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योगी सरकार में हासिए पर क्राइम किलर योगी !

इस योगी के एनकाउंटर की रियल कहानी, अब तक 19 ,जनसहयोग संग जनता के लिए पुलिसिंग जरूरीः योगेंद्र

विजय बक्सरी

बलियाः अब तक 56 फिल्म की पटकथा की तरह अपराध मिटाने को हर रिस्क लेने के लिए तैयार वर्दीधारी किंतु इस रियल लाइफ का एनकाउंटर स्पेशलिस्ट किसी व्यक्तिगत प्रतिशोध में अपने ट्रिगर का निशाना किसी नहीं बनाता है बल्कि अपराध के खिलाफ इस योगी की तपस्या का परिणाम है अब तक 19। जी हां, यह कहानी है ऐसे क्राइम किलर एनकाउंटर स्पेशलिस्ट की, जिसने यूपी से अपराध मिटाने के शपथ के साथ वर्दी धारण किया और अब तक 19… की राह से आगे बढ़ रहा है। महज 19 वर्ष के पुलिसिंग में 18 थाने और 19 बड़े नामचीन बदमाशों का एनकाउंटर, 118 रिवार्ड व दर्जनों प्रशस्ति पत्र से सजी सेवापुस्तिका और करीब 127 बार पुलिस उच्चाधिकारियों समेत शासन से मिला सम्मान। आज भी किसी अबला संग दुष्कर्म के आरोपी को देखते ही चीड़फाड़ देने जैसा इनके आंखों में होता है गुस्सा। लूटेरों-बदमाशों के दिल दिमाग में खौफ का दूसरा नाम बन चुके है इंस्पेक्टर योगेंद्र बहादुर सिंह उर्फ योगी। अपराध की दुनिया में बड़े नामचीन बदमाश व पुलिस विभाग के उच्च पदस्थ पदाधिकारी इन्हें योगी के नाम से ही जानते है। सख्त पुलिस अधिकारी की क्षवि वाला यह इंस्पेक्टर मानवता व इंसानियत की भी एक मिसाल है। जिसने कई नामचीन बदमाशों को सुधरने का मौका भी दिया और कई ईनामी बदमाशों (जिनके लिए जिंदा या मुर्दा पकड़ने के आदेश जारी हो चुके थे) को जिंदा पकड़ने के बाद उनके हृदयपरिवर्तन का कारण भी बने। मानवाधिकार व भारतीय संविधान का अनुपालन करते हुए अपराध व अपराधी को खत्म करने को पुलिस एक्ट संबंधित अपने पूरे अधिकार व क्षमता का प्रयोग करने वाला योगेंद्र बहादुर सिंह यूं तो महज तीन वर्ष तक ही क्राइम ब्रांच का मुख्य हिस्सा रहा है। लेकिन अपने कार्यकाल के इन स्वर्णिम सेवा में कई नामचीन अपराधियों के खात्मा में अहम कड़ी रहे। अपराध के खिलाफ दर्जनों आपरेशन व मुठभेड़ में कई बार इनकी स्वयं जान जाते-जाते बची। कई बार बदमाशों के गन प्वाइंट का भी सामना किया और अपराध मिटाने में राजनीतिक दबाव बीच अनेकों बार नौकरी पर भी बन आई। कहते है सत्य परेशान होता है किंतु पराजित नहीं, इसे चरितार्थ करते हुए वे हर मुश्किल दौर से निकल कर पुलिस विभाग में स्वयं साबित भी किया। फिलहाल वे बलिया जनपद के आखिरी छोर पर दो पड़ोसी जनपद मऊ व देवरिया एवं बिहार प्रांत के सीवान जनपद के सीमा रेखा से सटे स्थित बलिया जनपद के उभांव थाना के इंस्पेक्टर है। यहां भी कई बड़े अपराधियों पर नकेल कसने के साथ ही पिछले एक पखवारे में 25 हजार के दो ईनामी बदमाशों को पकड़ने में सफलता प्राप्त की। फिलहाल वे कोरोना काल में लोगों को मास्क पहनने व शारीरिक दूरी पालन करते हुए इससे बचाव हेतु सतर्क रहने को जागरुक करने में लगे है। प्रदेश के अपराध बहुल व बदनाम जनपद आजमगढ़, मऊ, जौनपुर व वारणसी जैसे जनपदों में भी अपनी सेवा के दौरान अपराधियों के लिए दहशत बन चुके योगेंद्र बहादुर सिंह ने तत्कालीन एसपी श्री साहनी के नेतृत्व में हुए विभिन्न अहम आपरेशन में कई एनकाउंटर व मुठभेड़ किए। जिसके कारण श्री सिंह स्वयं एक मिसाल है नए वर्दीधारी दरोगा के लिए। लूटखसोट जैसी कार्यशैली के बदनामी से कोसों दूर अपने अनुभवों को साझा करते हुए श्री सिंह ने कहा कि अपराधी को खत्म करने से अपराध कभी खत्म नहीं हो सकता, बल्कि सामाजिक परिवर्तन से ही अपराध को खत्म किया जा सकता है। जो अंग्रेजों के शासन के पुलिसिंग के बजाएं अपनी छवि सुधारते हुए जनता के सहयोग से जनता के लिए किया जाने वाला पुलिसिंग और बेहतर हो सकता है।

महज 21 वर्ष की अवस्था में पुलिस विभाग में बतौर एसआई नियुक्त हुए सन 2001 बैच के दरोगा योगेंद्र बहादुर सिंह जब 2016 में प्रमोशन के बाद इंस्पेक्टर हुए तो इनके पास अब तक महज तीन इंकाउंटर का अनुभव था किंतु
प्रमोशन के बाद क्राइम के खिलाफ उनका अभियान और तेज हो गया। जिसके बाद महज तीन वर्ष में ही बदमाशों से लोहा लेते हुए करीब 16 बार एनकाउंटर व मुठभेड़ की अगुआई की। बड़े बदमाशों व दुष्कर्मियों समेत क्राइम के खिलाफ लोहा लेते हुए कुल अब तक 19 एनकाउंटर कर समाज से अपराध मिटाने के मिशन में लगे है। आज भी वे आसपास के कई जनपदों में नामचीन अपराधियों की कुंडली खंगालते रहते है और बदमाशों के अपराधिक गतिविधियों के संदर्भ में सही लोकेशन व सटीक सूचना पर लोहा लेने से पीछे नहीं हटते। जबकि दर्जनों मुठभेड़ में कई नामचीन बदमाशों को धर दबोचा और न्यायालय के सुपुर्द किया।

एनकाउंटर के बाद जब स्वयं चैतरफा घिर गए योगेंद्र

अपराध मिटाने के जज्बां के साथ वर्दी पहनने वाले पुलिस अधिकारियों के लिए नजीर बने इंस्पेक्टर योगेंद्र बहादुर सिंह कई बार अपराधियों के गोली का निशाना होते-होते भी बचे है। वहीं नामचीन अपराधियों के पीछा करने व अपराध जगत में फिल्मी अंदाज में घुसपैठकर क्राइम की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाने के दौरान बड़े हाईप्रोफाइल हत्याकांड में स्वयं विभाग के निशाने पर भी रहे। जौनपुर में तो पूर्व सीएम मुलायम सिंह यादव के करीबी ज्योतिषी रामेश तिवारी हत्याकांड में भी विभाग के टेढ़ी नजर का शिकार हुए। इस दौरान हत्याकांड में उनके गिरफ्तारी तक की अटकलें लगाई जाने लगी। इस दौरान पुलिस विभाग के प्रति निष्ठा से समाज के लिए किए गए मानो एक बार ऐसा लगा जैसे सारे योगदान बेकार सा हो गए और घर परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा तक दांव पर लग गई। बावजूद उन्होंने स्वयं को साबित करते हुए हत्याकांड का खुलासा करने में अहम भूमिका निभाई। जबकि इसी जनपद के जफराबाद थाना में सिरकोनी ब्लाक प्रमुख राजेश सिंह हत्याकांड में भी पुलिस विभाग की ही नजर में खटकने लगे। इसी जनपद के निवासी पूर्व डीजीपी जगमोहन यादव के करीबी की हत्या होने पर जौनपुर में बतौर एसओजी प्रभारी योगेंद्र बहादुर की जमकर फजिहत हुई। पुलिस के लिए चुनौती हुए उक्त हत्याकांड में दो टीम बनी और एक टीम की अगुवाई करते हुए आखिरकार स्वयं श्री सिंह ने पांच शूटरों को दबोच लिया। मामले को स्वयं देख रहे तत्कालीन डीआईजी एसके भगत ने भी अंततरू पीठ थमथपाया। गिरफ्तार सभी बदमाशों को बाद में न्यायालय से आजीवन कारावास की सजा हुई।

एनकाउंटर में ढेर हुए बदमाश

इंस्पेक्टर योगेंद्र बहादुर सिंह के सेवापुस्तिका को एनकाउंटर का मुख्य आधार माने तो अब तक 50 हजार के ईनामी रहे शार्प शूटर शेरू सिंह, 1 लाख के ईनामी सुजी सिंह उर्फ बुढ़वा, एक लाख का ईनामी मित्तू मुसहरों समेत कई नाम है।

भाई ने छोड़ी पुलिसिंग

रायबरेली व प्रतापगढ़ के सीमावर्ती क्षेत्र में रायबरेली के राजवाड़ा परिवार पांच भाईयों में चैथें नंबर के योगेंद्र बहादुर सिंह का परिजन भी जबरदस्त जुझाडू रहे है। योगेंद्र के बड़े भाई रूपेंद्र बहादुर सिंह भी कभी पुलिस में एसआई थे किंतु गांव के जमीनी विवाद व वर्चस्व की जंग में स्वयं पर हुए जानलेवा हमला हुआ। सीने पर गोली लगने के कारण 52 दिन तक आईसीयू में रहकर मौत को मात दे लौटे रूपेंद्र बहादुर सिंह ने पुलिस सेवा से ही त्यागपत्र दे दिया। वहीं भूमि विवाद के कारण ही इनके एक अन्य भाई जितेंद्र बहादुर सिंह पर भी फायरिंग हुआ। इस हमले में संयोग से घटना के स्वयं गाड़ी चलाने के कारण वे बाल-बाल बच गए। जबकि उनकी सीट पर बैठे उनके साथी सुरेंद्र बहादुर सिंह की बदमाशों के गोली का शिकार हुए और उनकी मौत हो गई।

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