसर पर डॉक्टरों को बधाई देते हुए डॉ. बीसी रॉय को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिनके सम्मान में 1 जुलाई पूरे देश में राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने कहा “आज के दिन यह कार्यक्रम आयोजित होना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि आज का दिन भारत रत्न डॉ. बिधान चंद्र रॉय की जयंती के रूप में मनाया जाता है, जो एक प्रसिद्ध चिकित्सा पेशेवर, परोपकारी, शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता, राष्ट्रवादी, स्वतंत्रता सेनानी और विश्वविख्यात प्रसिद्ध चिकित्सक थे। महान बाधाओं पर काबू पानेवाले, डॉ. बिधान चंद्र रॉय को एक साथ दोनों रॉयल कॉलेज ऑफ फिजिशियन और रॉयल कॉलेज ऑफ सर्जन्स का सदस्य बनने का दुर्लभ गौरव प्राप्त है”। “एक डॉक्टर बनना एक व्यक्तिगत उपलब्धि है जबकि एक अच्छा डॉक्टर बनना एक निरंतर चुनौती है। यह एकमात्र ऐसा पेशा है जहां पर कोई भी एक ही समय में रोजी-रोटी कमा सकता है और पूरी मानवता की सेवा भी कर सकता है।” उन्होंने कोविड महामारी के दौरान डॉक्टरों द्वारा किए गए निःस्वार्थ सेवा के लिए गहरी कृतज्ञता व्यक्त की। डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि वही हमारे असली हीरो हैं।

स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने भी डॉक्टरों को राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस की शुभकामनाएं दीं और डॉक्टरों और उनके मरीजों के बीच विश्वास के संबंध पर बल दिया। उन्होंने माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 2017 में अनावरण की गई राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति में परिकल्पित “सर्वे सन्तु निरामयाः” के लक्ष्य के नजदीक देश को लेकर जाने के लिए पूरे डॉक्टर समुदाय को बधाई दी। राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान अकादमी के एक विंग के रूप में, राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड 1975 में अस्तित्व में आया और यह राष्ट्रीय स्तर पर 1976 के बाद से स्नातकोत्तर चिकित्सा परीक्षाओं को आयोजित कर रहा है।

बोर्ड को 1982 में एमओएचएफडब्लू के अंतर्गत एक स्वायत्त संस्था के रूप में पंजीकृत किया गया, जिसका उद्देश्य अखिल भारतीय स्तर पर आधुनिक चिकित्सा के क्षेत्र में उच्च मानक स्नातकोत्तर परीक्षाओं का आयोजन करना, पात्रता के लिए बुनियादी प्रशिक्षण आवश्यकताओं को तैयार करना, स्नातकोत्तर प्रशिक्षण के लिए पाठ्यक्रम विकसित करना और जिन संस्थानों में इसका प्रशिक्षण दिया जाता है उन्हें मान्यता प्रदान करना है। नामांकित छात्रों को डिप्लोमैट्स ऑफ नेशनल बोर्ड (डीएनबी) कहा जाता है। इस कार्यक्रम में, डॉ. प्रीति सुदन, स्वास्थ्य सचिव,  श्री राजेश भूषण, ओएसडी (स्वास्थ्य), डॉ. डीके शर्मा, एनबीई के उपाध्यक्ष, डॉ. शिव कांत मिश्रा, एनबीई के उपाध्यक्ष, प्रो. पवनइंद्र लाल, एनबीई के कार्यकारी निदेशक और मंत्रालय और एनबीई के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

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