Uttar Pradesh

कोरोना से बचें और बचाएँ, संस्थागत प्रसव की संख्या बढ़ाएं-डाॅ.केपी सिंह

कोरोना काल में सबसे सुरक्षित है संस्थागत प्रसव , नियमित संपर्क बनाकर गर्भवती को सुरक्षित प्रसव का भरोसा दिलाएं 

महराजगंज । सदर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र (सीएचसी) सभागार में बुधवार को बागापार क्षेत्र की आशा कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण कार्यक्रम में अधीक्षक डाॅ. केपी सिंह ने कहा कि सभी आशा कार्यकर्ता कोरोना काल में खुद को बचें तथा दूसरों को भी बचाएँ। साथ ही संस्थागत प्रसव की संख्या भी बढ़ाएं। कोरोना काल में संस्थागत प्रसव सबसे सुरक्षित है। सरकारी अस्पतालों पर कोरोना प्रोटोकॉल का ठीक से पालन होता है। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में कुछ महिलाएं अस्पतालों पर जाने से परहेज कर रहीं हैं, उन्हें अच्छी तरह से समझा बुझा कर अस्पताल की राह दिखाएँ तथा साथ रह कर उनकी आवश्यक जांच भी कराएं। इसके लिए सभी कार्यकर्ताओं को गर्भवती का भरोसा जीतना होगा।
अधीक्षक डाॅ. केपी सिंह ने कहा कि  संस्थागत प्रसव पर सरकार के साथ साथ स्वास्थ्य विभाग का भी जोर है। इसके लिए जरूरी है कि शत प्रतिशत गर्भवती का पंजीकरण हो। गर्भवती को स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं जैसे प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना, जननी सुरक्षा योजना तथा नि:शुल्क जांच,दवा व उपचार के बारे में बताएँ तथा लाभ दिलाएं। आशा कार्यकर्ता कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते हुए सभी गर्भवती की ट्रेकिंग करें, पंजीकरण कराकर तथा पहली जांच कराकर कार्ड बनवा दें। टीटी के दो टीके भी लगवा दें। गर्भवती की एएनसी जांच जरूर करवा दें। उच्च जोखिम वाली गर्भवती से नियमित संपर्क बनाए रखें। प्रसव पूर्व चार जांच भी जरूर कराएं।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिला स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी श्रीभागवत सिंह ने कहा कि आशा  कार्यकर्ता अपने कर्तव्यों का पालन करने के लिए जब भी गांव में निकलें माॅस्क, ग्लब्स तथा सेनेटाइजर का प्रयोग जरूर करें। शारीरिक दूरी बनाकर बच्चों, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं से मिलें, गर्भवती को संस्थागत प्रसव, धात्री को कम से कम छह माह तक स्तनपान कराने के लिए प्रेरित करें। कोरोना काल में गर्भवती व बच्चों को घर से बाहर न जाने के लिए प्रेरित करें। सबको साफ सफाई के तरीके और महत्व को बताएं ,प्रशिक्षण कार्यक्रम में बागापार क्षेत्र की आशा कार्यकर्ता सुभावती, मंदरावती, कालिन्दी, राधिका, सोमारी, पुनीता, प्रमीला, सोबिया यादव, शीला देवी प्रमुख रूप से मौजूद रहीं।

संस्थागत प्रसव बढ़ाने के लिए दिया दिशा निर्देश

-पता करके सभी गर्भवती का पंजीकरण कराएं
– पहली जांच कराकर कार्ड बनवाएं।
-खून, पेशाब, मधुमेह तथा बीपी की जांच कराएं।
– गर्भवती से नियमित संपर्क बनाए रखें।
-सीएचसी पर लाकर एमबीबीएस डाॅक्टर जांच कराएं।
– पहली बार गर्भवती हो तो मातृत्व वंदना योजना का फार्म भरवाएं।
-गर्भवती को मिलने वाला सभी निःशुल्क दवाओं का लाभ दिलाएं 
-उच्च जोखिम गर्भवती पर विशेष ख्याल रखें तथा उचित सलाह दें।
-गर्भवती को अपना मोबाइल नंबर उपलब्ध करा दें ताकि वह अपनी समस्या से अवगत करा सकें।
-प्रसव के बाद मिलने वाले जननी सुरक्षा योजना का लाभ दिलाएं।
– गर्भवती से परिवारिक सदस्यों की तरह संबंध बनाएं।
-प्रसव के लिए संभावित समय से एक माह पहले से नियमित देखभाल शुरू करें।
-हर माह की नौ तारीख को मनाए जाने वाले प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व दिवस के बारें में बताएँ।

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