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सब्जियों की खेती से सफलता की इबारत लिख रहे हैं किसान रामदेव

रायबरेली । खेती-किसानी को घाटे का सौदा मानकर कई लोग पलायन करते हैं और जीविका का कोई दूसरा जरिया तलाशते हैं। वहीं कई ऐसे भी हैं जिन्होंने शहर में दूसरे कामों को छोड़कर खेती की ओर रूख किया और अब सफलता की इबारत लिख रहे हैं। इनकी यह सफलता और युवाओं को भी प्रेरित कर रही है। ऐसा ही कारनामा रायबरेली के एक किसान ने करके दिखाया है और अब वह कइयों को रोजगार दे रहे हैं।

रायबरेली में ऊंचाहार के पचखरा के रहने वाले किसान रामदेव एक दशक पहले तक रोजगार के लिए बाहर शहरों में काम कर रहे थे। उनकी आय इतनी नही थी कि वह परिवार को ठीक से पाल सकें। अतः वह गांव वापस लौटे और खेती करना शुरू किया। शुरुआत में उन्हें कठिनाई हुई लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने सब्जियों की खेती की ओर ध्यान देना शुरू किया। आज वह करीब आठ एकड़ जमीन पर बैगन, कद्दू, गोभी और टमाटर की खेती करते हैं। उन्होंने अब किराए पर भी जमीन लेकर खेती शुरू कर दी है।

इंटरमीडिएट शिक्षित रामदेव की इस समय सालाना आय करीब पांच लाख से ज्यादा है। रामदेव का कहना है कि सब्जियों की खेती में लागत तो ज्यादा होती है और करीब एक एकड़ में तीस से चालीस हजार की लागत आती है। रामदेव के अनुसार लागत अधिक होने के बावजूद सब्जियों की खेती कभी घाटे का सौदा नहीं होती और इसमें नुकसान की संभावना बहुत कम है। मौसम आदि का नुकसान का असर फसल की कमाई से आसानी से निकल आता है। खेती की बदौलत रामदेव का परिवार आर्थिक रूप से खुशहाल है और बच्चों की पढ़ाई भी अच्छे ढंग से हो रही है।

ऋण लेकर की शुरुआत

रामदेव के लिए यह राह इतनी आसान भी नहीं थी और शुरुआत में उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण लागत उनकी बड़ी समस्या थी जो कृषि ऋण से काफी आसान हो गई। किसान क्रेडिट कार्ड से उन्होंने शुरुआत में करीब एक लाख रुपये का ऋण लिया और खेती शुरू की।आज खेती उनके लिए मुनाफे का सौदा है और इससे वह काफी खुश हैं। खेती की बदौलत जहां रामदेव कई लोगों को रोज़गार दे रहे हैं। वहीं उनसे प्रेरित होकर गांव के ही कई युवाओं ने भी खेती करना शुरू कर दिया है और अब गांव में सैकड़ों एकड़ में सब्जियों की खेती हो रही है। खेती-किसानी की बदौलत सफलता की इबारत लिखने वाले इन युवाओं की कहानी वाकई प्रेरित करने वाली है।(हि.स.)

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