State

बिहार-बुजुर्गों को भी वोट देने के लिए जाना होगा ,मतदान केंद्र तक

भारत के निर्वाचन आयोग द्वाराकोविड-19 के कारण संचालन, जनशक्ति, सुरक्षा प्रोटोकॉल की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए, निकट भविष्य में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव और उपचुनावों में 65 वर्ष से ज्यादा उम्र के मतदाताओं को डाक मतपत्र की सुविधा नहीं प्रदान करने का निर्णय लिया गया

पटना । बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर पक्ष-विपक्ष में बहस जारी हैं । राजद नेता तेजस्वी यादव जहां चुनाव टालना चाहते हैं तो वहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समय से चुनाव कराने की बात कर रहें हैं । चुनावी चर्चा के बीच चुनाव आयोग अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुट गया हैं । मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की संख्या एक हजार तक सीमित किया जा रहा हैं । चुनाव में 65 वर्ष से ज्यादा उम्र के मतदाताओं को डाक मतपत्र की सुविधा नहीं प्रदान करने का निर्णय लिया गया हैं ।

कोविड-19 महामारी को ध्यान में रखते हुए, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005के अंतर्गत समय-समय पर देश में लॉकडाउन संबंधी दिशा-निर्देशों को जारी किया गया है। दिनांक 17-05-2020 को केंद्रीय गृह सचिव एवं अध्यक्ष, राष्ट्रीय कार्यकारी समिति, आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत गठित, द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देशों के पैरा 7 में यह उल्लेखित किया गया है कि, “कमजोर व्यक्तियों को संरक्षण: 65 वर्ष से ज्यादा उम्र के व्यक्ति, सह-रुग्णता वाले व्यक्ति, गर्भवती महिलाएं और 10 वर्ष से कम उम्र के बच्चे, आवश्यक और स्वास्थ्य प्रयोजनों को छोड़कर, घर पर ही रहेंगे।” साथ ही साथ, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने कोविड-19 के सकारात्मक/संदिग्ध व्यक्तियों के लिए क्वारंटाइन (घर/संस्थागत) की विस्तृत प्रक्रिया निर्धारित की है।

इस असाधारण स्थिति को ध्यान में रखते हुए, निर्वाचन आयोग ने मतदान केंद्रों पर 65 वर्ष से ज्यादा उम्र के मतदाताओं की संवेदनशीलता और उपस्थिति को कम करने और कोविड-19 के सकारात्मक मतदाताओं और क्वारंटाइन के अंतर्गत आने वाले मतदाताओं के लिए वैकल्पिक डाक मतपत्र की सुविधाओं का विस्तार करने की सिफारिश की थी, जिससे वे अपने मताधिकार से वंचित न हो सकें। आयोग की सिफारिश के आधार पर, विधि एवं न्याय मंत्रालय द्वारा 19-06-2020 को तदनुसार संशोधित नियमों को अधिसूचित किया गया। हालांकि, इन सक्षम प्रावधानों को लागू करने से पहले, चुनाव के समय जनप्रतिनिधित्व कानून, 1951 की धारा 60 (सी) के अंतर्गत आयोग द्वारा उचित अधिसूचना जारी की जाती है। इन सक्षम प्रावधानों को लागू करने से पहले, आयोग द्वारा परिचालन के लिए क्षेत्र की स्थिति और क्रियान्वयन का लगातार आकलन किया जाता है।

आयोग द्वारा इस अभूतपूर्व माहौल को ध्यान में रखते हुए बिहार में होने वाले विधानसभा के आम चुनाव और उपचुनावों की तैयारियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। आयोग द्वारा पहले से ही मतदान को आसान बनाने के लिए प्रत्येक मतदान केंद्र पर मतदाताओं की संख्या को 1000 तक सीमित कर दिया गया है, विशेष रूप से कोविड-19 स्थिति के मद्देनजर बुजुर्गों और कमजोर वर्गों के मतदाताओं के लिए। इसको ध्यान में रखते हुए, राज्य द्वारा लगभग 34,000 अतिरिक्त मतदान केंद्रों (45% से ज्यादा) का निर्माण किया जा रहा है, जिससे मतदान केंद्रों की कुल संख्या बढ़कर लगभग 1,06,000 हो जाएगी। इससे बिहार राज्य में ज्यादा संख्या में वाहनों की आवश्यकता सहित 1.8 लाख ज्यादा मतदान कर्मियों और अन्य अतिरिक्त संसाधनों को जुटाने वाली गंभीर परिचालन चुनौतियां सामने होंगी। आने वाले उपचुनावों के लिए भी ऐसी ही चुनौतियां होंगी।

इन सभी मुद्दों, चुनौतियों और बाधाओं और प्रत्येक मतदान केंद्र पर निर्वाचकों की संख्या को 1000 तक सीमित रखने के निर्णय को ध्यान में रखते हुए, आयोग ने बिहार में होने वाले आम चुनावों और निकट भविष्य में होने वाले उपचुनावों में 65 वर्ष से ज्यादा आयु के मतदाताओं के लिए डाक मतपत्रों की सुविधा बढ़ाने के लिए अधिसूचना को जारी नहीं करने का निर्णय लिया है। हालांकि, 80 वर्ष से ज्यादा आयु के मतदाताओं, दिव्यांग मतदाताओं, आवश्यक सेवाओं में लगे हुए मतदाताओं और कोविड-19 के सकारात्मक/संदिग्ध, क्वारंटाइन (घर/संस्थागत) वाले मतदाताओं को वैकल्पिक डाक मतपत्र की सुविधा प्रदान की जाएगी।

Tags

Related Articles

Back to top button
Close
Close